DBT में बड़ा झोल, CAG ने खोली पोल, हजारों करोड़ रुपये का है मामला, बताया इसका जिम्‍मेदार कौन? – Comptroller and Auditor General of India cag Sanjay Murthy flagged serious gaps direct benefit transfer DBT system

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Agency:एजेंसियां

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CAG News: कैग का काम वित्‍तीय लेखाजोखा तैयार कर उसे देश के सामने पेश करना है, ताकि फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी आ सके. कैग की ओर से अक्‍सर ही विभिन्‍न सरकारी योजनाओं को लेकर रिपोर्ट पेश की जाती है, जिसमें आवंटित राशि और खर्च किए गए पैसों का हिसाब-किताब होता है.

DBT में बड़ा झोल, CAG ने खोली पोल, बताया इसका जिम्‍मेदार कौन?CAG संजय मूर्ति ने DBT की खामियों पर बात की है. (फाइल फोटो/PTI)

CAG News: कंप्‍ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया यानी CAG ने डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्‍टम की मौजूदा व्‍यवस्‍था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. CAG संजय मूर्ति ने कहा कि अनिवार्य चेक एंड बैलेंस यानी छानबीन के बिना ही लाभार्थियों के खाते में हजारों करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं. CAG ने इसके लिए वीक डेटा इंटीग्रेशन और विभिन्‍न विभागों के बीच समन्‍वय के आभाव को जिम्‍मेदार बताया है. बता दें कि अनेकों सरकारी स्‍कीम्‍स के तहत लाखों-करोड़ों लोगों के बैंक अकाउंट्स में DBT के माध्‍यम से पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं. CAG ने अब इसी DBT की खामियों पर चिंता जताई है.

भारत में डीबीटी प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हुए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) संजय मूर्ति ने कहा है कि जरूरी जांच और सत्यापन के बिना ही हजारों करोड़ रुपये लाभार्थियों के खातों में पहुंच रहे हैं. कमजोर डेटा इंटीग्रेशन और सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी को बड़ी वजह बताया है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार 17 दिसंबर 2025 को नागपुर स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज में ट्रेनी आईआरएस अधिकारियों के पहले बैच को संबोधित करते हुए सीएजी ने कहा कि लाभार्थियों की दोहराव रोकने और आंकड़ों के क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए पर्याप्त जांच व्यवस्था नहीं है. उन्होंने बताया कि कई विभाग इतने अलग-थलग तरीके से काम कर रहे हैं कि एक ही विभाग में अलग-अलग संयुक्त सचिव भी एक ही डेटाबेस का उपयोग नहीं करते.

क‍िस बात पर जताई चिंता?

CAG संजय मूर्ति ने कहा कि हम जनधन, आधार और मोबाइल से जुड़े डेटाबेस की बात करते हैं, लेकिन जब इन डेटाबेस के इस्तेमाल और परिपक्वता के स्तर को देखते हैं, खासकर ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर, तो वहां बड़ा अंतर नजर आता है. उन्होंने कहा कि भले ही योजनाओं को आधार आधारित बताया जाता हो, लेकिन डीबीटी मिशन के तहत जरूरी डि-डुप्लीकेशन और डेटाबेस सत्यापन अक्सर नहीं किया जाता. इसके बावजूद वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) योजनाओं में हजारों करोड़ रुपये सिस्टम में जा रहे हैं. सीएजी ने यह भी कहा कि भारत एक विशाल देश है और हर जगह एक ही पैमाना लागू नहीं किया जा सकता. उन्होंने बताया कि दक्षिणी राज्यों ने तकनीक के इस्तेमाल में पहले ही बढ़त बना ली है, जिसके कारण वहां ऑडिट के लिए ज्यादा परिपक्व और सटीक डेटा उपलब्ध है. उन्होंने सुझाव दिया कि यह जांचना जरूरी है कि किसी सरकारी योजना को लागू करते समय बुनियादी जांच और संतुलन का पालन हो रहा है या नहीं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि लापरवाही जरूरी नहीं कि जानबूझकर हो, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में सटीकता होना जरूरी है.

45 दिनों में ऑडिट पूरा

ट्रेनी आईआरएस अधिकारियों से बात करते हुए संजय मूर्ति ने कहा कि सीएजी विभाग के अधिकारी अपने अनुभव टैक्‍स ऑफिसर्स के साथ साझा करेंगे, ताकि आगे गहन जांच हो सके. उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नेटवर्क या राज्यों की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली जैसे डेटाबेस जानकारी का बड़ा स्रोत हो सकते हैं. सामाजिक क्षेत्र के ऑडिट पर बात करते हुए सीएजी ने कहा कि तकनीक के उपयोग से ऑडिट का समय काफी कम हुआ है. अब महज 45 दिनों में ऑडिट पूरा किया जा सकता है और एक साथ सात योजनाओं का ऑडिट संभव हो गया है. उन्होंने कहा कि एक बाहरी संस्था के रूप में सीएजी अलग-अलग योजनाओं के डेटाबेस तक पहुंच कर आपसी तालमेल और तुलना कर सकता है. सीएजी के इस बयान से साफ है कि डीबीटी जैसी अहम व्यवस्था को और मजबूत करने, डेटा साझा करने और सख्त जांच तंत्र लागू करने की जरूरत है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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