Siddaramaiah vs DK Shivakumar | Karnataka Congress Politics | Karnataka Congress power struggle | डीके शिवकुमार का कट गया पत्ता? CM सिद्दारमैया संग ब्रेकफास्ट, डिनर की घड़ी आते-आते गायब हो गए डिप्टी सीएम – karnataka cm Siddaramaiah Dinner Meet With Karnataka Ministers mlas deputy chief inister DK Shivakumar absent congress politics
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Siddaramaiah vs DK Shivakumar: कांग्रेस आलाकमान की तमाम कोशिशों के बावजूद कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जारी सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. सीएम सिद्दारमैया के एक कदम ने गुटबाजी की आग को और हवा दे दी है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी इसपर अपना रिएक्शन दिया है.
Siddaramaiah vs DK Shivakumar: कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने चुनिंदा मंत्रियों और विधायकों के साथ डिनर किया है. दिलचस्प बात यह है कि इस रात्रिभोज में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार उपस्थित नहीं थे. (फाइल फोटो/PTI)रिपोर्ट: हरीश उपाध्याय
Siddaramaiah vs DK Shivakumar: कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की भूख के चलते शुरू हुई सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप और ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स के बाद भी लगता है सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जारी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है. इसको लेकर कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार 19 दिसंबर 2025 को बेलगावी में लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली के आवास पर वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों के साथ डिनर बैठक की. यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर पहले से ही खींचतान की चर्चा चल रही है. इसी वजह से इस मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में नए सिरे से अटकलें शुरू हो गई हैं.
यह डिनर बैठक उस दिन हुई, जब कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा को संबोधित करना था. विधानसभा का यह सत्र अपने अंतिम चरण में है. ऐसे में इस मुलाकात को केवल सामाजिक कार्यक्रम मानने के बजाय राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. भाजपा पहले से ही सिद्धारमैया को ‘आउटगोइंग मुख्यमंत्री’ यानी हटने वाले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करती रही है. भाजपा के इस बयानबाजी से कांग्रेस के भीतर चल रही नेतृत्व बहस को और हवा मिली है. इसी पृष्ठभूमि में सिद्धारमैया की यह बैठक और ज्यादा अहम मानी जा रही है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस डिनर में कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. इनमें गृह मंत्री जी. परमेश्वर, समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा, आवास मंत्री जमीर अहमद खान, स्वास्थ्य मंत्री एमसी सुधाकर और कांग्रेस विधायक एएस पोन्नन्ना शामिल थे. ये सभी नेता मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी माने जाते हैं और पार्टी के भीतर उनके मजबूत समर्थन समूह का हिस्सा हैं.
डीके शिवकुमार का क्या रिएक्शन?
डिनर मीटिंग को लेकर जब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसकी अहमियत को कम करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. शिवकुमार ने कहा, ‘उन्हें मिलने दीजिए, मुझे खुशी है. क्या हम यह कह सकते हैं कि वे साथ खाना भी न खाएं? इसमें गलत क्या है?’ उनके इस बयान से साफ है कि वे फिलहाल इस बैठक को बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहते. वहीं, मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार और विधायक एएस पोन्नन्ना ने भी इस बैठक को सामान्य बताया. उन्होंने मीडिया से कहा कि वहां सात-आठ नेता थे और माहौल पूरी तरह अनौपचारिक था. पोन्नन्ना के मुताबिक, मुख्यमंत्री की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने सिर्फ सूप लिया और जल्दी लौट गए. उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में कोई खास राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, केवल मौजूदा सत्र के बाद पार्टी को मजबूत करने पर सामान्य बातचीत हुई.
फिर होने लगी चर्चा
हालांकि, इन दावों के बावजूद राजनीतिक हलकों में चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है. माना जा रहा है कि सिद्धारमैया विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उत्तर कर्नाटक के लिए एक बड़े पैकेज की घोषणा कर सकते हैं. इसके साथ ही वे अपनी सरकार के पिछले ढाई साल के कामकाज और उपलब्धियों को भी सामने रखेंगे. इस डिनर बैठक से एक दिन पहले भी सतीश जारकीहोली ने बेलगावी के एक होटल में 30 से ज्यादा समान विचारधारा वाले कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई थी. उस बैठक में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया खुद मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके बेटे और एमएलसी यतींद्र सिद्दारमैया और करीबी विधायक केएन राजन्ना वहां शामिल हुए थे.
ब्रेकफास्ट के बाद डिनर पॉलिटिक्स के क्या मायने?
इन लगातार बैठकों को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के बीच पड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है. 20 नवंबर को सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया है. चर्चा है कि 2023 में सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर कोई समझ बनी थी, जिसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. इससे पहले डीके शिवकुमार भी बेलगावी के बाहरी इलाके में 30 से ज्यादा विधायकों के साथ डिनर बैठक कर चुके हैं. पार्टी के कई नेता इन बैठकों को शीतकालीन सत्र के दौरान होने वाली सामान्य मुलाकात बता रहे हैं, लेकिन कुछ नेताओं का मानना है कि इनमें अहम राजनीतिक संदेश छिपे हैं. अटकलों के बीच पार्टी हाईकमान के निर्देश पर सिद्धारमैया और शिवकुमार ने एक-दूसरे के घर नाश्ते पर भी मुलाकात की थी. इसे नेतृत्व विवाद को फिलहाल थामने और सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री बने रहने का संकेत माना गया.