न बेसन की जरूरत, न चाहिए दही, उत्तराखंड की पहाड़ी कढ़ी सबसे अलग, जानें इसकी रेसिपी – Uttarakhand News

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Uttarakhand ki Kadhi Recipe : उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजनों में सादगी, पोषण और प्रकृति का सीधा संबंध झलकता है. इन्हीं में से एक अनूठा व्यंजन है नींबू की कढ़ी. यह कढ़ी न तो बेसन से गाढ़ी की जाती है और न ही इसमें दही का उपयोग होता है, बल्कि इसका मुख्य आधार होता है पहाड़ी नींबू का खट्टा और सुगंधित गूदा (पल्प) और चावल का आटा है. ये नींबू पोषक तत्वों का भंडार है क्योंकि इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो पहाड़ों के ठंडे मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है. आइये इस कढ़ी को बनाने की रेसिपी जानते हैं.

Lemon kadhi

उत्तराखंड में आपने नींबू की खटाई के बारे में सुना होगा लेकिन आप इसकी कढ़ी भी बना सकते हैं, जो मैदान की पारंपरिक कढ़ी से अलग होती है. दूसरी जगह पर कढ़ी को दही या छाछ (मट्ठे) और बेसन के मिश्रण से बनाया जाता है, जबकि पहाड़ी नींबू की कढ़ी पूरी तरह से अलग है. यह एक ‘खट्टा सूप’ या ‘झोल’ की तरह होती है, जिसे हल्के मसालों के साथ पकाया जाता है और नींबू के रस से इसका स्वाद बेजोड़ हो जाता है.

Lemon kadhi

पहाड़ी नींबू कढ़ी का अहम इंग्रेडिएंट कोई साधारण कागजी नींबू नहीं, बल्कि पहाड़ी नींबू होता है. यह नींबू आकार में बड़ा, छिलका मोटा और स्वाद में अत्यधिक खट्टा व विशिष्ट सुगंध वाला होता है. अनोखे स्वाद और सुगंध के चलते लोग इसे खाना पसंद करते हैं. पहाड़ी नींबू का रस अपनी तेज खटास के साथ एक अनोखी, तीखी सुगंध देता है जो इस कढ़ी को एक खास ‘पहाड़ी’ स्वाद देता है. <span style=”color: currentcolor;”>नींबू की कढ़ी बनाने की प्रक्रिया मैदानी कढ़ी की तरह उबालने और फटने के डर से मुक्त होती है. पानी को उबाला जाता है और उसे गाढ़ा करने के लिए बहुत कम मात्रा में चावल का आटा (या स्थानीय रूप से उगाए गए मंडुआ/गेहूं का आटा) घोलकर मिलाया जाता है. यह आटा कढ़ी को हल्की सी बनावट देता है.</span>

lemon kadhi

इसके तड़के में आमतौर पर मेथी दाना, जीरा और हींग का प्रयोग किया जाता है. यह मिक्सचर न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि मेथी के औषधीय गुणों के कारण पाचन में भी मददगार करता है. अदरक और हरी मिर्च तीखापन लाते हैं. सबसे ज्यादा जरूरी स्टेप आता है जब उबली हुई और गाढ़ी हुई कढ़ी को आंच से उतार लिया जाता है. इसके थोड़ा ठंडा होने पर, इसमें नींबू का पल्प और रस मिलाया जाता है. आंच से उतारकर नींबू का रस मिलाना इस व्यंजन की सबसे बड़ी कुंजी है. अगर नींबू को उबाला जाए, तो वह कड़वा हो जाता है और उसके विटामिन सी खत्म हो जाते हैं. इस प्रोसेस से, कढ़ी का प्राकृतिक, ताज़ा और तीखापन बरकरार रहता है.

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lemon kadhi

नींबू की कढ़ी को अक्सर भात (उबले हुए चावल) या मंडुआ (रागी) की रोटी के साथ परोसा जाता है. पहाड़ों में इसे अक्सर दोपहर के भोजन में खाया जाता है. कढ़ी का हल्का खट्टा और तीखा स्वाद सादे चावल या पोषक तत्वों से भरपूर मंडुआ की रोटी के साथ एक बेहतरीन संतुलन बनाता है, जिससे यह एक संपूर्ण और पौष्टिक पहाड़ी भोजन बन जाता है.

Lemon kadhi

उत्तराखंड की नींबू की कढ़ी एक व्यंजन से कहीं ज्यादा है. यह पहाड़ी संस्कृति को दर्शाता है, जहां प्रकृति से प्राप्त सादी सामग्री को बुद्धिमानी से उपयोग किया जाता है ताकि स्वास्थ्य और स्वाद दोनों का तालमेल बना रहे.

Lemon kadhi

यह उन व्यंजनों में से एक है जो हमें सिखाता है कि लज़ीज़ और पौष्टिक भोजन बनाने के लिए हमेशा जटिल या महंगे घटकों की जरूरत नहीं होती, बस सही तकनीक और प्रकृति के उपहारों का सम्मान ज़रूरी है.

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न बेसन की जरूरत, न चाहिए दही, उत्तराखंड की पहाड़ी कढ़ी सबसे अलग, जानें रेसिपी

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