कुपोषण से टूटा बचपन, पिता का छूटा साया, पं. धीरेंद्र शास्त्री का आशीर्वाद बना हौसला, छोटू चायवाले की दर्दभरी कहानी
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Ballia News: कुछ लोगों की कहानी ऐसी होती है, जो मन को काफी उत्साहित करती है. कुछ ऐसी ही कहानी बलिया निवासी छोटू की है, जिनका बचपन काफी संघर्ष भरा रहा है. छोटू आज चाय बेचते हैं और उनकी दुकान पर पुलिस से लेकर अधिकारी तक आते हैं.
बलिया: एक ऐसे चाय वाले की कहानी, जो गिरते-पड़ते बचपन से उठकर आज पूरे परिवार का बड़ा सहारा बना है. यह एक ऐसी कहानी, जो हर दिल को छू लेने के साथ प्रेरणा भी देती है. यह कहानी छोटू चाय वाले की है, जिनका बचपन संघर्ष, दर्द और कुपोषण की मार से भरा रहा है. छोटू के अनुसार, बचपन में उनकी हालत ऐसी थी कि वो ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता था. शरीर का विकास रुक गया था और परिस्थिति भी बिल्कुल विपरीत थी.
बलिया जनपद के गड़वार निवासी छोटू ने कहा कि वह बचपन में जब जमीन के सहारे चलता था, तो बार-बार गिर जाना और हाथ-पैर टूट जाना, आम हो गया था. यह उनके बचपन की कड़वी सच्चाई थी. कुपोषण का असर उनके शरीर पर आज भी साफ दिखाई देता है. छोटू जब महज पांच साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. पिता के जाने के बाद परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. घर में केवल एक लाचार मां बची थीं, जिनके सहारे जीवन किसी तरह आगे बढ़ता रहा. पहले पिता मजदूरी करके घर चलाते थे, लेकिन उनके जाने के बाद हालात और भी मुश्किल हो गए.
चुनौतियों का कर रहे सामना
उन्हें अपने पिता की बहुत याद आती है, लेकिन दुख की बात यह है कि उन्हें उनका चेहरा तक याद नहीं है, क्योंकि पिता के निधन के समय छोटू बहुत छोटे थे. आज वही छोटू जिंदगी से हार मानने के बजाय उसे चुनौती देते नजर आ रहे हैं. बलिया गड़वार क्षेत्र के त्रिकालपुर चौराहे पर उनका छोटा-सा चाय का स्टाल है, जिससे वे परिवार का भरण-पोषण करते हैं. उनकी चाय का स्वाद ऐसा है कि लोग दूर-दूर से खींचे चले आते हैं. छोटू की मेहनत और आत्मसम्मान उन्हें विशेष महत्व देती है.
पंडित धीरेन्द्र शास्त्री से भी कर चुके हैं मुलाकात
छोटू मन की शांति की तलाश में बागेश्वर धाम भी पहुंच गए, जहां उनकी बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र शास्त्री से मुलाकात भी हो गई और उन्हें आशीर्वाद भी मिला कि वे अब हमेशा सुखी और स्वस्थ रहेंगे. इसके बाद से उनका हौसला और भी मजबूत हो गया है. उनकी दुकान पर अब आम लोगों से लेकर पुलिस अधिकारी और नेता तक पहुंच रहे हैं. बलिया के इंस्पेक्टर संजय शुक्ला ने भी छोटू की कहानी को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद लोग भावुक हो उठे और उनकी सराहना करने लगे थे.
चाय की चुस्की का हर कोई दीवाना
छोटू की कहानी हमें सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों, तो जिंदगी को नया आयाम जरूर दिया जा सकता है. छोटू के चाय की चुस्की जो लेता है, वो तारीफ करना नहीं भूलता है. छोटू गांव से दूध लाकर अदरक और इलायची आदि डालकर चाय बनाते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.