क्या इस तारीख के बाद बदल जाएंगे बिहार के मुख्यमंत्री? अंदरखाने मंथन की कहानी, जानिए पूरा शेड्यूल

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पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली जाने और राज्यसभा की भूमिका में आने की चर्चाओं के बीच राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कुछ भी अंतिम नहीं है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम जिस दिशा में बढ़ रहा है, उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बिहार में नए मुख्यमंत्री का रास्ता साफ हो रहा है? इसी सवाल के साथ बिहार की राजनीति इन दिनों तेज बदलाव के संकेत भी दे रही है. सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू की बैठकों और दिल्ली दौरे के कार्यक्रमों ने इस चर्चा को और मजबूत किया है. माना जा रहा है कि पार्टी स्तर पर बड़े फैसलों की तैयारी चल रही है. अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की सक्रिय भूमिका में जाते हैं तो मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति बन सकती है. हालांकि संवैधानिक तौर पर वे कुछ समय तक दोनों भूमिकाओं में रह सकते हैं, लेकिन राजनीतिक संकेत यही हैं कि जल्द ही कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

अंबेडकर जयंती और ‘खरमास’ के बाद का समीकरण

राजनीति के जानकार कहते हैं कि संवैधानिक तौर पर कुछ समय तक दोनों जिम्मेदारियां निभाना संभव है, लेकिन व्यावहारिक राजनीति में ऐसा कम ही देखने को मिलता है. इसलिए माना जा रहा है कि अगर दिल्ली की भूमिका तय होती है, तो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी उसी क्रम में आ सकता है. ऐसे में बिहार की राजनीति में इस अहम बदलाव की टाइमिंग को लेकर भी खास चर्चा है. चर्चा यह है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ लेंगे और उसके बाद पटना लौटकर इस्तीफा देने की बात चल रही है. लेकिन कुछ सूत्र कह रहे हैं कि 13 अप्रैल के बाद ही इस्तीफा हो सकता है और एनडीए की बैठक भी उसी के आसपास हो सकती है.

14 से 20 अप्रैल के बीच की तारीख बेहद अहम

ऐसे में आगामी 14 अप्रैल यानी अंबेडकर जयंती के बाद राजनीतिक गतिविधियों के तेज होने की संभावना जताई जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार ‘खरमास’ समाप्त होने के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है, इसलिए सत्ता परिवर्तन जैसे बड़े फैसले के लिए यह समय अहम माना जा रहा है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि 14 अप्रैल के बाद से 20 अप्रैल के बीच किसी भी समय इस्तीफा और नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. हालांकि इसे अभी संभावनाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है.

29 अप्रैल के बाद के तारीख की चर्चा क्यों हो रही ?

दूसरा अहम तारीख 29 अप्रैल का है जब पांच राज्यों-असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी, के विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो जाएंगे और नतीजे 4 मई को आएंगे. ऐसे बिहार के कुछ नेता मान रहे हैं कि केंद्र और बीजेपी की नजर इन चुनावों पर है, इसलिए बिहार में नया सीएम चुनने का फैसला 29 अप्रैल के बाद लिया जा सकता है. इसके पीछे का एक कारण यह भी है कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर कोई उलझन नहीं होगी और चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के लिए भी बिहार में नेतृत्व को लेकर फैसला लेना आसान हो जाएगा. इस दृष्टि से 29 अप्रैल के बाद नई सरकार के गठन की संभावना और मजबूत मानी जा रही है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर अप्रैल के मध्य में बदलाव नहीं होता है, तो 29 अप्रैल के बाद यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है. यानी अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक हो सकता है.

बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल

बिहार में अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि नया मुख्यमंत्री कौन होगा. भाजपा के पास कई चेहरे हैं, लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होगा. यह भी कहा जा रहा है कि इस फैसले में नीतीश कुमार की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. खास बात यह भी है कि गठबंधन की राजनीति में संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती होगी. यानी नया चेहरा चुनने में उनकी सहमति भी अहम भूमिका निभा सकती है.

क्या कहता है जेडीयू का रुख?

जनता दल यूनाइटेड के लिए यह दौर बेहद अहम माना जा रहा है. इस मामले पर जेडीयू की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है. लेकिन पार्टी के अंदरूनी संकेत बताते हैं कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर खुली चर्चा भले न हो, पर तैयारी जरूर चल रही है. जेडीयू के लिए यह संक्रमण का समय हो सकता है, जहां पार्टी को अपने संगठन और नेतृत्व दोनों को संतुलित करना होगा. स्पष्ट है कि पार्टी को एक तरफ अपने संगठन को मजबूत रखना है, तो दूसरी तरफ बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ खुद को ढालना है.

सियासी ‘संभावना’, पर दिशा स्पष्ट

बिहार में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर पूरी तरह साफ तो नहीं है, लेकिन घटनाओं की दिशा एक संभावित बदलाव की ओर जरूर इशारा कर रही है. अप्रैल के मध्य से लेकर महीने के अंत तक की तारीखें बेहद अहम मानी जा रही हैं. साफ है कि 14 अप्रैल के बाद का समय और 29 अप्रैल के बाद की राजनीतिक स्थिति-दोनों ही अहम पड़ाव के तौर पर सामने आ रहे हैं. साफ है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि नया मुख्यमंत्री कब शपथ लेगा.

अभी संकेत है और फैसला बाकी है

बहरहाल, बिहार में सत्ता परिवर्तन अवश्यंभावी है और शेड्यूल लगभग साफ नजर आ रहा है. लेकिन अभी भी कई सवाल अनसुलझे हैं. जेडीयू समर्थक और एनडीए के अंदर चर्चा तेज है कि नया मुख्यमंत्री कब और कौन बनेगा. कुछ कह रहे हैं कि सब तय है तो कुछ कह रहे हैं कि अभी इंतजार है.ऐसे में अब देखना यह होगा कि कुमार कब और क्या फैसला लेते हैं और भाजपा बिहार के लिए किस नए चेहरे पर दांव लगाती है. फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम ‘संभावना’ के दायरे में है, लेकिन इतना तय है कि अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है.

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