पीलीभीत के जंगलों में हाथियों का आतंक होगा कम, किसान की फसलें नहीं होगी बर्बाद, कर्नाटक के विशेषज्ञों ने संभाली कमान
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भरत कुमार डीके ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पीलीभीत के जंगलों में हाथियों का कोई स्थायी बसेरा नहीं है. ये हाथी मुख्य रूप से नेपाल की सीमा पार कर यहां आते हैं और फिर वापस चले जाते हैं. प्रवास के दौरान ये हाथी अक्सर किसानों के खेतों में घुस जाते हैं, जिससे फसलों का भारी नुकसान होता है. पिछले साल एक दुखद घटना में एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी, जिसे प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. हाथियों को सुरक्षित तरीके से रिहायशी इलाकों से दूर रखने के लिए कर्नाटक से आए डॉ. रुद्रा के नेतृत्व में एक टीम पीलीभीत पहुँच चुकी है.
पीलीभीतः पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास बसे गांवों के लिए एक राहत भरी खबर है. पिछले कुछ समय से नेपाल से आने वाले हाथियों द्वारा फसलों और जान-माल के नुकसान की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने अब ठोस कदम उठाए हैं. प्रभागीय वनाधिकारी भरत कुमार डीके ने बताया कि हाथियों और इंसानों के बीच होने वाले इस टकराव को रोकने के लिए दक्षिण भारत के कर्नाटक से विशेषज्ञों की एक खास टीम बुलाई गई है.
किसानों के खेत में घुस रहे हाथी
भरत कुमार डीके ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पीलीभीत के जंगलों में हाथियों का कोई स्थायी बसेरा नहीं है. ये हाथी मुख्य रूप से नेपाल की सीमा पार कर यहां आते हैं और फिर वापस चले जाते हैं. प्रवास के दौरान ये हाथी अक्सर किसानों के खेतों में घुस जाते हैं, जिससे फसलों का भारी नुकसान होता है. पिछले साल एक दुखद घटना में एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी, जिसे प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है. हाथियों को सुरक्षित तरीके से रिहायशी इलाकों से दूर रखने के लिए कर्नाटक से आए डॉ. रुद्रा के नेतृत्व में एक टीम पीलीभीत पहुँच चुकी है. इस टीम के पास हाथियों के व्यवहार को समझने और उन्हें नियंत्रित करने का लंबा अनुभव है. खास बात यह है कि इस टीम ने हाथियों को भगाने का एक नया और वैज्ञानिक तरीका सुझाया है.
फील्ड पर सफल रहा परीक्षण
DFO ने बताया कि डॉ. रुद्रा द्वारा बताए गए इस नए तरीके का कल रात ही जंगल के किनारे वाले इलाकों में ट्रायल किया गया. यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा और ग्रामीणों ने भी इसमें काफी दिलचस्पी दिखाई. अब वन विभाग का स्टाफ गांव-गांव जाकर लोगों को ट्रेनिंग दे रहा है कि हाथियों के आने पर घबराने के बजाय किस तरह सुरक्षित रहा जाए और उन्हें बिना नुकसान पहुँचाए वापस जंगल की ओर कैसे भेजा जाए. वन विभाग की इस कोशिश से अब तराई के इलाकों में रहने वाले किसानों को उम्मीद जगी है कि अब उनके खेत और जान दोनों सुरक्षित रहेंगे. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य हाथियों और इंसानों के बीच तालमेल बिठाना है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनहोनी को टाला जा सके.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें