LPG संकट के बीच चंदौली का ये युवक बना आपदा में अवसर, 125 घरों तक पहुंचाई सस्ती बायोगैस, सिर्फ 500 में ढूंढा ‘स्मार्ट’ सॉल्यूशन

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Biogas Plant Established in Chandauli: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अब भारत तक भी महसूस किया जा रहा है. ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है. जिसके चलते पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर असर पड़ा है. देश के कई हिस्सों में लोगों को गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे समय में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक अच्छी खबर सामने आई है. जहां एक युवा की दूरदर्शी सोच ने न केवल इस संकट का समाधान दिया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के लिए मिसाल भी कायम की है.

चंदौली जिले के रहने वाले चंद्र प्रकाश सिंह ने अपने गांव इकौनी में बायोगैस प्लांट स्थापित कर करीब 125 घरों को गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की है. यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि ग्रामीणों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो रही है. जब देश के अन्य हिस्सों में लोग एलपीजी की कमी से जूझ रहे हैं. तब इस गांव के लोग पिछले 4 वर्षों से बायोगैस का उपयोग कर रहे हैं और किसी भी तरह की गैस संकट से लगभग अछूते हैं.

वर्ष 2022 में हुई थी प्लांट की शुरुआत
चंद्र प्रकाश सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस बायोगैस प्लांट की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य गांव में उपलब्ध गोबर का सही उपयोग करना था. उनके पास लगभग 150 पशु थे. जिससे बड़ी मात्रा में गोबर निकलता था. पहले यह गोबर बेकार चला जाता था और इसके निपटान की समस्या बनी रहती थी. इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने साफ ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए बायोगैस प्लांट लगाने का निर्णय लिया.

125 घरों को दिए गए हैं गैस कनेक्शन
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उन्हें तकनीकी और आर्थिक सहयोग भी मिला, जिसके बाद उन्होंने अपने गांव में यह प्लांट स्थापित किया. करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट ने आज पूरे गांव की तस्वीर बदल दी है. गांव के 125 घरों को गैस कनेक्शन दिए गए हैं और हर घर में मीटर लगा हुआ है, जिससे उपयोग के अनुसार ही बिल लिया जाता है.

लगभग आधी कीमत में मिल रही है गैस
चंद्र प्रकाश ने बताया कि आर्थिक दृष्टि से भी यह मॉडल बेहद सफल साबित हो रहा है, जहां एक ओर एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगातार बढ़ रही है. वहीं, इस बायोगैस के जरिए लोगों को लगभग आधी कीमत में गैस मिल रही है. एक परिवार जो गैस उपयोग करता है, उसका मासिक खर्च लगभग 500 रुपये के आसपास आता है. जो एलपीजी के मुकाबले काफी कम है. इससे ग्रामीणों की जेब पर बोझ कम हुआ है और वे राहत महसूस कर रहे हैं.

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता हो रही कम
आगे उन्होंने बताया कि इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण है. गोबर से निकलने वाली मिथेन गैस, जो एक हानिकारक ग्रीनहाउस गैस है, उसे नियंत्रित करके ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जा रहा है. इससे न केवल प्रदूषण कम हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा भी मिल रहा है. इसके अलावा, बायोगैस प्लांट से निकलने वाला अवशेष (डाइजेस्टेड स्लरी) एक उच्च गुणवत्ता वाला जैविक खाद है. इसे किसान अपने खेतों में उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी फसल की उत्पादकता बढ़ रही है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो रही है.

रोजगार के पैदा किए जा सकते है नए अवसर
उन्होंने बताया कि कई किसानों ने अब यूरिया और डीएपी उर्वरकों का उपयोग काफी हद तक कम कर दिया है और जैविक खेती की ओर रुख किया है. उन्होंने कहा कि यह मॉडल केवल उनके गांव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे देश के अन्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी अपनाया जाना चाहिए. भारत के गांवों में पशुधन की कोई कमी नहीं है और गोबर की उपलब्धता भी पर्याप्त मात्रा में होती है. यदि इस संसाधन का सही उपयोग किया जाए, तो न केवल ऊर्जा संकट का समाधान हो सकता है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं.

शहरों की ओर नहीं करना पड़ेगा पलायन
वहीं, उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे इस तरह की तकनीकों को सीखें और अपने क्षेत्रों में लागू करें. इससे उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा और वे अपने गांव में रहकर ही आत्मनिर्भर बन सकते हैं. साथ ही, यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी. आज जब दुनिया ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है, तब चंदौली के इस युवा की पहल एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है.

भारत को देंगी एक नई दिशा
बता दें कि यह न केवल एक सफल प्रयोग है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि यदि सही सोच और प्रयास हो, तो स्थानीय संसाधनों के जरिए बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. इस तरह की पहलें न केवल देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगी, बल्कि आने वाले समय में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को एक नई दिशा भी देंगी.

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