सिवान की शान है चंदन की समोसे की गुमटी…10 रुपये में 2 पीस, शुद्धता-स्वाद का भरोसा, नाम के पीछे भी खास कहानी! – Bihar News

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सीवान. सीवान में अगर समोसे की बात हो और अलग स्वाद की चर्चा न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. आमतौर पर लहसुन और तीखे मसालों से भरपूर समोसे आपने कई जगह खाए होंगे, लेकिन सीवान के लक्ष्मीपुर ढाला के नजदीक एक ऐसी छोटी सी दुकान है, जहां बिना लहसुन और कम मसालों वाला समोसा लोगों की पहली पसंद बन चुका है. रेलवे ढाला ओवरब्रिज के नीचे स्थित हनुमान मिष्ठान भंडार की यह गुमटी हर दिन दोपहर 1 बजे से शाम 7 बजे तक ग्राहकों से गुलजार रहती है.

दोपहर से शाम तक लगता है मजमा
यह भीड़ किसी उद्घाटन या तमाशे के लिए नहीं, बल्कि चंदन कुमार सिंह के हाथों बने गरमागरम समोसे के लिए जुटती है. खास बात यह है कि यहां सबसे अधिक संख्या में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां नजर आते हैं. आसपास कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी होने की वजह से छात्र-छात्राओं का जमावड़ा स्वाभाविक है, लेकिन वे यहां सिर्फ सस्ती कीमत के कारण नहीं, बल्कि शुद्धता और स्वाद के भरोसे आते हैं.

10 रुपये में 2 पीस
इस दुकान पर मिलने वाला समोसा आम समोसे से अलग है. इसमें न तो लहसुन का इस्तेमाल होता है और न ही जरूरत से ज्यादा मसाले डाले जाते हैं. यही वजह है कि लोग इसे रोज भी खाते हैं, फिर भी पेट या सेहत से जुड़ी कोई शिकायत सामने नहीं आती. 10 रुपये में 2 पीस समोसा मिलने से यह हर वर्ग की पहुंच में है.

ग्राहकों का भरोसा
ग्राहक ऋचा सिंह बताती हैं कि वे लगभग रोज ही यहां आती हैं. उनके अनुसार, “यहां का समोसा हल्का होता है. लहसुन नहीं होने और मसाले कंट्रोल में रहने से रोज खाने पर भी कोई दिक्कत नहीं होती. स्वाद भी ऐसा है कि बार-बार आने का मन करता है.”

वहीं एक अन्य ग्राहक विशाल कुमार कहते हैं कि चंदन कभी क्वालिटी से समझौता नहीं करते. “यही वजह है कि यहां हमेशा लाइन लगी रहती है. कीमत कम है, लेकिन स्वाद और सफाई में कोई कमी नहीं,”.

भले मुनाफा कम हो पर ना हो क्वालिटी से समझौता
इस दुकान को चला रहे चंदन कुमार सिंह वर्ष 2008 से इस काम में लगे हैं. वे मानते हैं कि लोगों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है. चंदन कहते हैं, “मैं रोज यही कोशिश करता हूं कि किसी ग्राहक को शिकायत का मौका न मिले. चाहे मुनाफा कम हो, लेकिन क्वालिटी से समझौता नहीं होना चाहिए.”

दुकान की परंपरा के पीछे भी कहानी
दुकान के नाम और परंपरा के पीछे भी एक खास कहानी है. चंदन बताते हैं कि इस दुकान की शुरुआत पहले एक ब्राह्मण द्वारा की गई थी. दुकान के बगल में हनुमान मंदिर स्थित है, इसलिए शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हुए बिना लहसुन का समोसा बनाया जाता था. उनके देहांत के बाद उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दुकान का नाम हनुमान मिष्ठान भंडार रखा गया और आज भी उसी नियम के तहत समोसे बनाए जाते हैं.

शुद्धता को लेकर चंदन की सोच यहीं खत्म नहीं होती. वे बताते हैं कि जिस तेल में एक दिन समोसे छाने जाते हैं, अगर वह बच भी जाए तो अगले दिन दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसके अलावा, अच्छी क्वालिटी वाले तेल का ही इस्तेमाल किया जाता है. यही कारण है कि समोसे का स्वाद हल्का और सेहत के लिए सुरक्षित रहता है.

आज तक नहीं आयी शिकायत
दुकान के आसपास मौजूद कोचिंग और लाइब्रेरी के कारण सबसे अधिक ग्राहक स्टूडेंट्स ही हैं. चंदन गर्व से कहते हैं, “स्टूडेंट्स रोज समोसा खाते हैं और तारीफ करके जाते हैं. आज तक किसी ने यह नहीं कहा कि तबीयत खराब हुई हो. यही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है.” सीवान में जहां फास्ट फूड अक्सर सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है, वहीं हनुमान मिष्ठान भंडार का यह समोसा एक मिसाल बन चुका है.

कम कीमत, शुद्ध सामग्री और वर्षों से चली आ रही परंपरा ने इस छोटी सी गुमटी को इलाके की पहचान बना दिया है. यही वजह है कि बिना लहसुन और कम मसालों वाला यह समोसा आज सीवान के स्वाद प्रेमियों की जुबान पर चढ़ चुका है. हर कोई इसके स्वाद और शुद्धता का फैन है.

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