Supreme Court Stray Dogs Case- मिस्टर सिब्बल, पहले वीडियो दिखाएंगे फिर बात करेंगे! आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान जज ने क्यों कहा ऐसा?

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को आवारा कुत्तों को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प और सख्त टिप्पणी देखने को मिली. दिल्ली नगर निगम (MCD) के नए नियमों को ‘अमानवीय’ बताकर तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली. जज ने साफ कहा कि अभी दखल की जरूरत नहीं है और अगली तारीख पर ही हर पहलू पर बात होगी.

कोर्ट की इस टिप्पणी ने न सिर्फ याचिकाकर्ताओं को चौंकाया, बल्कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर चल रही बहस को भी नया मोड़ दे दिया. ‘पहले वीडियो दिखाएंगे, फिर बताएंगे इंसानियत क्या है’ यह वाक्य सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिए यह मांग की गई थी कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेकर तुरंत निगरानी की जाए. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर 2025 के आदेश के बाद MCD ने ऐसे नियम बना दिए हैं, जो जानवरों के साथ क्रूरता के दायरे में आते हैं.

सुनवाई में क्या बोले कपिल सिब्बल?

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को बताया कि पहले जो तीन जजों की स्पेशल बेंच इस मामले को सुनने वाली थी, वह गुरुवार को बैठ ही नहीं पाई. उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को तुरंत सूचीबद्ध किया जाए. क्योंकि MCD नए नियमों को लागू करने की तैयारी में है.

कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से क्यों किया इनकार

जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले की सुनवाई 7 जनवरी 2026 को होगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा. जब सिब्बल ने नियमों को बहुत अमानवीय बताया, तो कोर्ट ने कहा ‘ठीक है, उन्हें करने दीजिए, हम देखेंगे.’

इंसानियत पर जज की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने एक सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई में ‘इंसानियत’ को परिभाषित किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘अगली तारीख पर हम आपके लिए एक वीडियो चलाएंगे और फिर पूछेंगे कि इंसानियत क्या होती है.’ इस पर कपिल सिब्बल ने भी कहा कि याचिकाकर्ता भी जमीनी हालात दिखाने वाले वीडियो के साथ तैयार रहेंगे.

MCD के नियमों पर क्यों उठ रहे सवाल

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि MCD ने जो नियम बनाए हैं, वे एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स 2023 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के खिलाफ हैं. उनका आरोप है कि निगम के पास पर्याप्त शेल्टर नहीं हैं, फिर भी कुत्तों को बड़े पैमाने पर हटाया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट का 7 नवंबर वाला आदेश क्या कहता है

सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को आदेश दिया था कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस डिपो, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए. कोर्ट ने साफ कहा था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद भी कुत्तों को उसी जगह वापस न छोड़ा जाए, बल्कि तय शेल्टर में रखा जाए.

विवाद की जड़ कहां है?

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ीं और एक छह साल की बच्ची की मौत हो गई. इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. हालांकि पशु अधिकार संगठनों ने इसे क्रूर और कानून के खिलाफ बताया. इसके बाद केस को एक बेंच से हटाकर दूसरी बेंच को सौंपा गया.

अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को होगी. तब कोर्ट वीडियो फुटेज, जमीनी हालात और नियमों की वैधता पर विस्तार से विचार करेगा. तब तक MCD के कदमों और उनके असर पर नजर बनी रहेगी.

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