‘गांधी का नाम चुराने का पाप तो कांग्रेस ने किया’, संसद ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक’ को दी मंजूरी

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नई दिल्ली. संसद ने बृहस्पतिवार को विपक्ष के विरोध के बीच ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ को पारित कर दिया. ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है”. मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चौहान ने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को लागू करने और विकसित गांव की बुनियाद पर विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है.

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा हुई एवं मंत्री चौहान के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. सदन ने इस विधेयक पर विपक्ष के कई सदस्यों द्वारा लाये गये संशोधन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया. विधेयक को लोकसभा ने इसे दिन में मंजूरी दी थी. चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम बनने से लेकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं बनती रही हैं. उन्होंने कहा कि इनसे उद्देश्य पूरा नहीं होता या थोड़ा ही लक्ष्य पूरा होता है तो नयी योजनाएं लाई जाती हैं.

ग्रामीण विकास मंत्री उच्च सदन में जब चर्चा का जवाब दे रहे थे, उस दौरान विपक्ष के सदस्य आसन के समक्ष आकर लगातार नारेबाजी और हंगामा कर रहे थे. सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों को सत्ता पक्ष की दीर्घा की तरफ नहीं जाने के लिए कई बार आगाह किया. बाद में कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्य विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए. उन्होंने कहा कि मनरेगा के नाम में पहले महात्मा गांधी का नाम नहीं था और इसका नाम नरेगा था, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले वोटों के कारण कांग्रेस को बापू याद आ गए और उनका नाम जोड़ा गया.

चौहान ने आरोप लगाया, “कांग्रेस नीत सरकार ने मनरेगा को भी ताकत के साथ लागू नहीं किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे सही से क्रियान्वित किया.” उन्होंने संप्रग और राजग सरकार के समय इस योजना के क्रियान्वयन की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जहां 1660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए थे, वहीं मोदी सरकार में 3210 करोड़ श्रम दिवस का सृजन किया गया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार से पहले इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 48 प्रतिशत थी, जो इस सरकार के समय 56.73 प्रतिशत हो गई.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने तो गांधी का नाम चुराने का पाप किया है.” उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने सदन में कहा कि यह सरकार ‘सनक’ में नाम बदल रही है. चौहान ने कहा, “हम सनक में नाम नहीं बदल रहे, अपने परिवार के लोगों पर नाम रखने की सनक तो कांग्रेस की है.” चौहान ने दावा किया कि कांग्रेस की सरकारों के समय सैकड़ों योजनाओं, इमारतों, उत्सवों, संस्थानों आदि के नाम गांधी परिवार के सदस्यों- जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर रखे गए थे.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी का नाम लेकर ‘ढोंग’ कर रही है और उसने तो देश के बंटवारे के दिन, कश्मीर को विशेष दर्जा दिये जाने के साथ, इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाये जाने के दिन ही “बापू के आदर्शों की हत्या कर दी थी.” उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा, “इसने बापू के आदर्शों को मारने का काम किया, मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखने का काम किया.”

चौहान ने कहा कि मनरेगा में कई तरह की कमियां थीं और उस आधार पर यह सरकार नया विधेयक लाई. उन्होंने कहा कि मनरेगा में 60 प्रतिशत पैसा मजदूरी के लिए और 40 प्रतिशत निर्माण सामग्री के लिए होता था, लेकिन विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में मजदूरी का पूरा पैसा ले लिया जाता था, और सामग्री पर केवल 26 प्रतिशत तो कई राज्यों में केवल 19-20 प्रतिशत खर्च किया जाता था. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस योजना को पूरी तरह भ्रष्टाचार के हवाले कर दिया था. उन्होंने कहा, “विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन वाले दिल पर हाथ रखकर बताएं कि क्या इसमें भ्रष्टाचार नहीं हुआ, पैसा इनकी जेबों में नहीं गया, इनके नेताओं ने लूट नहीं की.”

चौहान ने कहा कि इस लूट को समाप्त करने और धनराशि का इस्तेमाल गरीबों के रोजगार के लिए ही होने के उद्देश्य को पूरा करने के वास्ते इसमें कमियों को दूर करना और पारदर्शिता लाना जरूरी था. उन्होंने कहा कि नया विधेयक लाने से पहले इस पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया. उन्होंने कहा कि नए कानून में अधिक रोजगार का प्रावधान होगा और धनराशि का इस्तेमाल पूरी तरह विकासित गांव बनाने में किया जाएगा जो मोदी सरकार का संकल्प है.

चौहान ने कहा कि इसके तहत सरकार ने ऐसे आदर्श गांव की कल्पना की है जहां रोजगार, शिक्षा, सुशासन, स्वच्छता हो, वहीं लोगों को पीने का शुद्ध जल नल से मिले, इलाज मिले, बच्चों को पोषण मिले, प्रकाश व्यवस्था हो और सड़कें पक्की हों. उन्होंने आदर्श और विकसित गांव बनाने के लिए अन्य कई गुण भी गिनाए. ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने तो इस योजना का बजट कम करने का पाप किया और इसे 40 हजार करोड़ रुपये से कम करके 35 हजार करोड़ रुपये कर दिया. मोदी सरकार ने इस योजना में 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये तक खर्च किए और इस साल बजट में 1,51,282 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है. यह पैसा मजदूरी के लिए, गांवों के विकास के लिए है.”

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत आपदा प्रबंधन के सारे काम होंगे. मंत्री ने कहा कि इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों, दिव्यांगों आदि के लिए विशेष प्रावधान होंगे तथा उन्हें रोजगार गारंटी कार्ड दिये जाएंगे. चौहान ने मोदी सरकार की पीएम आवास योजना, जलजीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना और अटल पेंशन योजना समेत सभी कार्यक्रम गिनाते हुए कहा कि “हमारे लिए बापू आज भी इन योजनाओं में जिंदा हैं. महात्मा गांधी केवल पोस्टरों और तस्वीरों में नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के हमारे कार्यों में जिंदा हैं.”

उन्होंने योजना में राज्य का अंशदान बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने पर विपक्ष के सदस्यों की आपत्तियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “हमने इसमें केंद्र और राज्यों का अनुपात 60:40 रखा है ताकि राज्यों की सहभागिता बढ़े और वे जिम्मेदारी समझें.” चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक नए भारत का निर्माण हो रहा है और गरीब कल्याण में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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