History of Tequila: मिट्टी की खुशबू और आग जैसा स्वाद, ऐसे बनती है दुनिया की ये मशहूर शराब

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History of Tequila: शराब का शौक रखने वालों के बीच ‘टकीला’ एक बहुत ही लोकप्रिय नाम है, लेकिन कम ही लोग इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. अपने तीखे स्वाद और दिलचस्प इतिहास के लिए मशहूर यह ड्रिंक मेक्सिको की संस्कृति का एक खास हिस्सा है. आज पूरी दुनिया में इसके करोड़ों चाहने वाले हैं. दिलचस्प बात यह है कि साल 1918 में जब ‘स्पेनिश फ्लू’ महामारी फैली थी, तब डॉक्टरों ने भी लोगों को टकीला पीने की सलाह दी थी. उस समय माना जाता था कि अगर टकीला को नमक और नींबू के साथ लिया जाए, तो यह फ्लू के लक्षणों को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकती है.

टकीला को नीले 'एगेव' (Agave) नाम के पौधे से तैयार किया जाता है. यह पौधा लिली परिवार का हिस्सा है और दिखने में बिल्कुल एक बड़े एलोवेरा जैसा लगता है, जिसके पत्तों के सिरों पर नुकीले कांटे होते हैं. टकीला बनाने का तरीका सदियों पुराना है और आज भी इसके उत्पादन की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है. इतिहास की बात करें तो सबसे पहले 'एज़्टेक' समुदाय के लोगों ने एगेव के रस को फर्मेंट (खमीर उठाकर) करके 'पुल्क' नाम की एक ड्रिंक बनाई थी. उस दौर में इसका इस्तेमाल खास तौर पर धार्मिक कार्यों और रीति-रिवाजों में किया जाता था. बाद में, जब स्पेनिश लोग मेक्सिको पहुंचे, तो उन्होंने इसी पुल्क में बदलाव करके अपना एक नया वर्जन तैयार किया, जिसे 'मेज़कल' नाम दिया गया.

टकीला को नीले ‘एगेव’ (Agave) नाम के पौधे से तैयार किया जाता है. यह पौधा लिली परिवार का हिस्सा है और दिखने में बिल्कुल एक बड़े एलोवेरा जैसा लगता है, जिसके पत्तों के सिरों पर नुकीले कांटे होते हैं. टकीला बनाने का तरीका सदियों पुराना है और आज भी इसके उत्पादन की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है. इतिहास की बात करें तो सबसे पहले ‘एज़्टेक’ समुदाय के लोगों ने एगेव के रस को फर्मेंट (खमीर उठाकर) करके ‘पुल्क’ नाम की एक ड्रिंक बनाई थी. उस दौर में इसका इस्तेमाल खास तौर पर धार्मिक कार्यों और रीति-रिवाजों में किया जाता था. बाद में, जब स्पेनिश लोग मेक्सिको पहुंचे, तो उन्होंने इसी पुल्क में बदलाव करके अपना एक नया वर्जन तैयार किया, जिसे ‘मेज़कल’ नाम दिया गया.

'मेज़कल' असल में एगेव पौधे से बनी किसी भी शराब को कहा जा सकता है. तकनीकी रूप से देखें तो टकीला भी एक तरह का मेज़कल ही है, लेकिन हर मेज़कल टकीला नहीं होता. इन दोनों को बनाने के लिए मेक्सिको में सख्त कानून और नियम तय हैं. मेज़कल बनाने के लिए मेक्सिको के नौ राज्यों में उगने वाली एगेव की कई किस्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि टकीला के नियम कुछ अलग हैं.

‘मेज़कल’ असल में एगेव पौधे से बनी किसी भी शराब को कहा जा सकता है. तकनीकी रूप से देखें तो टकीला भी एक तरह का मेज़कल ही है, लेकिन हर मेज़कल टकीला नहीं होता. इन दोनों को बनाने के लिए मेक्सिको में सख्त कानून और नियम तय हैं. मेज़कल बनाने के लिए मेक्सिको के नौ राज्यों में उगने वाली एगेव की कई किस्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि टकीला के नियम कुछ अलग हैं.

'मेज़कल' असल में एगेव पौधे से बनी किसी भी शराब को कहा जा सकता है. तकनीकी रूप से देखें तो टकीला भी एक तरह का मेज़कल ही है, लेकिन हर मेज़कल टकीला नहीं होता. इन दोनों को बनाने के लिए मेक्सिको में सख्त कानून और नियम तय हैं. मेज़कल बनाने के लिए मेक्सिको के नौ राज्यों में उगने वाली एगेव की कई किस्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि टकीला के नियम कुछ अलग हैं.

‘मेज़कल’ असल में एगेव पौधे से बनी किसी भी शराब को कहा जा सकता है. तकनीकी रूप से देखें तो टकीला भी एक तरह का मेज़कल ही है, लेकिन हर मेज़कल टकीला नहीं होता. इन दोनों को बनाने के लिए मेक्सिको में सख्त कानून और नियम तय हैं. मेज़कल बनाने के लिए मेक्सिको के नौ राज्यों में उगने वाली एगेव की कई किस्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि टकीला के नियम कुछ अलग हैं.

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मेज़कल को भी एगेव के रस से ही तैयार किया जाता था, लेकिन इसे 'डिस्टिल' (अर्क निकालने की प्रक्रिया) करके बनाया जाता था. मेक्सिको में रहने वाले स्पेनिश लोगों के बीच यह ड्रिंक बहुत जल्द मशहूर हो गई. जहां तक टकीला की बात है, तो इसका उत्पादन सबसे पहले 16वीं शताब्दी में जलिस्को राज्य के 'टकीला' नाम के कस्बे में शुरू हुआ था. टकीला बनाने की पहली फैक्ट्री (डिस्टिलरी) अल्टामिरा के मार्क्विस ने स्थापित की थीॉ. शुरुआत से ही टकीला को एगेव की एक खास किस्म से बनाया जाता था, जिसे 'ब्लू वेबर एगेव' या 'एगेव अज़ुल' कहा जाता है. खास बात यह है कि आज भी टकीला बनाने के लिए इसी खास किस्म के एगेव का इस्तेमाल किया जाता है.

मेज़कल को भी एगेव के रस से ही तैयार किया जाता था, लेकिन इसे ‘डिस्टिल’ (अर्क निकालने की प्रक्रिया) करके बनाया जाता था. मेक्सिको में रहने वाले स्पेनिश लोगों के बीच यह ड्रिंक बहुत जल्द मशहूर हो गई. जहां तक टकीला की बात है, तो इसका उत्पादन सबसे पहले 16वीं शताब्दी में जलिस्को राज्य के ‘टकीला’ नाम के कस्बे में शुरू हुआ था. टकीला बनाने की पहली फैक्ट्री (डिस्टिलरी) अल्टामिरा के मार्क्विस ने स्थापित की थीॉ. शुरुआत से ही टकीला को एगेव की एक खास किस्म से बनाया जाता था, जिसे ‘ब्लू वेबर एगेव’ या ‘एगेव अज़ुल’ कहा जाता है. खास बात यह है कि आज भी टकीला बनाने के लिए इसी खास किस्म के एगेव का इस्तेमाल किया जाता है.

टकीला बनाने के लिए खास तौर पर 'ब्लू वेबर एगेव' का इस्तेमाल होता है, जो मेक्सिको के जलिस्को राज्य के ऊंचे इलाकों में उगता है. यहां की जलवायु और लाल ज्वालामुखी मिट्टी, जिसमें भरपूर मात्रा में सिलिकेट होता है, इस पौधे की खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. टकीला की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पैदावार के लिए हर साल 30 करोड़ से भी ज्यादा पौधों की कटाई की जाती है. नीले एगेव के पौधे को पूरी तरह पकने में करीब 8 से 10 साल का लंबा समय लगता है. जमीन के अंदर इस पौधे का मुख्य हिस्सा एक बड़े बल्ब के रूप में विकसित होता है, जिसे 'पिना' कहते हैं. यह दिखने में बिल्कुल एक विशाल सफेद अनानास जैसा लगता है. कटाई के समय इसकी नुकीली पत्तियों को हटा दिया जाता है और फिर इस 'पिना' को फैक्ट्री (डिस्टिलरी) ले जाया जाता है, जहां इसे पकाकर फर्मेंटेशन के लिए तैयार किया जाता है.

टकीला बनाने के लिए खास तौर पर ‘ब्लू वेबर एगेव’ का इस्तेमाल होता है, जो मेक्सिको के जलिस्को राज्य के ऊंचे इलाकों में उगता है. यहां की जलवायु और लाल ज्वालामुखी मिट्टी, जिसमें भरपूर मात्रा में सिलिकेट होता है, इस पौधे की खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. टकीला की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पैदावार के लिए हर साल 30 करोड़ से भी ज्यादा पौधों की कटाई की जाती है. नीले एगेव के पौधे को पूरी तरह पकने में करीब 8 से 10 साल का लंबा समय लगता है. जमीन के अंदर इस पौधे का मुख्य हिस्सा एक बड़े बल्ब के रूप में विकसित होता है, जिसे ‘पिना’ कहते हैं. यह दिखने में बिल्कुल एक विशाल सफेद अनानास जैसा लगता है. कटाई के समय इसकी नुकीली पत्तियों को हटा दिया जाता है और फिर इस ‘पिना’ को फैक्ट्री (डिस्टिलरी) ले जाया जाता है, जहां इसे पकाकर फर्मेंटेशन के लिए तैयार किया जाता है.

टकीला मेक्सिको में तैयार की जाने वाली एक खास डिस्टिल्ड ड्रिंक है, जिसमें आमतौर पर 40% से 60% तक अल्कोहल होता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 'पिना' (एगेव का मुख्य हिस्सा) को ओवन में भूना जाता है या फिर उसे पीसकर गूदा तैयार किया जाता है. इसके बाद, इस गूदे में पानी और खमीर (य़ीस्ट) मिलाकर बड़े बर्तनों में करीब दो से तीन हफ्तों तक फर्मेंटेशन के लिए छोड़ दिया जाता है. जब फर्मेंटेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब इस मिश्रण को दो या तीन बार 'डिस्टिल' (साफ और शुद्ध) किया जाता है, जिससे टकीला का अंतिम स्वरूप तैयार होता है. टकीला का सबसे ज्यादा उत्पादन मेक्सिको के जलिस्को, तामाउलिपास, गुआनाजुआटो और नायारित जैसे राज्यों में होता है. हालांकि, अब टेक्सास और कैलिफोर्निया में भी कुछ छोटे स्तर के उत्पादक इसे बनाने लगे हैं.

टकीला मेक्सिको में तैयार की जाने वाली एक खास डिस्टिल्ड ड्रिंक है, जिसमें आमतौर पर 40% से 60% तक अल्कोहल होता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले ‘पिना’ (एगेव का मुख्य हिस्सा) को ओवन में भूना जाता है या फिर उसे पीसकर गूदा तैयार किया जाता है. इसके बाद, इस गूदे में पानी और खमीर (य़ीस्ट) मिलाकर बड़े बर्तनों में करीब दो से तीन हफ्तों तक फर्मेंटेशन के लिए छोड़ दिया जाता है. जब फर्मेंटेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब इस मिश्रण को दो या तीन बार ‘डिस्टिल’ (साफ और शुद्ध) किया जाता है, जिससे टकीला का अंतिम स्वरूप तैयार होता है. टकीला का सबसे ज्यादा उत्पादन मेक्सिको के जलिस्को, तामाउलिपास, गुआनाजुआटो और नायारित जैसे राज्यों में होता है. हालांकि, अब टेक्सास और कैलिफोर्निया में भी कुछ छोटे स्तर के उत्पादक इसे बनाने लगे हैं.

टकीला को तैयार करने का तरीका अन्य शराबों के मुकाबले थोड़ा अलग और खास होता है. सबसे पहले नीले एगेव के 'पिना' को 'ऑटोक्लेव' (एक तरह का बड़ा प्रेशर कुकर) में भाप की मदद से पकाया जाता है. इससे पौधे में मौजूद कार्बोहाइड्रेट शुगर में बदल जाते हैं. पकने के बाद इन पिना को कुचलकर पानी के साथ मिलाया जाता है और एक गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है. इस मिश्रण को फर्मेंटेशन के लिए बड़े टैंकों में रखा जाता है और इसमें खमीर डाला जाता है. कुछ दिनों तक फर्मेंट होने के बाद जो तरल पदार्थ निकलता है, उसे 'मोस्टो' कहते हैं. इसके बाद शुरू होती है इसे शुद्ध करने (डिस्टिल) की प्रक्रिया, जो दो चरणों में होती है. पहले चरण में 'ऑर्डिनेरियो' नाम की कच्ची शराब मिलती है, जिसमें लगभग 20% अल्कोहल होता है. फिर इसे दोबारा डिस्टिल किया जाता है, जिससे अंत में लगभग 40% अल्कोहल वाली असली टकीला तैयार होती है.

टकीला को तैयार करने का तरीका अन्य शराबों के मुकाबले थोड़ा अलग और खास होता है. सबसे पहले नीले एगेव के ‘पिना’ को ‘ऑटोक्लेव’ (एक तरह का बड़ा प्रेशर कुकर) में भाप की मदद से पकाया जाता है. इससे पौधे में मौजूद कार्बोहाइड्रेट शुगर में बदल जाते हैं. पकने के बाद इन पिना को कुचलकर पानी के साथ मिलाया जाता है और एक गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है. इस मिश्रण को फर्मेंटेशन के लिए बड़े टैंकों में रखा जाता है और इसमें खमीर डाला जाता है. कुछ दिनों तक फर्मेंट होने के बाद जो तरल पदार्थ निकलता है, उसे ‘मोस्टो’ कहते हैं. इसके बाद शुरू होती है इसे शुद्ध करने (डिस्टिल) की प्रक्रिया, जो दो चरणों में होती है. पहले चरण में ‘ऑर्डिनेरियो’ नाम की कच्ची शराब मिलती है, जिसमें लगभग 20% अल्कोहल होता है. फिर इसे दोबारा डिस्टिल किया जाता है, जिससे अंत में लगभग 40% अल्कोहल वाली असली टकीला तैयार होती है.

आम तौर पर टकीला का स्वाद थोड़ा मिट्टी जैसा (Earthy) होता है और इसमें अल्कोहल की अपनी एक तीखी महक होती है. एगेव का पौधा कहां उगाया गया है और उसे बनाने का तरीका क्या है, इस आधार पर हर टकीला का स्वाद थोड़ा अलग हो सकता है. जैसे 'ब्लैंको टकीला' (Blanco Tequila) का स्वाद सबसे शुद्ध माना जाता है. इसमें मिट्टी जैसी सोंधी खुशबू, हल्का मीठापन और एगेव का असली स्वाद मिलता है. इलाके के हिसाब से भी स्वाद बदल जाता है-निचले इलाकों में बनने वाली टकीला में फलों और मिट्टी जैसा अहसास होता है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों की टकीला ज्यादा 'फ्रेश' और खुशबूदार होती है. इसके अलावा, जब टकीला को लकड़ी के बैरल (पीपों) में रखा जाता है, तो उसमें ओक की लकड़ी का एक खास स्वाद और सुगंध भी शामिल हो जाती है.

आम तौर पर टकीला का स्वाद थोड़ा मिट्टी जैसा (Earthy) होता है और इसमें अल्कोहल की अपनी एक तीखी महक होती है. एगेव का पौधा कहां उगाया गया है और उसे बनाने का तरीका क्या है, इस आधार पर हर टकीला का स्वाद थोड़ा अलग हो सकता है. जैसे ‘ब्लैंको टकीला’ (Blanco Tequila) का स्वाद सबसे शुद्ध माना जाता है. इसमें मिट्टी जैसी सोंधी खुशबू, हल्का मीठापन और एगेव का असली स्वाद मिलता है. इलाके के हिसाब से भी स्वाद बदल जाता है-निचले इलाकों में बनने वाली टकीला में फलों और मिट्टी जैसा अहसास होता है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों की टकीला ज्यादा ‘फ्रेश’ और खुशबूदार होती है. इसके अलावा, जब टकीला को लकड़ी के बैरल (पीपों) में रखा जाता है, तो उसमें ओक की लकड़ी का एक खास स्वाद और सुगंध भी शामिल हो जाती है. 

'मार्गरीटा' दुनिया की सबसे मशहूर कॉकटेल ड्रिंक्स में से एक है, जिसकी शुरुआत मेक्सिको से हुई थी. इसे टकीला, ताजे नींबू के रस और संतरे के लिकर (Orange Liqueur) को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसे परोसने का खास तरीका यह है कि जिस गिलास में इसे डाला जाता है, उसके किनारों पर नमक लगा होता है. माना जाता है कि मार्गरीटा का आविष्कार 1930 के दशक में हुआ था, ठीक उसी समय जब अमेरिका में टकीला काफी लोकप्रिय हो रही थी. पिछले कुछ वर्षों में मार्गरीटा की दीवानगी पूरी दुनिया में इस कदर बढ़ी है कि अब यह हर बड़े बार और पार्टी की शान बन गई है. समय के साथ इसके स्वाद और बनाने के तरीकों में भी कई नए बदलाव आए हैं, जिससे इसके कई अलग-अलग वर्जन अब आसानी से मिल जाते हैं.

‘मार्गरीटा’ दुनिया की सबसे मशहूर कॉकटेल ड्रिंक्स में से एक है, जिसकी शुरुआत मेक्सिको से हुई थी. इसे टकीला, ताजे नींबू के रस और संतरे के लिकर (Orange Liqueur) को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसे परोसने का खास तरीका यह है कि जिस गिलास में इसे डाला जाता है, उसके किनारों पर नमक लगा होता है. माना जाता है कि मार्गरीटा का आविष्कार 1930 के दशक में हुआ था, ठीक उसी समय जब अमेरिका में टकीला काफी लोकप्रिय हो रही थी. पिछले कुछ वर्षों में मार्गरीटा की दीवानगी पूरी दुनिया में इस कदर बढ़ी है कि अब यह हर बड़े बार और पार्टी की शान बन गई है. समय के साथ इसके स्वाद और बनाने के तरीकों में भी कई नए बदलाव आए हैं, जिससे इसके कई अलग-अलग वर्जन अब आसानी से मिल जाते हैं.

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