जिसने सरदार पटेल की बनाई विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा, वही राम सुतार हुए पंचतत्व में विलीन
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Noida news : स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार और महान मूर्तिकार राम सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया. सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे उंची प्रतिमा को आकार देने वाले राम सुतार के जाने से भारतीय कला जगत ने अपना एक युगपुरुष खो दिया, लेकिन उनकी अमर कृतियां उन्हें सदैव जीवित रखेंगी.
स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार नहीं रहे, 100 वर्ष की आयु में नोएडा मेनोएडा : देश और दुनिया के कला जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माता और भारत के महान मूर्तिकार राम सुतार का निधन हो गया. उन्होंने 17 दिसंबर 2025 की मध्य रात्रि नोएडा स्थित अपने आवास पर 100 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली. उनके निधन से न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.
राम सुतार केवल एक मूर्तिकार नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत की कलात्मक पहचान के सबसे सशक्त स्तंभों में से एक थे. उनके द्वारा रची गई मूर्तियां भारतीय इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति हैं. उन्होंने अपने हाथों से ऐसे स्मारक गढ़े, जो आने वाली पीढ़ियों को भारत की विरासत, वीरता और एकता का संदेश देते रहेंगे.
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को डिजाइन से हुए थे फेमस
गुजरात के केवड़िया में स्थित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, जिसे उन्होंने डिजाइन किया, आज विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है. यह प्रतिमा केवल सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, इंजीनियरिंग कौशल और राष्ट्रीय गर्व का भी प्रतीक बन चुकी है. इस ऐतिहासिक कृति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई.
बना चुके हैं इन लोगों की प्रतिमा
अपने 100 वर्षों के जीवनकाल में राम सुतार ने देश और विदेश में भारतीय मूर्तिकला का मान बढ़ाया. उनके द्वारा निर्मित महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, छत्रपति शिवाजी महाराज सहित कई राष्ट्रीय नेताओं और महापुरुषों की प्रतिमाएं आज देश के विभिन्न शहरों और कई विदेशी देशों में स्थापित हैं. उनकी कला में यथार्थ, भावनात्मक गहराई और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
पद्मश्री और पद्मभूषण से किया गया था सम्मानित
राम सुतार को उनकी अतुलनीय सेवाओं और कला योगदान के लिए पद्मश्री और पद्मभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया था. उनका निधन भारतीय कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. मूर्तिकला के क्षेत्र में उन्होंने जो शून्य छोड़ा है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा, लेकिन उनकी कृतियां सदैव उन्हें अमर बनाए रखेंगी.
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मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें