ईरान जंग से भारत ने ली बड़ी सीख, चीनी 5th जेन जेट को कड़ा जवाब, जद में आएगा पाकिस्तान!
Last Updated:
Lessons From Iran War: ईरान और अमेरिका के साथ जंग से पूरी दुनिया को सबक मिला है. इससे भारत भी अछूता नहीं है. इस जंग में ईरान की रणनीति ने दुनिया के तमाम एक्सपर्ट्स को अचंभित कर दिया है. ऐसे में भारत की सेना भी अपनी तैयारी में जुट गई है. भारतीय सेना अगले पांच साल में हजारों स्वदेशी ड्रोन और लॉइटरिंग म्युनिशन खरीदेगी, जिससे कि चीन और पाकिस्तान की ओर से भविष्य में अगर कोई गुस्ताखी की जाती है तो उसका सटीक जवाब दिया जाएगा.

ईरान जंग ने दुनिया को कई तरह के सबक सिखाई है. इससे सीख लेते हुए भारत ने भी तैयारी शुरू कर दी है.
Lessons From Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच सीज फायर की घोषणा हो गई है. मगर 40 दिनों तक चली इस जंग ने दुनिया को कई सबक सिखाए हैं. दुनिया के सामरिक मामलों के तमाम एक्सपर्ट इस जंग में ईरान की रणनीति देख अचंभित हैं. अपेक्षाकृत एक छोटा मुल्क ईरान ने अमेरिका जैसे सुपर पावर को जिस तरह से मात दी है उसको देखकर तो यही लगता है कि केवल सैन्य ताकत के दम पर कोई जंग नहीं जीती जाती. अमेरिका के पास बेशुमार सैन्य ताकत है लेकिन ईरान ने अपने छोटे-छोटे बेहद सस्ते हथियारों यानी ड्रोन से जिस तरह उसे चकमा दिया उससे भारत ने भी बड़ी सीख ली है.
इसी सीख के तहत अगले पांच वर्षों में भारत की सेना दसियों हजार स्वदेशी अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS) और लॉइटरिंग मुनिशन्स को शामिल करने की योजना बना रही है. यह कदम आधुनिक युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदलने वाली ड्रोन तकनीक को समझते हुए उठाया गया है, जहां सस्ते और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले ड्रोन दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस और फाइटर जेट्स को चुनौती दे रहे हैं. सेना ने इंडियन आर्मीज टेक्नोलॉजी रोडमैप फॉर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स एंड लॉइटरिंग मुनिशन्स जारी किया. यह लगभग 50 पृष्ठों का दस्तावेज उद्योग, एकेडमिशिनय और अनुसंधान संस्थानों को भारतीय सेना की लंबी अवधि की जरूरतों की स्पष्ट तस्वीर देता है. लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट एंड सस्टेनेंस) ने इस रोडमैप का अनावरण किया.
ईरान जंग से मिली बड़ी सीख
भारत ने इन सबको को गंभीरता से लिया है. सेना के आंतरिक अध्ययनों में ईरान समेत यूक्रेन और अन्य संघर्षों के सबक को शामिल किया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि पांच तरह की व्यापक भूमिकाओं का पहचान की गई और उनके लिए 30 प्रकार के UAS और लॉइटरिंग मुनिशन्स की जरूरत बताई गई. ये सिस्टम इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रेकॉनिसेंस (ISR), प्रिसीजन स्ट्राइक्स, एयर डिफेंस, जैमिंग, माइन वारफेयर, डेटा रिले और लॉजिस्टिक्स जैसे रोल्स में इस्तेमाल होंगे.
चीनी 5th जेन जेट को कड़ा जवाब
ये ड्रोन्स सस्ते, झूंड में इस्तेमाल होने वाले और एआई से लैस होंगे, जो स्टेल्थ जेट्स की एडवांस्ड सेंसर्स और मिसाइलों को भी छका सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये ड्रोन्स 5th जेन फाइटर जेट्स के खिलाफ काउंटर-एयर रोल में प्रभावी साबित होंगे. यह योजना डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 और प्रस्तावित ड्रोन फोर्स के साथ जुड़ी हुई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कहा चुके हैं कि भारत को 2030 तक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनना होगा, ताकि रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे.
About the Author
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें