लू और डिहाइड्रेशन से बचना है? डाइट में शामिल करें ये 5 साउथ इंडियन कोल्ड ड्रिंक्स, तुरंत मिलेगा एनर्जी का बूस्ट
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South Indian Special Summer Drinks: दक्षिण भारत की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पारंपरिक पेय बेहद असरदार माने जाते हैं. नीर मोर, रागी अम्बाली और कुलुक्की शरबत जैसे ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं. ताड़गोला से बना नुंगु शरबत और नारियल पानी आधारित वसंता नीर इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होते हैं, जो शरीर को ठंडक और ऊर्जा देते हैं. ये पेय लू से बचाने, थकान दूर करने और उमस में ताजगी बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं.
दक्षिण भारत की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पारंपरिक पेय बेहद कारगर माने जाते हैं. नीर मोर, रागी अम्बाली और कुलुक्की शरबत जैसे ड्रिंक्स शरीर को तुरंत हाइड्रेट करने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं. इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करते हैं. वहीं ताड़गोला और नारियल पानी जैसे पेय इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होते हैं, जो लू से बचाने और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं. उमस भरे मौसम में ये पारंपरिक ड्रिंक्स ताजगी और स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद साबित होते हैं.
कुलुक्की शरबत केरल का लोकप्रिय पारंपरिक ड्रिंक है, जिसे वहां एक तरह की स्ट्रीट आर्ट माना जाता है. ‘कुलुक्की’ का अर्थ होता है हिलाया हुआ, क्योंकि इसे खास तरीके से शेक कर तैयार किया जाता है. इसमें चीनी का सिरप मिठास देता है, जबकि कटी हुई हरी मिर्च हल्का तीखापन जोड़ती है. सबजा के बीज शरीर को ठंडक देते हैं और पेट की जलन को शांत करते हैं. अदरक और नींबू का मिश्रण उमस भरी गर्मी में ताजगी देता है. यह पेय स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है.
तमिल घरों में गर्मियों के दौरान मेहमानों का स्वागत अक्सर नीर मोर से ही किया जाता है. यह उत्तर भारतीय छाछ के मुकाबले काफी पतला और अधिक सुगंधित होता है. दही को मथकर उसमें काफी सारा पानी मिलाया जाता है. इसमें बारीक कटा हरा धनिया, कढ़ी पत्ता और कद्दूकस किया हुआ अदरक डाला जाता है. कुछ लोग इसमें राई और हींग का हल्का तड़का भी लगाते हैं. यह हाइड्रेशन का सबसे अच्छा स्रोत है. इसमें मौजूद कढ़ी पत्ता और हींग भारी खाने के बाद पाचन में मदद करते हैं और पसीने के जरिए निकले इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करते हैं.
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नुंगु शरबत दक्षिण भारत का खास गर्मियों का पेय है, जिसमें ताड़गोला यानी नुंगु का उपयोग किया जाता है. यह मौसमी फल बेहद ठंडी तासीर वाला होता है और शरीर को तुरंत राहत देता है. इसका गूदा लीची जैसा पारदर्शी और जेली जैसा मुलायम होता है, जिसे छोटे टुकड़ों में काटकर नन्नारी शरबत या ठंडे दूध के साथ मिलाया जाता है. इसमें विटामिन B, आयरन और कैल्शियम भरपूर होते हैं. यह शरीर को हाइड्रेट रखने, थकान दूर करने और गर्मी से होने वाली त्वचा की जलन कम करने में बेहद असरदार माना जाता है.
रागी अम्बाली दक्षिण भारत का पारंपरिक और पौष्टिक पेय है, जिसे अक्सर गरीबों का अमृत कहा जाता है. कर्नाटक में किसान इसे पीकर लंबे समय तक खेतों में काम करते हैं. इसे बनाने के लिए रागी के आटे को पानी में पकाकर गाढ़ा किया जाता है और ठंडा होने पर उसमें खट्टी छाछ मिलाई जाती है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कटा कच्चा प्याज और नमक डाला जाता है. रागी में कैल्शियम और फाइबर भरपूर होता है. यह शरीर को ठंडक देता है, तापमान संतुलित रखता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है.
वसंता नीर दक्षिण भारत का एक क्लासिक और प्रीमियम वेलकम ड्रिंक माना जाता है, जिसे खासतौर पर पारंपरिक घरों और होटलों में परोसा जाता है. इसे नारियल पानी में नारियल की मलाई मिलाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं. मिठास के लिए इसमें चीनी की जगह शहद या ताड़ की मिश्री का उपयोग किया जाता है. नारियल पानी पोटैशियम से भरपूर होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसमें नींबू का रस मिलाने से यह एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक बन जाता है, जो शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालकर खून को साफ करने में सहायक होता है.