चित्रकूट में कागजों तक सिमट गया स्वच्छ भारत मिशन, सैकड़ों आरआरसी सेंटरों पर लटके ताले

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Chitrakoot Ground Report: करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) आज खुद बदहाली के शिकार हैं. जिले के 399 ग्राम पंचायतों में बनाए गए लगभग 230 आरआरसी सेंटरों में से अधिकांश पर आज भी ताले लटके हुए हैं.

यूपी के चित्रकूट जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव-गांव स्वच्छता की जो तस्वीर कागजों में बनाई गई थी, वह जमीनी हकीकत में धुंधली पड़ती नजर आ रही है. करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) आज खुद बदहाली के शिकार हैं. जिले के 399 ग्राम पंचायतों में बनाए गए लगभग 230 आरआरसी सेंटरों में से अधिकांश पर आज भी ताले लटके हुए हैं,जबकि गांवों से निकलने वाला कचरा खुले में फेंका जा रहा है, जिससे गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है.

बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन फेज-1 के तहत इन आरआरसी सेंटरों को बनाया गया था, जिसका उद्देश्य हर गांव का गीला और सूखा कचरा यहां पहुंचाया जाए, उसका पृथक्करण हो और जैविक कचरे से खाद तैयार की जाए और प्लास्टिक व अन्य सूखे कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाए. लेकिन हकीकत यह है कि जिले के कई सेंटर या तो पूरी तरह बंद हैं या फिर भूसा, उपले और कबाड़ रखने की जगह बनकर रह गए हैं.

इन जगहों में बने है आरआरसी सेंटर 

अगर जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्वी ब्लॉक में 53, मानिकपुर में 53, मऊ में 19, पहाड़ी में 5 और आकांक्षी ब्लॉक रामनगर में 32 आरआरसी सेंटर बनाए गए थे. इन सभी पर निर्माण के समय भारी-भरकम बजट खर्च हुआ, लेकिन संचालन की व्यवस्था धरातल पर नहीं उतर सकी. नतीजा यह है कि गांवों से निकलने वाला कचरा या तो सड़क किनारे ढेर के रूप में जमा है या फिर जंगल और खाली जमीनों में फेंक दिया जा रहा है.

वहीं मानिकपुर ब्लॉक के सकरौहा गांव निवासी पंकज ने बताया कि सरकारी पैसे से सेंटर तो बना दिए गए, लेकिन आज तक उनका इस्तेमाल नहीं हुआ है. हमारी ग्राम पंचायत में सेंटर बनने के बाद से उसमें ताला ही लटका है. धीरे-धीरे वह खंडहर बनता जा रहा है, लेकिन न ब्लॉक स्तर का कोई अधिकारी देखने आता है और न ही जिम्मेदार

डीएम बोले होगी जांच

इस मामले पर डीएम चित्रकूट पुलकित गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि शिकायतें संज्ञान में आई है. आरआरसी सेंटरों का संचालन ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है, जिसमें ग्राम प्रधान, सचिव और पंचायत सहायक की संयुक्त भूमिका होती है. ब्लॉक स्तर पर इनके पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी तय है. प्रशासन का दावा है कि सभी ब्लॉकों में समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और निर्देश दिए गए हैं कि बंद पड़े सेंटरों को जल्द से जल्द चालू कराया जाए. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आखिर किन कारणों से ये सेंटर बंद हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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