खेतों में छिड़क दें भांग-गोबर का ये जादुई घोल, भाग जाएंगे नीलगायों के झुंड! कीट और बीमारियों से भी मिलेगी राहत
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Farming Tips : नीलगायों से परेशान किसानों के लिए भांग और गोबर से बना यह घरेलू घोल बेहद कारगर उपाय माना जा रहा है. खेतों में इस जादुई घोल के छिड़काव से न केवल नीलगायों के झुंड दूर रहते हैं, बल्कि कीटों और कई फसली बीमारियों से भी राहत मिलती है. यह देसी तरीका कम लागत में फसलों की सुरक्षा करने में सहायक है और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता भी घटाता है.
लखीमपुर : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में आवारा पशुओं और नीलगाय का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. इसका सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं और सरसों की फसल को आवारा जानवरों बर्बाद कर रहे हैं. जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि रातभर पहरा देने के बावजूद फसल सुरक्षित नहीं रह पा रही है.
जनपद में सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 140 से अधिक गौशालाओं का निर्माण किया गया है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों और खेतों में घूमते आवारा पशुओं की संख्या में कोई खास कमी नहीं दिख रही है. छुट्टा पशु खुले में घूमते हुए सीधे खेतों का रुख कर रहे हैं. इससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जाती है. ग्रामीण इलाकों में खासतौर पर नीलगाय किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. नीलगाय झुंड में खेतों में घुसकर फसल को पूरी तरह नष्ट कर देती है. कई किसानों का कहना है कि वे पहले ही खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च कर चुके होते हैं, ऐसे में फसल बर्बाद होने से कर्ज का बोझ और बढ़ जाता है.
भांग और गोबर का जादुई घोल
इसी बीच जिले के एक युवा किसान सिमरनजीत सिंह ने आवारा जानवरों और नीलगाय से बचाव का एक देसी और कम लागत वाला उपाय खोजा है. उनका दावा है कि इसके उपाय को अपनाने से खेतों के आसपास आवारा पशु नहीं आते और फसल सुरक्षित रहती है. सिमरनजीत सिंह ने बताया कि यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें किसी रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं होता. इस उपाय के लिए 10 किलो गोबर में करीब 20 लीटर पानी मिलाया जाता है. इसके बाद इसमें भांग का रस मिलाकर मिश्रण को अच्छी तरह तैयार किया जाता है. इस घोल को दो दिन तक ढककर रखा जाता है. दो-तीन दिन बाद इसमें तेज गंध आने लगती है. जब गंध पूरी तरह विकसित हो जाए, तब इस मिश्रण को खेतों के चारों ओर स्प्रे कर दिया जाता है.
कीटों पर भी कारगर है ये घोल
सिमरनजीत सिंह ने बताया कि इस घोल की तीखी गंध से नीलगाय और अन्य आवारा जानवर खेत के पास नहीं आते हैं जानवर इस गंध से दूर रहते हैं और फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते. इस देसी घोल का एक अतिरिक्त लाभ यह है कि इससे गेहूं की फसल में लगने वाले कई प्रकार के कीटों से भी छुटकारा मिलता है. गोबर आधारित होने के कारण यह घोल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करता है. इस उपाय को अपनाने के बाद रासायनिक उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं पड़ी. इससे खेती की लागत भी कम हुई और उत्पादन में भी वृद्धि होगी.
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मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें