पानी में उगने वाली ये सब्जी ₹250 kg, इसके आगे चिकन-मटन भी फेल! आदिवासियों की हेल्थ सीक्रेट रेसिपी

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Kamal Kakdi Recipe: बघेलखंड की यह खास सब्जी स्वाद और सेहत दोनों के लिए जबरदस्त मानी जाती है. इसे खाने वाले बताते हैं कि इसके लजीज स्वाद के आगे चिकन-मटन भी फीके पड़ जाते हैं. यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ये सब्जी इम्यूनिटी बूस्टर का भी काम करती है, जिससे शरीर को अंदर से मजबूती मिलती है.

Kamal Kakdi Recipe: विंध्य क्षेत्र में एक अनोखी सब्जी लोगों की खास पसंद बनी हुई है. गर्मी का मौसम आते ही इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. ग्रामीण इलाकों में इसे भसेड़ कहा जाता है. खास बात ये कि सही विधि से पकाने पर इसके सामने चिकन-मटन भी फीका पड़ जाता है. स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है, जिससे इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. आमतौर पर इसे कमल ककड़ी के नाम से लोग जानते हैं.

आदिवासी इलाकों में बहुत मांग
50 वर्षीय मोहन कुशवाहा के अनुसार, कमल ककड़ी कमल के पौधे की जड़ होती है, जो तालाबों और दलदली क्षेत्रों में पाई जाती है. आदिवासी इलाकों में यह लंबे समय से भोजन का अहम हिस्सा रही है. इसका स्वाद लाजवाब होने के साथ-साथ यह पौष्टिक भी होती है, इसलिए लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. बाजारों में इसकी अच्छी मांग है, जिससे यह कई लोगों के लिए आजीविका का साधन भी बनती है.

जानें कैसे बनेगी सब्जी
सीधी की गृहणी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि कमल ककड़ी की सब्जी बनाने का तरीका ही इसके स्वाद को खास बनाता है. सबसे पहले कमल ककड़ी को अच्छी तरह छीलकर तिरछे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके अंदर जमी मिट्टी को साफ करने के लिए इसे नमक और हल्दी वाले पानी में कुकर में 5-6 सीटी तक उबाला जाता है. इसके बाद कढ़ाई में तेल गर्म कर तेजपत्ता, दालचीनी, लौंग और जीरा जैसे खड़े मसाले डाले जाते हैं.

ऐसे तैयार करें ग्रेवी
जब मसालों से खुशबू आने लगती है, तब उसमें बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भुना जाता है. इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च डालकर मसाले तैयार किए जाते हैं. ग्रेवी के लिए टमाटर या दही दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है. टमाटर वाली ग्रेवी में धनिया, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर मिलाया जाता है, जबकि दही वाली ग्रेवी में धीमी आंच पर दही डालकर लगातार चलाया जाता है ताकि वह फटे नहीं. इसके बाद उबली हुई कमल ककड़ी को मसाले में डालकर अच्छी तरह भूना जाता है और जरूरत के अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार की जाती है. इसे ढककर 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे मसाले अंदर तक समा जाते हैं. अंत में कसूरी मेथी और हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है.

कमक ककड़ी की कीमत
कीमत की बात करें तो कमल ककड़ी बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है. इसके बावजूद ग्रामीण लोग इसे बेचने के बजाय खुद खाना ज्यादा पसंद करते हैं. उनके लिए यह सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि परंपरा और स्वास्थ्य का प्रतीक है. आधुनिक दौर में जब लोग ऑर्गेनिक और प्राकृतिक भोजन की ओर लौट रहे हैं, तब कमल ककड़ी उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का एक बेहतरीन अवसर दे रही है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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