खाड़ी युद्ध के बीच गहरा सकता है यूरिया का संकट! खेतों में पहले ही लगा दें इमली की पत्तियों वाला ये पौधा
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Dhaincha cultivation benefits : खाड़ी में ईरान-अमेरिका के बीच की लड़ाई की वजह से घरेलू गैस की कथित किल्लत ने लोगों को परेशान कर रखा है. अगर ये लड़ाई ऐसे ही चलती रही तो आने वाले समय में किसानों को यूरिया की किल्लत का सामना भी करना पड़ सकता है. बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि किसान भाई गेहूं काटने के बाद ढैंचा उगा सकते हैं. इसकी खेती मई-जून में की जाती है. ढैंचा यूरिया का सबसे अच्छा विकल्प है.
बहराइच. खाड़ी में ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है. कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह लड़ाई ऐसे ही चलती रही तो आने वाले समय में यूरिया की किल्लत का सामना किसानों को करना पड़ सकता है. ऐसे में किसान भाई पहले से ही तैयारी कर लें. बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि किसान भाई गेहूं कटाई के बाद ढैंचा उगा सकते हैं. इसकी खेती मई-जून में की जाती है. बीज किसानों को कृषि विभाग उपलब्ध कराता है.
धान के लिए रामबाण
40 से 45 दिन के बाद तैयार होने पर खेत में ही इस हरी खाद को जुतवा दिया जाता है. इसके बाद खेत में पानी भर इसे सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. 10 दिन में यह पूरी तरह सड़कर अगली फसल के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद किसान भाई धान की फसल लगा सकते हैं, जिससे धान में नाइट्रोजन आदि की कमी पूरी हो जाती है. यूरिया का खर्च बच जाता है.
कितना चाहिए बीज
डॉ. शैलेंद्र बताते हैं कि ढैंचे का पौधा हरा होता है. इसकी पत्तियां छोटी-छोटी इमली की पत्ती की तरह डार्क हरी होती हैं. इसकी खेती दो चीजों के लिए की जाती है. एक तो बीज उत्पादन के लिए, खेत में दूसरा खाद की कमी को पूरा करने के लिए. प्रति हेक्टेयर 8 से 10 किलो बीच की आवश्यकता पड़ती है. अगर हरी खाद के मकसद से लगाने पर प्रति हेक्टेयर 18 से 20 किलो बीज लगता है. बीज के लिए इसे तैयार होने का समय 100 से 120 दिन है. हरी खाद 40 से 45 दिन में तैयार हो जाती है. इस तरह ढैंचा की खेती खाद की कमी पूरा कर सकती है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें