क्रिकेट के वो 5 रेफरी, जिनके नाम दर्ज है सबसे ज्यादा टेस्ट मैचों का रिकॉर्ड, विश्वकीर्तिमान का टूटना असंभव
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Most matches as a match referee in Test: टेस्ट क्रिकेट की गरिमा को बनाए रखने में मैच रेफरी का योगदान अहम है. श्रीलंका के दिग्गज रंजन मदुगले के नाम सबसे ज्यादा टेस्ट मैचों रेफरी का विश्व कीर्तिमान दर्ज है. जो उनके तीन दशकों के बेमिसाल अनुभव को दर्शाता है. उनके बाद जेफ क्रो, क्रिस ब्रॉड, एंडी पाइक्रॉफ्ट और डेविड बून जैसे नामों ने भी खेल के नियमों और अनुशासन को बखूबी संभाला है. इन अनुभवी दिग्गजों ने मैदान के बाहर रहकर भी टेस्ट क्रिकेट की निष्पक्षता और मर्यादा को जीवित रखा है.

सबसे ज्यादा टेस्ट मैच में रेफरी की भूमिका निभाने वाले 5 रेफरी.
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर जब चौके-छक्के लगते हैं या जब कोई गेंदबाज अपनी रफ्तार से गिल्लियां बिखेरता है, तो सारा शोर खिलाड़ियों के लिए होता है. लेकिन इस खेल की मर्यादा और नियमों को बनाए रखने का जिम्मा उन कंधों पर होता है जो बाउंड्री के बाहर बैठकर भी खेल की हर हरकत पर पैनी नजर रखते हैं.जिन्हें हम मैच रेफरी कहते हैं. टेस्ट क्रिकेट के लंबे और गौरवशाली इतिहास में कुछ ऐसे नाम रहे हैं, जिन्होंने मैदान पर अंपायरों के फैसलों से लेकर खिलाड़ियों के व्यवहार तक, सब कुछ अपनी सूझबूझ से नियंत्रित किया. जब हम टेस्ट क्रिकेट में मैच रेफरी की बात करते हैं, तो सबसे पहला और सबसे बड़ा नाम श्रीलंका के रंजन मदुगले का आता है.
साल 1993 से शुरू हुआ रंजन मदुगले (Ranjan Madugale) सफर आज 2025 तक एक महागाथा बन चुका है. मदुगले ने रिकॉर्ड 231 टेस्ट मैचों में रेफरी की भूमिका निभाई है. यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि तीन दशकों का वह अनुभव है जिसमें क्रिकेट की कई पीढ़ियां बदल गईं. उन्होंने उस दौर में भी अनुशासन बनाए रखा जब क्रिकेट केवल खेल था और उस दौर में भी जब यह एक करोड़ों का व्यवसाय बन गया. मदुगले की सौम्यता और निष्पक्षता उन्हें इस लिस्ट में सबसे ऊपर और सबसे खास बनाती है.
सबसे ज्यादा टेस्ट मैच में रेफरी की भूमिका निभाने वाले 5 रेफरी.
न्यूजीलैंड के जेफ क्रो (Jeff Crow) इस सूची में दूसरे नंबर पर अपनी छाप छोड़ते हैं. साल 2004 से शुरू होकर 2026 के वर्तमान समय तक, उन्होंने 133 टेस्ट मैचों में न्याय की कमान संभाली है. जेफ क्रो ने उस दौर में मैच रेफरी की जिम्मेदारी संभाली जब खेल में तकनीक और डीआरएस (DRS) का दखल बढ़ रहा था. एक पूर्व खिलाड़ी होने के नाते, वे खिलाड़ियों के मनोविज्ञान को समझते थे और शायद यही कारण है कि उनकी उपस्थिति मैदान पर हमेशा एक शांत प्रभाव डालती रही.
अनुशासन की सख्त आवाज क्रिस ब्रॉड
इंग्लैंड के क्रिस ब्रॉड (Chris Broad) का नाम आते ही एक सख्त और अनुशासित व्यक्तित्व की छवि सामने आती है. 2003 से 2024 के अपने शानदार करियर में उन्होंने 123 टेस्ट मैचों में रेफरी की भूमिका निभाई. क्रिस ब्रॉड के कार्यकाल के दौरान क्रिकेट ने कई विवाद देखे, लेकिन उन्होंने हमेशा खेल की भावना को सर्वोपरि रखा. चाहे वह खिलाड़ियों पर जुर्माना लगाना हो या मैदान पर होने वाली गहमागहमी को शांत करना, ब्रॉड ने अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाया.
निरंतरता की मिसाल एंडी पाइक्रॉफ्ट और डेविड बून
जिम्बाब्वे के एंडी पाइक्रॉफ्ट (Andy Pycroft) और ऑस्ट्रेलिया के डेविड बून ने भी इस विशिष्ट क्लब में अपनी जगह पक्की की है. पाइक्रॉफ्ट ने साल 2009 से 2025 के बीच 107 टेस्ट मैचों में अपनी सेवाएं दीं. उनकी कार्यशैली हमेशा विवादों से परे और प्रभावी रही. वहीं, ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज रहे डेविड बून ने 2011 से 2025 के दौरान 87 टेस्ट मैचों में रेफरी की कुर्सी संभाली. बून, जो कभी अपनी बल्लेबाजी और मूंछों के लिए मशहूर थे, रेफरी के रूप में अपनी सटीक निर्णय क्षमता के लिए जाने गए.
खेल के अनसंग हीरो
मैच रेफरी का काम अक्सर पर्दे के पीछे का होता है. जब मैच शांति से खत्म हो जाता है, तो माना जाता है कि रेफरी ने अपना काम बखूबी किया. इन पांच दिग्गजों मदुगले, क्रो, ब्रॉड, पाइक्रॉफ्ट और बून ने मिलकर टेस्ट क्रिकेट के सैकड़ों घंटों को सुरक्षित और मर्यादित बनाया है. रंजन मदुगले के 231 मैचों का विशाल आंकड़ा शायद ही भविष्य में कोई छू पाए, लेकिन इन सभी ने मिलकर यह साबित किया है कि क्रिकेट केवल बल्ले और गेंद का खेल नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और सम्मान की एक साझा परंपरा है. जिसे ये रेफरी बखूबी निभाते आ रहे हैं. टेस्ट क्रिकेट की सफेद जर्सी की तरह ही, इन रेफरियों का योगदान भी बेदाग और अनमोल है.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें