AI Education: इंटरनेट के ‘मायाजाल’ में अब नहीं भटकेंगे बच्चे, स्कूलों में पढ़ना होगा एआई का ‘ककहरा’

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नई दिल्ली (AI Education in Schools India). मान लीजिए कि एक ऐसी दुनिया है, जहां टेक्नोलॉजी आपके बोलने से पहले आपकी पसंद जान लेती है, आपकी सेहत का हाल बताती है और आपके लिए फैसले लेती है. यह दुनिया भविष्य नहीं, बल्कि आज की हकीकत है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन के हर हिस्से में चुपचाप अपनी जगह बना चुका है. लेकिन परेशानी यह है कि जिस तकनीक के बीच हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं, उसका ‘ककहरा’ उन्हें स्कूलों में नहीं पढ़ाया जा रहा है.

स्कूलों में एआई की पढ़ाई लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत है. इसका मतलब हर बच्चे को कोडिंग सिखाना नहीं, बल्कि यह समझाना है कि स्मार्ट मशीनें काम कैसे करती हैं और समाज पर इनका क्या असर होता है. AI & Beyond के को-फाउंडर और सीईओ जसप्रीत बिंद्रा का मानना है कि जिस तरह कभी पढ़ना-लिखना और गणित जरूरी था, आज के डिजिटल दौर में एआई की समझ वैसी ही बेसिक स्किल है. अगर बच्चे इसे नहीं समझेंगे तो वे इंटरनेट पर मिलने वाली गलत जानकारी और भेदभाव (Bias) को पहचान नहीं पाएंगे.

स्कूलों में एआई एजुकेशन क्यों जरूरी है?

एआई एजुकेशन का सबसे बड़ा रिस्क उसे न सीखना है. जब स्टूडेंट्स एआई के पीछे का विज्ञान नहीं समझते तो वे तकनीक की तरफ से परोसी गई सूचनाओं पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं. एआई की बुनियादी समझ बच्चों में ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ पैदा करती है. वे सवाल करना सीखते हैं कि मशीन ने यह जवाब क्यों दिया और क्या इसमें कोई पूर्वाग्रह (Bias) तो नहीं है?

एआई और एथिक्स: जरूरी है नैतिकता का पाठ

एआई सिस्टम न्यूट्रल नहीं होते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सिस्टम उसी डेटा पर आधारित होता है जो उन्हें दिया जाता है. बच्चों को निष्पक्षता (Fairness), जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे शब्द शुरुआती दौर में सिखाने चाहिए. अब एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना जरूरी है, जो एआई का इस्तेमाल तो करे, लेकिन पूरी जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ.

रोचक है एआई एजुकेशन की शुरुआत

स्कूल स्तर पर एआई को डरावना या कठिन बनाने की जरूरत नहीं है. इसकी शुरुआत बहुत सरल कॉन्सेप्ट से हो सकती है, जैसे: मशीनें डेटा से कैसे सीखती हैं या हमारे रोजाना के ऐप्स में एआई का इस्तेमाल कैसे होता है? प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और इंटरैक्टिव टूल्स के जरिए एआई एजुकेशन को हर उम्र के स्टूडेंट्स के लिए मजेदार बनाया जा सकता है.

सबको मिले बराबर मौका (Democratization)

अगर एआई की शिक्षा केवल कुछ खास तबके तक सीमित रही तो यह समाज में असमानता की खाई को पहले से भी ज्यादा गहरा कर देगी. सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों के करिकुलम में इसे शामिल करना सोशल जरूरत है, जिससे हर बैकग्राउंड का बच्चा आने वाली ‘एआई-ड्रिवन इकोनॉमी’ में समान अवसर पा सके.

भारत सरकार की पहल: युवा एआई फॉर ऑल

एआई एजुकेशन की दिशा में भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeITy) एक्टिव कदम उठा रहा है. सरकार ने ‘युवा एआई फॉर ऑल’ (YUVA AI for All) नाम से एक कोर्स शुरू किया है, जो एआई के बेसिक कॉन्सेप्ट पर आधारित है. यह कोशिश भारत में एआई साक्षरता को बढ़ावा देने और स्टूडेंट्स को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर है.

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