Budhwar Vrat Niyam avoid these 5 works to do on wednesday | Budhwar ko kya na kare | बुधवार को न करें ये 5 काम, वरना गणेश जी हो जाएंगे नाराज, काम में आएंगी बाधाएं!

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Budhwar Vrat Niyam: बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा और व्रत करते हैं. जो लोग बुधवार व्रत नहीं रखते हैं, उनको 5 काम नहीं करने चाहिए. नहीं तो गणेश जी नाराज हो जाएंगे और आपके कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं. आइए जानते हैं कि बुधवार व्रत में क्या नहीं करना चाहिए और व्रत का नियम क्या है?

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बुधवार को न करें ये 5 काम, वरना गणेश जी हो जाएंगे नाराज, काम में आएंगी बाधाएं!

Budhwar Vrat Niyam: इस सप्ताह का बुधवार व्रत 24 दिसंबर को है. इस दिन पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को है. इस दिन सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा शाम 7 बजकर 46 मिनट तक मकर राशि में रहेंगे. इसके बाद कुम्भ राशि में रहेंगे. बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता है और राहुकाल का समय दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. बुधवार को लोग व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करते हैं, लेकिन कुछ कामों को करना मना है. आइए जानते हैं कि बुधवार व्रत में क्या नहीं करना चाहिए और व्रत का नियम क्या है?

बुधवार को न करें 5 काम

पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि बुधवार के दिन गजानन महाराज की विशेष पूजा करने और व्रत रखने से बुद्धि, ज्ञान और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. अगर कोई भी जातक इस तिथि पर किसी कारणवश व्रत नहीं रख सकता है, तो वे मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना समेत कुछ चीजों से परहेज करें.

बुधवार व्रत के नियम

  • बुधवार व्रत की शुरुआत करने के लिए आप किसी भी शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से कर सकते हैं और 12 बुधवार व्रत रखकर उद्यापन भी कर सकते हैं.
  • धर्म ग्रंथों में व्रत की विधि का उल्लेख मिलता है. इसमें बताया गया है कि इस तिथि पर व्रत करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें.
  • एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, फिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की ओर मुख करके आसन पर बैठें. इसके बाद श्री गणेश को दूर्वा और पीले-लाल रंग के पुष्प अर्पित करें, साथ ही बुध देव को हरे रंग के वस्त्र चढ़ाएं.
  • पूजा के दौरान श्री गणेश और बुध देव के “ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा” मंत्रों का जाप करें. फिर व्रत कथा सुनें और उनकी पूजा करें.
  • अंत में, श्री गणेश को हलवे का भोग लगाएं और फिर श्री गणेश व बुध देव की आरती करें. उसके बाद आरती का आचमन करें.
  • पूजा समाप्त होने पर भोग को प्रसाद के रूप में सभी में बांट दें. शाम के समय फलाहार से व्रत का पारण करें.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 12 वर्षों का अनुभव है. डिजिटल पत्रक…और पढ़ें

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