सरकारी दफ्तरों में घुसी राजनीति, SIR अधिकारियों को धमकी पर भड़के CJI सूर्यकांत, हम सोचेंगे कि क्या कर सकते हैं
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सुप्रीम कोर्ट ने जजों को बंधक बनाने के मामले की जांच अब एनआईए को दे दी है. पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार 26 लोगों से एनआईए सीधा सवाल करेगी. भले ही ये सभी आरोपी अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में बंद हों. सुनवाई के दौरान चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी ने अपना हलफनामा दिया है. जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि 24 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. इस पूरे मामले में अब तक 309 सस्पेक्ट की पहचान हो चुकी है. करीब 432 लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच होगी.

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपनी पूर्ण एवं असीमित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले से संबंधित मामलों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को ट्रांसफर कर दिया. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नौकरशाही की विश्वसनीयता कम की जा रही है और सचिवालय एवं सरकारी कार्यालयों में राजनीति घुसाई जा रही है।
पीठ ने आदेश दिया कि राज्य पुलिस द्वारा मालदा घटना से जुड़े 26 गिरफ्तार व्यक्तियों से एनआईए द्वारा पूछताछ की जाए, भले ही वे न्यायिक हिरासत में क्यों न हों. शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुश्यंत नरियाला को फटकार लगाई कि उन्होंने एक अप्रैल को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कॉल उस वक्त नहीं उठाई, जब न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया था.
पीठ ने मुख्य सचिव से कहा कि उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कॉल न उठाने के लिए माफी मांगनी चाहिए और कहा कि यह जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि मालदा में एसआईआर कार्य में जुटे न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेर लिये जाने की घटना वास्तव में पूर्व-नियोजित और किसी विशेष उद्देश्य से प्रेरित थी.
इस पर मुख्य सचिव ने कोर्ट के सामने माफी मांगी. सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से हलफनामा भी दाखिल किया गया. जांच एजेंसी के द्वारा कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में अब तक 24 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब तक 309 संदिग्धों की पहचान हुई है. इसके साथ ही करीब 432 लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण की मांग की गई है. उसके बाद तफ्तीश का दायरा और आगे बढ़ाया जाएगा.
पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा
न्यायालय ने चुनावी राज्य में हुई हालिया घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह भी कहा कि केंद्रीय बल तैनात रहेंगे. सीजेआई ने कहा, “जिस तरह से अतीत में हालात रहे हैं, उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा.” उन्होंने कहा, “यदि सरकारी तंत्र विफल होता है, तो हम सोचेंगे कि क्या किया जा सकता है.” पीठ ने गौर किया कि मालदा जिले में भी, जहां न्यायिक अधिकारियों को कथित घेराव समेत कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा, लगभग आठ लाख मामलों का निस्तारण हो चुका है.
…तो जरूरी उपाय करेंगे
न्यायालय ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों को मिली कथित धमकियों और उनके कामकाज में बाधा डाले जाने पर चिंता व्यक्त की तथा चेतावनी दी कि यदि सरकारी तंत्र सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो वह उपयुक्त उपाय करेगा. पूर्व की घटनाओं को देखते हुए, पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इस समय पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा. सुनवाई के दौरान, पीठ ने अधिकरणों के प्रभावी और निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. न्यायमूर्ति बागची ने इस बात पर जोर दिया कि निर्वाचन आयोग की भूमिका चुनावी भागीदारी को सीमित करने के बजाय उसे बढ़ाने की है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें