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पेड़ पर लगा आम पड़ रहा है काला? समय रहते कर लें ये जरूरी काम, दाम मिलेगा अच्छा

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Mango Farming Tips: सहारनपुर की मैंगो बेल्ट का आम अपनी मिठास के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन अक्सर आम पर पड़ने वाले काले धब्बे और फफूंदी किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर देते हैं. काला पड़ने की वजह से न सिर्फ उत्पादन घटता है, बल्कि बाजार में इसके दाम भी कौड़ियों के भाव रह जाते हैं. कृषि एक्सपर्ट डॉक्टर आई.के. कुशवाहा के अनुसार, सही जानकारी और दवाओं की सटीक मात्रा के इस्तेमाल से किसान अपने आम को खराब होने से बचा सकते हैं. जानिए उन रसायनों और छिड़काव के सही तरीकों के बारे में, जिनसे आपके बाग का आम भी अच्छी कीमत पर बिकेगा.

Mango Fruit Care Tips: सहारनपुर जनपद, जिसे मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है और यहां के बागवान सैकड़ों किस्म के आम उगाते हैं. यहां का आम न केवल भारत बल्कि विदेशों तक अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध है. हालांकि, बागवानों के सामने सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब पेड़ों पर लगा आम काला होकर सूखने लगता है. काला पड़ने की वजह से जो फल बचता भी है, उसे मार्केट में अच्छे दाम नहीं मिल पाते. अगर किसान आम को इस बीमारी से बचा लें, तो वही आम बाजार में ₹100 किलो और विदेशों में ₹500 किलो से भी अधिक दाम पर बिक सकता है.

आम के काला पड़ने की असली वजह क्या है?
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और प्रोफेसर डॉक्टर आई.के. कुशवाहा ने बताया कि आम के काला पड़ने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण होते हैं. पहला कारण कीट है और दूसरा फफूंदी. इनमें फफूंदी यानी ‘एंथ्रानोज’ सबसे घातक मानी जाती है. इसका असर तब शुरू होता है जब आम में दाना बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. यह बीमारी पहले पत्तों पर आती है और फिर धीरे-धीरे फलों की ओर बढ़ती है. इसके कारण आम पर काले-काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जिससे फल की चमक और गुणवत्ता दोनों पूरी तरह खत्म हो जाती है.

छिड़काव के समय किसान करते हैं ये गलती
अक्सर बागवान अपनी फसल को बचाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उन्हें सही तरीका और मात्रा नहीं पता होती है. डॉक्टर कुशवाहा के अनुसार, कई बार किसान फफूंदी को खत्म करने के लिए जरूरत से कम डोज का उपयोग करते हैं, जिससे बीमारी कंट्रोल होने के बजाय और ज्यादा बढ़ जाती है. अगर किसान सही समय पर और बताई गई मात्रा में छिड़काव करें, तो फल को काला होने से निश्चित रूप से बचाया जा सकता है. सही समय पर किया गया उपचार ही आम की क्वालिटी को इंटरनेशनल मार्केट के लायक बनाता है.
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इन रसायनों का छिड़काव देगा शानदार रिजल्ट
आम की गुणवत्ता बढ़ाने और उसे धब्बों से बचाने के लिए बाजार में कई सुरक्षित फफूंदीनाशक मौजूद हैं. डॉक्टर आई.के. कुशवाहा ने कुछ असरदार रसायनों के नाम साझा किए हैं, जिनका इस्तेमाल किसान भाई कर सकते हैं. इनमें ‘प्रोपिकोनाजोल’ और ‘कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब’ का नाम प्रमुख है. ये रसायन आम के फल के लिए पूरी तरह सुरक्षित माने जाते हैं. अगर बागवान दाना बनते समय इनका सही मात्रा में छिड़काव करते हैं, तो आम सुरक्षित रहता है और उसकी चमक और मिठास दोनों बरकरार रहती है.

गुणवत्ता सुधरेगी तो बढ़ेंगे दाम
क्योंकि जब आम दिखने में साफ और सुंदर होता है, तो मार्केट में उसकी डिमांड अपने आप बढ़ जाती है. सहारनपुर के किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि सिर्फ दवा डालना काफी नहीं है, बल्कि सही दवा को सही समय पर डालना ही असली मुनाफे की कुंजी है. अगर फल काला होने से बच गया, तो किसान को अपनी फसल के दो से तीन गुना ज्यादा दाम आसानी से मिल सकते हैं. यही कारण है कि अच्छी गुणवत्ता वाला आम विदेशों में बहुत ऊंचे दामों पर बिकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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