पिता राजमिस्त्री, बेटी ने गांव की पहली महिला जूनियर इंजीनियर बन चौड़ा किया सीना, अब AE बनने की तैयारी
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Inspirational Story: साधारण परिवार में जन्मी पूजा महाकुड़ ने अपनी मेहनत, लगन और हौसले के दम पर जूनियर इंजीनियर बनकर इतिहास रच दिया है. उनके पिता परनव महाकुड़ एक राजमिस्त्री हैं. पूजा कहती हैं कि उनका सपना यहीं खत्म नहीं होता. अब वह असिस्टेंट इंजीनियर बनने की तैयारी करेंगी. वह अपने गांव की पहली महिला इंजीनियर बन गई हैं, जिससे पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है.
जमशेदपुर. झारखंड के बहरागोड़ा प्रखंड के बांके दह गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो हर युवा खासकर बेटियों के लिए मिसाल बन गई है. साधारण परिवार में जन्मी पूजा महाकुड़ ने अपनी मेहनत, लगन और हौसले के दम पर जूनियर इंजीनियर (JE) बनकर इतिहास रच दिया है. वह अपने गांव की पहली महिला इंजीनियर बन गई हैं, जिससे पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है.
पूजा का सफर आसान नहीं था. उनके पिता परनव महाकुड़ एक राजमिस्त्री हैं, जो दिन-रात मेहनत कर परिवार का खर्च चलाते रहे. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. पूजा ने भी इस भरोसे को टूटने नहीं दिया और लगातार आगे बढ़ती रहीं.
कुछ बड़ा करने का था लक्ष्य
उन्होंने अपनी 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद बहरागोड़ा पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अपने लक्ष्य को साफ कर लिया था कि उन्हें कुछ बड़ा करना है.
बीटेक के बाद जब उन्हें 5-6 महीने का समय मिला, तो उन्होंने इसे बेकार नहीं जाने दिया. उन्होंने एचपीसीएल (HPCL) में इंटर्नशिप कर प्रैक्टिकल अनुभव हासिल किया. यही नहीं, उन्होंने अपने ही डिप्लोमा कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में बच्चों को पढ़ाकर ज्ञान बांटने का भी काम किया. यह उनके जज़्बे को दिखाता है कि वह सीखने के साथ-साथ दूसरों को सिखाने में भी विश्वास रखती है.
परिवार और पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण
पूजा की हॉबी शुरू से ही पढ़ाई के साथ-साथ खेती-किसानी भी रही है. एक साधारण ग्रामीण परिवार से आने के कारण उन्होंने जमीन से जुड़े रहकर अपने सपनों को उड़ान दी. यही वजह है कि आज उनकी सफलता हर किसी को प्रेरित कर रही है. मनरेगा के तहत उनका चयन कनिष्ठ अभियंता के पद पर हुआ है और जमशेदपुर में उपायुक्त द्वारा उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा गया. यह पल उनके परिवार और पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण बन गया.
पूजा कहती हैं कि उनका सपना यहीं खत्म नहीं होता. अब वह असिस्टेंट इंजीनियर (AE) बनने की तैयारी करेंगी. उनका लक्ष्य है देश और समाज के लिए कुछ अच्छा करना और यह साबित करना कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता. पूजा महाकुड़ की यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और कठिनाइयां भी रास्ता नहीं रोक सकती बल्कि सफलता की सीढ़ी बन जाती है.
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