मोहम्मद रफी का वो अमर गाना, गीतकार को मिली चमचमाती कार, सुनते ही धड़कने लगते हैं जवां दिल

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Mohammed Rafi Timeless Song : फिल्म मेकिंग के दौरान कई बार डायरेक्टर-प्रोड्यूसर में क्रिएटिव डिफरेंस हो जाते हैं. कई बार गीतकार-संगीतकार किसी बात को लेकर सहमत नहीं होते. 58 साल पहले गीतकार-संगीतकार के बीच गाने को लेकर विवाद हो गया. बात इतनी बढ़ गई कि गीतकार ने अपना ही गाना फाड़ दिया. गाना प्रोड्यूसर को बहुत पसंद था. 24 घंटे के भीतर गीतकार ने फिर से गाना लिखा और शर्त में नई चमचमाती कार इनाम में जीत ली. मोहम्मद रफी ने अपनी मखमली आवाज में इस गाने को अमर कर दिया. यह गाना कौन सा था और वो फिल्म कौन सी थी, आइये दिलचस्प किस्से पर एक नजर डालते हैं…..

Mohammed Rafi ke Superhit Gane : संगीतकार-प्रोड्यूसर के बीच किसी गाने को लेकर रचनात्मक टकराव तो होता ही रहता है. 60 के दशक में संगीतकार शंकर-जयकिशन और गीतकार गोपालदास नीरज के बीच एक गाने को लेकर टकराव हो गया. गोपालदास इतने नाराज हुए कि उन्होंने गाना फाड़कर फेंक दिया. मजे की बात यह है कि गाना प्रोड्यूसर राजेंद्र भाटिया को बहुत पसंद था. ऐसे में उन्होंने गोपालदास नीरज से फिर से गाना लिखने का अनुरोध किया. मशहूर कवि गोपालदास ने 24 घंटे गाना अपनी एक शर्त पर लिखा. गाना जब रिलीज हुआ तो जवां दिलों को तड़पा गया. हम बात कर रहे हैं 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘कन्यादान’ की. और वो गाना था ‘लिखे जो खत तुझे, जो तेरी याद में’.

‘लिखे जो खत तुझे, जो तेरी याद में’ को मोहम्मद रफी ने अमर कर दिया. फिल्म का म्यूजिक शंकर जयकिशन ने तैयार किया था.<br />फिल्म का मोस्ट पॉप्युलर गाना गोपालदास नीरज ने लिखा था. बाकी गाने हसरत जयपुरी ने लिखे थे. फिल्म में कुल 7 गाने थे. फिल्म के दो गाने खूब पॉप्युलर हुए. एक गाना था : ‘लिखे जो खत तुझे, जो तेरी याद में’ और दूसरा गाना था : मेरी जिंदगी में आते तो कुछ और बात होती. दोनों ही गाने मोहम्मद रफी ने गाए थे.

‘लिखे जो खत तुझे, जो तेरी याद में’ गाना एक जबर्दस्त टकराव से जन्मा. दशकों से यह गाना प्यार का तराना बना हुआ है. गीतकार गोपालदास नीरज ने गाना लिखा लेकिन म्यूजिक डायरेक्टर शंकर-जयकिशन ने इसे खारिज कर दिया. नीरज अपने गाने के पक्ष में थे तो शंकर-जयकिशन भी अपनी बनाई धुन पर अड़े हुए थे. बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर नीरज ने उस पेज को फाड़ दिया, जिसमें गाना लिखा हुआ था. 

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अब जब गाना रहा ही नहीं तो फिर कैसे लिखा जाता? प्रोड्यूसर ने उन्हें फिर से गाना लिखने को कहा. नीरज ने शर्त रखी कि वो नया गाना लिखेंगे मगर बदले में जो मांगेंगे वो मिलेगा. 24 घंटे में गोपालदास नीरज ने दोबारा ऐसा गाना लिखा जिसने सबकुछ बदलकर रख दिया. जैसे ही यह गाना प्रोड्यूसर और शंकर-जाय ने सुना, बस सुनते ही रह गए. गाना सबको पसंद आया. रिकॉर्डिंग हुई तो शर्त के मुताबिक नीरज ने अपना इनाम मांगा. नीरज ने प्रोड्यूसर की नई कार की ओर इशारा किया. प्रोड्यूसर राजेंद्र भाटिया ने अपना वचन पूरा किया और वो कार दे दी.

इस तरह झगड़े से जन्मा यह गाना सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया. मोहम्मद रफी ने अपनी मखमली आवाज से इसमें चार चांद लगा दिए. यह फिल्म का सबसे हिट गाना बना.

कन्यादान मूवी एक सोशल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जिसका निर्देशन मोहन सहगल ने किया था. फिल्म को राजेंद्र भाटिया ने प्रोड्यूस किया था. स्टोरी-स्क्रीनप्ले आरए बकेरी ने लिखा था. डायलॉग सरशर सैलानी ने लिखे थे.

फिल्म में शशि कपूर, आशा पारेख, ओम प्रकाश, अचला सचदेव, दिलीप राज, सईद खान और पद्मा रानी जैसे सितारे थे. फिल्म का प्लॉट बाल विवाद के इर्द-गिर्द बुना गया था.

सबसे मजेदार तथ्य यह है कि यह फिल्म सबसे पहले शम्मी कपूर को ऑफर की गई थी लेकिन उन्होंने फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया था. फिर प्रोड्यूसर राजेंद्र भाटिया ने उनके भाई शशि कपूर के साथ यह फिल्म बनाई. यह फिल्म 1968 की एक ब्लॉकबस्टर मूवी साबित हुई थी.

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