गर्मी में ठंडी, सर्दी में गर्म! छतरपुर की ‘रामभाजी’ के अनोखे फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

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गर्मी में ठंडी, सर्दी में गर्म! छतरपुर की ‘रामभाजी’ के अनोखे रामबाण फायदे

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Ram bhaji benefits : छतरपुर जिले में गर्मी मौसम में एक ऐसी भाजी की डिमांड बढ़ जाती है, जिसे घर-घर खाया जाता है. इस भाजी को क्षेत्रीय भाषा में गंगुआ या रामभाजी भी कहा जाता है. ये भाजी मौसम के अनुसार अपना तासीर बदल लेती है. अगर आप इस भाजी को गर्मी में खाते हैं तो ठंड की तासीर की होती है और सर्दियों में खाते में तो गर्म तासीर की होती है. यही इस भाजी की खासियत होती है.

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Rambhaji Benifits : छतरपुर जिले में गर्मी मौसम में एक ऐसी भाजी की डिमांड बढ़ जाती है जिसे घर-घर खाया जाता है. इस भाजी को क्षेत्रीय भाषा में गंगुआ या रामभाजी भी कहा जाता है. ये भाजी मौसम के अनुसार अपना तासीर बदल लेती है. फिलहाल बाजारों में ये भाजी आना शुरू हो गई है.

हॉट बाजार में सब्जी बेच रहीं कुंता बाई लोकल 18 से बातचीत में बताती हैं कि छतरपुर जिले में गर्मी के मौसम में भी इस भाजी की डिमांड घर-घर बढ़ जाती है. क्योंकि यह भाजी अपनी खासियत के लिए जानी जाती हैं. दरअसल, जिले में रामभाजी की डिमांड सर्दी और गर्मी मौसम में बढ़ जाती है.बनी रहती है. क्योंकि इस भाजी की खासियत होती है कि यह गर्मी में ठंड तासीर की होती तो और ठंड में गर्म तासीर की होती है इसलिए इसे रामभाजी या राजभाजी भी कहा जाता है. इसे क्षेत्रीय भाषा में अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. इसे गंगुआ भाजी या रामभाजी भी कहा जाता है.

कुंता बाई बताती हैं कि यह भाजी बाजार में कम ही देखने को मिलती है. हालांकि, सस्ती रहती है. अभी 20 रुपए किलो बेच रहे हैं. आज 1 बोरा भाजी लाई हूं, 1 से 2 घंटे में ही पूरी बिक जाती है. ये भाजी घरों में भी आसानी से लग जाती है.

कुंता बाई बताती हैं कि इस भाजी को बीज से बोया जाता है. लगभग 2 सप्ताह बाद ही यह भाजी तोड़ने लायक हो जाती है. इस भाजी को एक बार बो दिया जाता है, फिर यह अपने आप ही उगती रहती है. इस भाजी का एक पौधा 3 महीने तक भाजी देता है.

ऐसे बनाते हैं भाजी
कुंता बताती हैं कि इस पौधे की पत्तियों को तोड़कर भाजी बनाई जाती है. इस भाजी को पालक भाजी की तरह बनाया जाता है. जैसे आलू और पालक की सूखी सब्जी बनाई जाती है, वैसे ही इस भाजी को भी आलू और लहसुन-प्याज के साथ सूखी बनाई जाती है. गर्म सीजन हो या ठंड सीजन हो, दोनों सीजन में लोग इस भाजी को ढूंढ-ढूंढ कर लाते हैं और घर पर बनाते हैं. क्योंकि सर्दी और गर्मी के मौसम में यह भाजी हर किसी के लिए फायदेमंद मानी जाती है.

गर्मी-सर्दी दोनों मौसम में डिमांड
वहीं गृहिणी सुनीता बताती हैं कि ये भाजी सभी भाजियों से खास होती है. इसलिए हम इसे रामभाजी कहते हैं. गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में ये खाई जाती है. ये भाजी मौसम के अनुसार अपनी तासीर बदल लेती है. अभी गर्मी का सीजन शुरू है तो मार्केट में आना शुरू हो जाती है. सुनीता बताती हैं कि कार्तिक उपवास रखने वाली महिलाएं तो सिर्फ यही भाजी पूरे 1 महीने के उपवास में खाती हैं. हरी मिर्च, लाल नमक और जीरा से छौंक लगाकर इसे बना लेती हैं और गक्कड़ के साथ 1 महीने तक खाती हैं.

वात समस्या में मिलता आराम
सुनीता बताती हैं कि इसे ज्यादातर वो लोग भी बहुत खाते हैं जिन्हें वात की समस्या रहती है. अगर आप ठंड में खाते हैं तो गर्म तासीर होने के चलते खून का संचार बढ़ाती है. शरीर में खून का संचार बढ़ने से वात की समस्या में आराम मिलता है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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