‘आपके होटल और रिजॉर्ट हाथियों के रास्ते में आ रहे…’ नीलगिरी जंगलों में कंस्ट्रक्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने नीलगिरी के होटल और रिजॉर्ट मालिकों की याचिका पर सुनवाई टालते हुए कहा कि हाथियों के गलियारे में निर्माण हटाना जरूरी है, अगली सुनवाई जनवरी में होगी. मद्रास हाईकोर्ट ने 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी की सिफारिश को मंजूरी दी थी, जिसमें कहा गया था कि सिगुर पठार के हाथियों के गलियारों में निजी लोगों द्वारा खरीदी गई जमीन अवैध है और इन निर्माणों को हटाना चाहिए.

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आपके होटल रिजॉर्ट हाथियों के रास्ते में आ रहे, जंगलों में कंस्ट्रक्शन पर SCसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम पीड़ित जानवरों के साथ खड़े हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतें हमेशा जानवरों के पक्ष में रहेंगी क्योंकि जब इंसान और व्यावसायिक गतिविधियां उनके रास्ते रोक देती हैं, तो जानवर चुपचाप तकलीफ सहते हैं. चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली की बेंच ने नीलगिरी के होटल और रिजॉर्ट मालिकों की याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी और कहा कि इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा जरूरी है.

बेंच ने कहा, ‘आप सब यहां व्यापार के लिए हैं और आपके निर्माण हाथियों के रास्ते में आ रहे हैं. ये निर्माण हाथियों की आवाजाही में रुकावट डालते हैं… फायदा उन जानवरों को मिलना चाहिए, जो इन व्यावसायिक गतिविधियों का नुकसान झेलते हैं.’ नीलगिरी के सिगुर पठार में तमिलनाडु सरकार की तरफ से हाथियों के गलियारों की अधिसूचना जारी होने के बाद, जंगल में बने होटल और रिजॉर्ट मालिकों को ये जगह खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे उनमें नाराजगी है.

मद्रास हाईकोर्ट ने 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी की सिफारिश को मंजूरी दी थी, जिसमें कहा गया था कि सिगुर पठार के हाथियों के गलियारों में निजी लोगों द्वारा खरीदी गई जमीन अवैध है और इन निर्माणों को हटाना चाहिए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि सिगुर में हाथियों के गलियारे के अंदर 39 रिजॉर्ट और 390 मकान समेत 800 से ज्यादा निर्माण हैं.

अलग-अलग पक्षों की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील सलमान खुर्शीद और शोएब आलम ने कहा कि इन होटल और रिजॉर्ट मालिकों ने हाथियों के गलियारे की अधिसूचना जारी होने से पहले ही संपत्तियां खरीद ली थीं और उन्हें अपने ‘पर्यावरण-अनुकूल’ कारोबार को इस शर्त पर जारी रखने की इजाजत दी जानी चाहिए कि वे अपना व्यापार नहीं बढ़ाएंगे. आलम ने बताया कि कुछ मामले जनवरी में सुनवाई के लिए आ रहे हैं और यह ठीक रहेगा कि कोर्ट उन सबकी एक साथ सुनवाई करे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते के लिए तय कर दी है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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