वनडे के वो 5 बल्लेबाज….जो करियर में कभी नहीं हुए जीरो पर आउट, 100 पारियों के बाद भी ‘डक’ से कोसों दूर ये बल्लेबाज
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5 batsman No ducks in career in ODI: क्रिकेट की पिच पर ‘डक’ से बचना तकनीक और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा है. केप्लर वेसेल्स और यशपाल शर्मा जैसे दिग्गजों ने अपने पूरे वनडे करियर में कभी शून्य का सामना नहीं किया. वहीं, मॉडर्न क्रिकेट में डेरिल मिचेल और आगा सलमान ने आक्रामक अंदाज में खेलते हुए भी इस रिकॉर्ड को बरकरार रखा है.यह तुलना दर्शाती है कि चाहे 80 का दशक हो या आज का दौर, अपनी विकेट की कीमत समझने वाले बल्लेबाज ही इतिहास में अमिट छाप छोड़ते हैं.

वनडे करियर में कभी शून्य पर आउट नहीं होने वाले 5 बल्लेबाज.
नई दिल्ली. क्रिकेट के खेल में ‘शून्य’ पर आउट होना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक डरावना सपना होता है. लेकिन वनडे इंटरनेशनल के इतिहास में कुछ ऐसे ‘भाग्यशाली’ और अनुशासित खिलाड़ी भी रहे हैं, जिन्होंने कभी भी डक का स्वाद नहीं चखा. जब हम जीरो पर आउट न होने के इस दुर्लभ रिकॉर्ड की तुलना करते हैं, तो हमारे सामने अलग-अलग दौर के चार दिग्गज नाम उभर कर आते हैं. केप्लर वेसेल्स, डेरिल मिचेल, आगा सलमान और भारत के यशपाल शर्मा.
इस लिस्ट में टॉप पर दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया दोनों के लिए खेल चुके केप्लर वेसेल्स (Kepler Wessels) हैं. 1983 से 1994 के बीच उन्होंने 109 मैच खेले और 105 पारियों में कभी शून्य पर आउट नहीं हुए. वेसेल्स का खेल धैर्य और तकनीक का मिश्रण था. उन्होंने 34.35 की औसत से 3367 रन बनाए. उनके आंकड़े बताते हैं कि वे ‘ओल्ड स्कूल’ क्रिकेट के पुरोधा थे.6088 गेंदें खेलकर 55.30 के स्ट्राइक रेट से रन बनाना आज के दौर में मुमकिन नहीं लगता. लेकिन उस समय वे टीम की रीढ़ हुआ करते थे. उन्होंने अपने करियर में 263 चौके जड़े, लेकिन छक्के सिर्फ 2 ही लगाए.
वनडे करियर में कभी शून्य पर आउट नहीं होने वाले 5 बल्लेबाज.
इसके बिल्कुल विपरीत मॉडर्न क्रिकेट के सितारे डेरिल मिचेल की कहानी है. न्यूजीलैंड के इस बल्लेबाज ने 2021 से 2026 के बीच सिर्फ 59 मैचों में वो मुकाम हासिल कर लिया जो बड़े-बड़े दिग्गजों के लिए सपना है. मिचेल की खास बात उनका 58.47 का बेहतरीन औसत और 95.72 का स्ट्राइक रेट है.वेसेल्स जहां एक शतक लगाकर रुक गए थे, वहीं मिचेल ने अब तक 9 शतक और 12 अर्धशतक जड़ दिए हैं. दिलचस्प बात यह है कि मिचेल ने वेसेल्स से आधी पारियां (54) खेलकर भी उनसे कहीं ज्यादा 71 छक्के लगा दिए हैं. यह दो अलग-अलग युगों के बीच के बड़े अंतर को स्पष्ट करता है.
मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज
पाकिस्तान के आगा सलमान भी इसी राह पर चल रहे हैं. 2022 से 2026 के दौरान 50 मैचों की 42 पारियों में सलमान कभी शून्य पर पवेलियन नहीं लौटे. उनका 45.23 का औसत और 134 का सर्वोच्च स्कोर यह साबित करता है कि वे सिर्फ क्रीज पर टिकते ही नहीं, बल्कि मैच जिताने वाली पारियां भी खेलते हैं. सलमान का स्ट्राइक रेट (96.18) डेरिल मिचेल के लगभग बराबर है, जो दिखाता है कि आधुनिक क्रिकेट में ‘डक’ से बचने का मतलब अब केवल रक्षात्मक खेलना नहीं रह गया है. उन्होंने 135 चौके और 29 छक्के लगाकर पाकिस्तान के मध्यक्रम को एक नई मजबूती दी है.
जब हम भारतीय बल्लेबाज की बात करते हैं, तो यशपाल शर्मा का नाम गर्व से लिया जाता है. 1983 विश्व कप के नायक रहे यशपाल शर्मा ने 1978 से 1985 के बीच 42 मैचों की 40 पारियों में कभी शून्य का मुंह नहीं देखा. 883 रन और 28.48 की औसत के साथ उनके आंकड़े भले ही वेसेल्स या मिचेल जितने भारी न लगें, लेकिन उनकी उपयोगिता उस दौर के कठिन हालातों में बेजोड़ थी. उन्होंने बिना किसी शतक के भी 4 अर्धशतक लगाए और 63.02 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए. उस दौर में जब सुरक्षात्मक गियर कम थे और तेज गेंदबाज खूंखार, तब 40 पारियों तक शून्य से बचे रहना किसी उपलब्धि से कम नहीं था.
पीटर कर्स्टन और तकनीक का जादू
दक्षिण अफ्रीका के पीटर कर्स्टन की कहानी भी वेसेल्स जैसी ही जुझारू है. 1991 से 1994 के छोटे अंतराल में उन्होंने 40 मैच खेले और बिना किसी शून्य के 1293 रन बनाए. 38.02 की औसत और 56.02 के स्ट्राइक रेट के साथ कर्स्टन ने दक्षिण अफ्रीका की इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी के समय एक ठोस आधार प्रदान किया. उन्होंने अपने करियर में 9 अर्धशतक लगाए और 90 चौके जड़े.
आंकड़ों का खेल और युगों का बदलाव
इन खिलाड़ियों की तुलना हमें क्रिकेट के विकास की कहानी सुनाती है. केप्लर वेसेल्स ने 105 पारियों तक जो अनुशासन दिखाया, वह रक्षात्मक बल्लेबाजी का चरम था. वहीं डेरिल मिचेल ने दिखाया कि आक्रामक क्रिकेट खेलते हुए भी शून्य से बचा जा सकता है. यशपाल शर्मा ने उस दौर में भारत के लिए उम्मीद जगाई जब वनडे क्रिकेट अपनी पहचान बना रहा था. इन सभी में एक बात सामान्य है.गेंद को उसकी मेरिट पर खेलना और अपनी विकेट की कीमत समझना. चाहे वह वेसेल्स के 6088 गेंदों का संघर्ष हो या मिचेल के 2810 गेंदों में मचाया गया तूफान, इन खिलाड़ियों ने साबित किया है कि क्रिकेट के मैदान पर ‘शून्य’ सिर्फ एक संख्या है. जिसे अगर आप चाहें तो अपनी किस्मत और मेहनत से अपने स्कोरबोर्ड से दूर रख सकते हैं.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें