सहारनपुर के इस गौशाल के गोबर गैस को सिलेंडर भरने की तैयारी, लोगों को मिलेगी राहत, पूरी तरह आत्मनिर्भर है ये गौशाला
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पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉक्टर संदीप मिश्रा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि नगर निगम कि इस गौशाला में हमने बायोगैस संयंत्र हमने लगाया हुआ है. इस बायोगैस प्लांट से अभी हमारे द्वारा बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. जिससे गौशाला की चारा काटने वाली मशीन, सबमर्सिबल पंप लाइट इत्यादि जलाई जाती है. इसके अतिरिक्त अब हम लोग वैश्विक संकट को देखते हुए इस बायोगैस से खाना भी बना रहे हैं जो कि हमारे लिए एक बहुत ही अच्छी उपलब्धि है.
सहारनपुरः आत्मनिर्भर गौशाला जो लगातार समय-समय पर नित नए प्रयास करती रहती है. जहां पूरा देश अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से गैस के संकट से परेशान है. उसी को देखते हुए इस गौशाला के द्वारा गोबर गैस से जहां एक ओर बिजली बनाई जा रही है वहीं दूसरी ओर खाना पकाने का काम भी किया जा रहा है. यह गौशाला गोबर और गोमूत्र के उत्पादकों से विश्वभर में अपनी पहचान बन चुकी है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस गौशाला का भ्रमण कर यहां पर बनने वाले उत्पादकों की तारीफ कर चुके हैं. लेकिन इस बार का एक नया एक्सपेरिमेंट आम लोगों को बेहद राहत देने वाला है.
गैस सिलेंडर में भरी जाएगी गोबर गैस
गौशाला में लगे हुए इस गोबर गैस प्लांट के माध्यम से बनने वाली गोबर गैस को खाली गैस सिलेंडर में भरकर आम लोगों के घरों तक पहुंचा जा सके और उनको इस वैश्विक संकट में राहत देने का काम किया जाएगा. इसके बाद एक बार फिर से यह गौशाला आपने इस नवाचार करने के कारण एक बार फिर से अलग तरीके से पहचान बनाने के लिए जानी जाएगी, सभी कार्य पूरा हो चुका है और बस ट्रायल होना बाकी है. इतना ही नहीं इस गौशाला में आवारा सड़कों पर घूमने वाले गोवंश रहते हैं जिनके गोबर से इस गैस को बनाने के साथ विभिन्न तरह की मूर्तियां, धूपबत्ती, होली के समय गुलाल और वर्मी कंपोस्ट जैसा खाद भी तैयार किया जाता है.
गौशाला की बिजली से होते हैं सारे काम
पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉक्टर संदीप मिश्रा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि नगर निगम कि इस गौशाला में हमने बायोगैस संयंत्र हमने लगाया हुआ है. इस बायोगैस प्लांट से अभी हमारे द्वारा बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. जिससे गौशाला की चारा काटने वाली मशीन, सबमर्सिबल पंप लाइट इत्यादि जलाई जाती है. इसके अतिरिक्त अब हम लोग वैश्विक संकट को देखते हुए इस बायोगैस से खाना भी बना रहे हैं जो कि हमारे लिए एक बहुत ही अच्छी उपलब्धि है.
अभी तो इस गोबर गैस का इस्तेमाल बिजली बनाने और खाना पकाने में किया जा रहा है लेकिन हमारा एक्सपेरिमेंट जारी है, जिसमें हम इस गैस को सिलेंडर में भरकर आम लोगों के घरों तक भी इस सुविधा को पहुंचाने का प्रयास जारी है. मैं अगर इस आईडिया की बात करू तो कहा जाता है कि आपदा में ही अवसर की तलाश होती है. इस वैश्विक संकट को देखते हुए हमने क्योंकि हम पहले से ही इस गोबर गैस से बिजली बना रहे थे तो हमारे लिए उतनी मुश्किल नहीं थी और अब यह बायोगैस बनेगी तो तो हम इसको आम लोगों के घरों तक कैसे पहुंचाएं यह हमारे लिए एक चैलेंज है.
575 से अधिक हैं गोवंश
इस गौशाला में लगभग 575 से अधिक आवारा गोवंश हैं और उनके गोबर और गोमूत्र से लगभग 25 प्रकार के प्रोडक्ट भी यहां पर बनाए जाते हैं. जिसमें गोबर से पेंट, गोमूत्र से फिनाइल और इस तरह के उत्पादक बनाने के लिए हमारी भारत की पहली जीएमपी सर्टिफाइड गौशाला है साथ ही विश्व की ऐसी गौशाला है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित है इसके अतिरिक्त हम आईएसओ प्रमाणित और IBR अचीवर अवार्ड से भी सम्मानित है. और जितने भी हम समय-समय पर गोबर और गोमूत्र से नवाचार करते हैं उसके लिए हमें सम्मान मिला है. वही अगर इस गोबर गैस से खाना बनाने की बात करें तो जब से वैश्विक संकट आया है तभी से ही बायोगैस से खाना बनाया जा रहा है. गौशाला के सभी लोगों के लिए खाना बन जाता है और दूध से घी निकालना, दूध से लस्सी बनाना उसमें भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. इस गैस का प्रेशर बढ़ने और सिलेंडर में भरने के लिए कंप्रेसर यूनिट मंगाई जा रही है. इसके बाद आम जनमानस को भी इसका लाभ मिलेगा वह भी सस्ते दाम पर.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें