Shri Veni Madhav Mandir Prayagraj know history of veni madhav temple | त्रेतायुग से जुड़ा है त्रिवेणी रक्षक का इतिहास, यहां दर्शन किए बिना अधूरी मानी

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त्रेतायुग से जुड़ा है त्रिवेणीरक्षक का इतिहास, दर्शन बिना अधूरी है इनकी यात्रा

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Shri Veni Madhav Mandir: श्रीहरि नारायण के आपने कई मंदिरों के बारे में सुना होगा, आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका संबंध त्रेतायुग से माना जाता है. यह मंदिर मंदिर संगम नगरी प्रयागराज में स्थित है. यहां हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं प्रयागराज के वेणी गोपाल मंदिर के बारे में…

त्रेतायुग से जुड़ा है त्रिवेणीरक्षक का इतिहास, दर्शन बिना अधूरी है इनकी यात्राZoom

Shri Veni Madhav Mandir: शिवनगरी काशी के पड़ोस में प्रयागराज स्थित है, जिसे संगम नगरी भी कहा जाता है. इस नगरी के रक्षक स्वयं नारायण हैं. शहर में भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र तीर्थ है, यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि त्रेतायुग का जीवंत साक्षी भी है. मान्यता है कि नारायण के मंदिर में दर्शन किए बिना प्रयागराज की तीर्थयात्रा पूरी नहीं होती. हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, उसका नाम है वेणी माधव मंदिर. बताया जाता है कि इस मंदिर का संबंध त्रेतायुग से है और यहां हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है. आइए जानते हैं प्रयागराज के वेणी माधव मंदिर के बारे में खास बातें…

त्रेतायुग से जुड़ा है इतिहास
जनश्रुतियों और पुराणों के अनुसार, श्री वेणी माधव मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा है. त्रिवेणी संगम की रक्षा और भगवान विष्णु के माधव स्वरूप से जुड़े इस मंदिर का पौराणिक महत्व है. पद्म पुराण के अनुसार, तीर्थराज में भगवान विष्णु वेणी माधव के रूप में विराजमान हैं. कथा है कि त्रेता युग में राक्षस गजकर्ण के अत्याचार से तीनों लोक पीड़ित थे. भगवान विष्णु ने गजकर्ण का संहार कर त्रिवेणी (गंगा, यमुना और सरस्वती) की रक्षा की. त्रिवेणी जी की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वेणी माधव रूप में प्रयाग में स्थायी रूप से निवास करने का वरदान दिया, इसलिए वेणी माधव को प्रयागराज का प्रधान देवता और त्रिवेणी रक्षक माना जाता है.

शालिग्राम शिला से बनी माधव प्रतिमा
मंदिर में श्याम रंग की शालिग्राम शिला से बनी माधव प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित है. यहां माधव की प्रतिमा के साथ त्रिवेणी जी की प्रतिमा भी स्थापित है. दोनों प्रतिमाएं काले शालिग्राम शिला से बनी हैं, माधव शंख और चक्र धारण किए हुए हैं. यह मुख्य मंदिर नगर देवता और लक्ष्मी नारायण मंदिर जैसे कई नामों से प्रसिद्ध है. मंदिर के मुख्य द्वार पर सुनहरे अक्षरों में ‘नगर देवता’ और ‘माधो सकल काम साधो’ लिखा हुआ है.

14 महाविद्याओं से परिपूर्ण चक्र माधव
चैतन्य महाप्रभु भी अपने प्रयाग प्रवास के दौरान यहां रहकर भजन-कीर्तन किया करते थे. प्रयाग में भगवान विष्णु कुल 12 स्वरूपों में विराजमान हैं, जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है. इनमें वेणी माधव मुख्य पीठ है. इसके अलावा अन्य 11 स्वरूप में चक्र माधव, गदा माधव, पद्म माधव, अनंत माधव, बिंदु माधव, मनोहर माधव, असि माधव, संकट हरण माधव, आदि वेणी माधव, आदि वट माधव और शंख माधव हैं. चक्र माधव को 14 महाविद्याओं से परिपूर्ण माना जाता है. इनके दर्शन-पूजन से विद्या प्राप्ति होती है.

सभी भक्तों की होती है मनोकामना पूरी
आदि वट माधव को मूल माधव भी कहते हैं, क्योंकि प्रलयकाल में भगवान माधव वट वृक्ष में सिमट जाते हैं और सृष्टि काल में विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं. आम दिनों के साथ ही कृष्ण जन्माष्टमी, पूर्णिमा, अनंत चतुर्दशी, एकादशी समेत अन्य विशेष दिनों में भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. दूर-दूर से श्रद्धालु आकर भगवान वेणी माधव के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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