ब्रह्मोस से ज्‍यादा घातक, अग्नि-5 मिसाइल से स्‍मार्ट, पहले टारगेट लॉक, फिर करेगी कंफर्म, उसके बाद मचाएगी तांडव – DRDO Developing Next Generation Cruise Missile Loitering Munition Capability brahmos agni5 icbm indian air force

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Next-Generation Cruise Missile: भारत अपने भंडार में लगातार ऐसे हथियार एड कर रहा है, जिसमें कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल किया गया है. 5th और 6th जेनरेशन तकनीक डेवलप करने के साथ ही मिसाइल टेक्‍नोलॉजी को लेकर भी भारत बेहद गंभीर है. फिलहाल भारत के पास ब्रह्मोस और अग्नि-5 जैसी खतरनाक मिसाइल्‍स हैं, पर इसको और ताकतवर बनाया जा रहा है. DRDO ऐसी मिसाइल को डेवलप करने में जुटा है, जिससे इंडियन एयरफोर्स की मारक क्षमता कई गुना तक बढ़ जाएगी.

ब्रह्मोस से ज्‍यादा घातक, अग्नि-5 मिसाइल से स्‍मार्ट, एयरफोर्स का नया बाहुबलीNext-Generation Cruise Missile: DRDO ऐसी मिसाइल डेवलप कर रहा है, जो पहले टारगेट को फिक्‍स करेगी और फिर कंफर्म करने के बाद ही अटैक करेगी. (फाइल फोटो/PTI)

Next-Generation Cruise Missile: 21वीं सदी में युद्ध का स्‍वरूप बदल गया है. पहले और दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद से डिफेंस सेक्‍टर ने लंबी यात्रा तय की है. एक समय था जब आर्मी यानी थल सेना की भूमिका काफी अहम हुआ करती थी. अब वक्‍त बदल चुका है. डिफेंस टेक्‍नोलॉजी ने स्‍टील्‍थ फाइटर जेट से लेकर ड्रोन तक का सफर तय किया है. अब तो 6th जेनरेशन जेट की बात होने लगी है. दुनिया के तमाम देश इसपर हजारों-लाखों करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. कुछ महीने पहले ही पांचवीं और छठवीं पीढ़ी की तकनीक पर काम करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट को लॉन्‍च किया गया. सरकार की तरफ से शुरुआती चरण में इसके लिए 15 हजार करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है. फाइटर जेट और ड्रोन के साथ ही भारत मिसाइल टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि भारत अब ऐसी मिसाइल डेवलप कर रहा है, जो टारगेट को लॉक करने के बाद कंफर्म करेगा कि इसपर ही अटैक करना है या किसी और पर. कंफर्म होने के बाद ही यह मिसाइल पलक झपकते ही दुश्‍मनों को तबाह कर देगी. इस मिसाइल को खासतौर पर इंडियन एयरफोर्स के लिए डिजाइन किया जा रहा है. इससे वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए नेक्‍स्‍ट जेनरेशन क्रूज मिसाइल पर काम कर रहा है. यह मिसाइल भारत की हवाई हमले की क्षमता में एक नया ऑपरेशनल कॉन्सेप्ट जोड़ने वाली मानी जा रही है. लगभग 250 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली इस मिसाइल को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इसमें पारंपरिक क्रूज मिसाइल की ताकत के साथ-साथ निगरानी और टारगेट का पता चलने तक हवा में मंडराने (Loitering Munition Capability) की क्षमता भी होगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद तय इलाके के ऊपर कुछ समय तक मंडरा सकेगी. इस दौरान यह रियल टाइम में निगरानी करेगी और अंतिम हमले से पहले लक्ष्य की पुख्ता पहचान की जा सकेगी. मौजूदा क्रूज मिसाइलों में लॉन्च के साथ ही लक्ष्य तय हो जाता है, लेकिन इस नई प्रणाली में लॉन्च करने वाले लड़ाकू विमान से हथियार प्रणाली अधिकारी लक्ष्य की पुष्टि के बाद ही हमले की अनुमति दे सकेगा. इससे गलत हमले और आम लोगों को होने वाले नुकसान का खतरा कम होने की उम्मीद है. ब्रह्मोस और अग्नि सीरीज की मिसाइल में फिलहाल यह खासियत नहीं है.

Next-Generation Cruise Missile: नई मिसाइल को खासकर इंडियन एयरफोर्स के लिए डिजाइन किया गया है. (फाइल फोटो/PTI)

ब्रह्मोस से ज्‍यादा घातक कैसे?

अब सवाल उठता है कि डीआरडीओ की ओर से डेवलप की जा रही नेक्‍स्‍ट जेनरेशन क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ज्‍यादा घातक कैसे है. बता दें कि नई मिसाइल टारगेट लॉक होने और इस बाबत कंफर्मेशन मिलने तक अटैक नहीं करेगी. टारगेट जब तक कंफर्म नहीं होगा, हमला नहीं किया जाएगा. इससे कोलेटरल डैमेज की स्थिति से बचा जा सकेगा. नई नेक्‍स्‍ट जेनरेशन मिसाइल में कम से कम 50 किलोग्राम का विस्फोटक वारहेड लगाया जा सकता है, जो अलग-अलग तरह के लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. इसका डिजाइन मॉड्यूलर होगा, यानी मिशन की जरूरत के अनुसार इसमें अलग-अलग पेलोड लगाए जा सकेंगे. इनमें इन्फ्रारेड लक्ष्य खोजने वाले सेंसर और उन्नत गाइडेंस सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं. इससे बिना बड़े बदलाव के एक ही मिसाइल को कई तरह के अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा.

एडवांस टेक्‍नोलॉजी का यूज

मिसाइल की दिशा और सटीकता के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस) और जीपीएस का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा इसमें मौजूद ऑनबोर्ड सिस्टम लंबी दूरी तक सही निशाने को सुनिश्चित करेंगे. लॉइटरिंग क्षमता के चलते मिसाइल लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर चक्कर लगाते हुए लाइव तस्वीरें और जानकारी लॉन्च करने वाले विमान तक भेज सकेगी. लक्ष्य तय होते ही इसे हमला करने का आदेश दिया जा सकेगा, जिससे ‘मैन-इन-द-लूप’ यानी मानव की सीधी निगरानी में हमला संभव होगा. इस मिसाइल की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे जमीन और समुद्र दोनों तरह के लक्ष्यों पर हमला करने के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे यह स्थिर या जगह बदलने वाले अहम ठिकानों के साथ-साथ समुद्र में मौजूद युद्धपोतों और लॉजिस्टिक जहाजों को भी निशाना बना सकेगी. हमले से पहले मंडराने की क्षमता के कारण यह उन लक्ष्यों पर भी प्रभावी होगी, जो थोड़े समय के लिए ही सामने आते हैं या छिपे रहते हैं.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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