शहतूत, जामुन, अंजीर की पत्तियां बनी वरदान, बकरी को खिलाने से बाल्टी भरके देती हैं दूध, किसान की बढ़ी कमाई

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फर्रुखाबाद के कमालगंज विकास खंड क्षेत्र के भोजपुर गांव निवासी रामू पहले गांव में मजदूरी का काम किया करते थे. जिससे मुश्किल से खर्चा चल पाता था. उसके बाद घर पर अपना पुस्तैनी काम बकरी पालन शुरू किया. जिससे आज वो अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. बकरियों को शहतूत, जामुन और अंजीर के पेड़ों की पत्तियां खिलाई जाएं, तो उनके दूध उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा सकती है. ये पत्तियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो बकरियों की सेहत को मजबूत बनाती हैं.

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फर्रुखाबाद: गाय, भैंस, बकरी के साथ ही अब अधिक से अधिक आमदनी कमाई जा सके किसान ऐसे कारोबार करने में लगे हैं. जिसमें वह इन पशुओं से हटकर अन्य पशुओं का पालन करके अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इस परिवर्तन में उन्हें कमाई भी हो रही है. दूसरी ओर नए विकल्प भी अब उनसे जुड़ गए हैं. आज कई राज्यों में बकरी पालन हो रहा है.

फर्रुखाबाद के कमालगंज विकास खंड क्षेत्र के भोजपुर गांव निवासी रामू पहले गांव में मजदूरी का काम किया करते थे. जिससे मुश्किल से खर्चा चल पाता था. उसके बाद घर पर अपना पुस्तैनी काम बकरी पालन शुरू किया. जिससे आज वो अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.

5 बकरी से की शुरुआत

रामू ने लोकल18 से बताया कि वह पहले मजदूरी किया करता थे, मजदूरी के काम से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था. ऐसे में जब वह घर ही परेशान रहते थे. तभी उसके मन में एक आइडिया आया क्यों न बकरी पालन किया जाए. उन्होंने घर में 5 बकरी जो कि पहले से थी और बकरी खरीद कर बकरी पालन की शुरुआत कर दी. आज रामू बकरी पालन से महीने में अच्छा मुनाफा कमा रहें हैं. वहीं इसके साथ-साथ खेती भी कर रहा है. अब खेती-बाड़ी के साथ-साथ बकरी पालन का काम करते हैं. बकरी हमारा पार्ट टाइम जॉब है. इसमें प्रतिदिन 5 से 6 घंटा देते हैं और मुनाफा भी बेहतर हो जाता है.

शहतूत, जामुन से बकरी बढ़ाई दूध

बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए एक आसान और सस्ता उपाय सामने आया है. अगर बकरियों को शहतूत, जामुन और अंजीर के पेड़ों की पत्तियां खिलाई जाएं, तो उनके दूध उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा सकती है. ये पत्तियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो बकरियों की सेहत को मजबूत बनाती हैं. इन पेड़ों की पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन और जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाकर दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाते हैं। साथ ही, यह चारा आसानी से उपलब्ध होने के कारण किसानों का खर्च भी कम करता है.

किसान के लिए चलता फिरता है एटीएम

वहीं बकरी से निकलने वाली जैविक उर्वरक जो की 8 से 10 प्रति किलो बिक जाता है. रोज 200 से 300 रुपया इससे भी निकल जाता है. अजीत अभी दो नस्ल की बकरी पालन करता है. एक गुजरी नस्ल जो की देसी है, वहीं इसके अलावा अजमेरी और राजस्थानी बकरी पालन भी कर रखा है. रामू ने कहा कि कश्मीर जो कि ठंडा प्रदेश है. ऐसे में बकरी पालन हमारे लिए काफी फायदेमंद है. यहां पर बकरी पालन छोटे तबके के किसान के लिए चलता फिरता एटीएम है. बकरी का बच्चा जो आसानी से बिक जाता है वह बकरी पालन से खुश है और परिवार का जीवन भी आनंदित है महीने की कमाई भी अच्छी हो रही है.

ज्यादातर बेरोजगार युवा इस समय पर बकरी पालन को अपनी आमदनी का जरिया बना रखा है. इसमें थोड़ी ही पूंजी से कमाई हो रही हैं. बकरी के बच्चे सस्ती कीमत पर आसानी से मिल जाते हैं और 3 महीने का बच्चा खरीदने से काफी फायदा होता है. क्योंकि 3 महीने में खरीदे और 9 से 10 महीने में यह वयस्क हो जाता है और डेढ़ साल के अंदर ही आपको इससे चार और बच्चे मिलने लगते हैं. वही यह रोजगार आपको आगे बढ़ाने के लिए और 2 साल तक बच्चों को न बेचें तो आपके यहां पर इनकी संख्या बढ़ने के साथ ही कमाई भी बढ़ जाएगी.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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