60 की किताब 500 में क्यों, किताबों का बिल देख पैरेंट्स के उड़े होश, NCERT की बुक्स कहां गईं?
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Education Books Schools: स्कूलों का सेशन शुरू हो चुका है लेकिन अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की कीमतों से परेशान हैं. एक बच्चे की किताबों का पूरा सेट 5 हजार से 10 हजार रुपये तक का आ रहा है. एनसीआरटी की किताबों के लिए पैरेंटस भटक रहे हैं लकिन बाजार से गायब हैं जो मिल भी रहीं हैं उनकी कीमतें देख पैरेंट्स के होश उड़ जा रहा है. न्यूज 18 ने इसको लेकर मुहिम चलाई है. पढ़ें ये पूरी रिपोर्ट…

books price, ncert books rate, books rate list, ncert book pricing: स्कूल वसूल रहे मनमानी पैसा.
Education Books Schools: नए अकादमिक सेशन की शुरुआत होते ही प्राइवेट स्कूलों की किताब वाली मनमानी एक बार फिर सामने आ गई है. छोटे-छोटे बच्चों की किताबें खरीदने गए माता-पिता दुकान पर कीमत देखकर हैरान रह गए. एक बच्चे की किताबों का पूरा सेट 5 हजार से 10 हजार रुपये तक का आ रहा है वहीं अगर वही किताबें NCERT की होतीं तो उनकी कीमत काफी कम होती, लेकिन ज्यादातर प्राइवेट स्कूल NCERT की किताबें नहीं चला रहे हैं. स्कूल पब्लिशर्स के साथ मिलकर अपना खुद का सेट बनवा रहे हैं, जिसमें किताबों के साथ-साथ कॉपियां,कवर और अन्य स्टेशनरी भी शामिल है.अभिभावकों को स्कूल द्वारा बताई गई दुकानों से ही पूरा पैकेज खरीदना पड़ रहा है. अलग-अलग दुकान से किताबें खरीदने का विकल्प नहीं दिया जा रहा.
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किताबों के सेट की कीमत कितनी?
कई स्कूलों में किताबों का पूरा सेट 7-8 हजार रुपये से शुरू हो रहा है. इसमें हर साल नई एटलस, एलियन ब्लॉक जैसी चीजें भी शामिल हैं जिनका इस्तेमाल तक नहीं होता. किताबें प्राइवेट पब्लिशर की होती हैं और नोटबुक भी स्कूल की स्टैंप वाली ही लेनी पड़ती हैं. बाजार में जहां एक नोटबुक 20-30 रुपये में मिल जाती है वहां स्कूल 80-80 रुपये तक वसूल रहे हैं. पेंसिल,ब्रश जैसी छोटी-छोटी चीजों की कीमत भी बाजार से दोगुनी रखी गई है.
हाईकोर्ट का क्या है आदेश?
दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2019 में साफ आदेश दिया था कि स्कूलों में केवल NCERT की किताबें ही इस्तेमाल की जाएंगी लेकिन तीन साल से लगातार इस आदेश की अवहेलना हो रही है. हर साल नई तारीख पर स्कूल अपना ऑर्डर जारी कर देते हैं और अभिभावकों को मजबूरन महंगे सेट खरीदने पड़ते हैं.
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बिगड़ गया मिडिल क्लास का बजट
माता-पिता कह रहे हैं कि बच्चों को पढ़ाना तो है,इसलिए स्कूल की शर्तें माननी पड़ रही हैं. स्कूल किताबों की ऐसी लिस्ट देते हैं जो बाजार में आसानी से नहीं मिलती. यूनिफॉर्म, स्कूल बस और अन्य सुविधाओं का खर्च भी अलग से जोड़ दें तो मिडिल क्लास परिवार का बजट पूरी तरह गड़बड़ा जाता है. कुछ अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों को इतना मजबूत बना दिया जाए कि माता-पापा प्राइवेट स्कूल की तरफ रुख ही न करें. प्राइवेट स्कूल अलग-अलग पब्लिशर की किताबें हर साल बदलते हैं, जिससे किताबें रिपीट भी नहीं हो पातीं और पब्लिशर के साथ उनका कमीशन का सिलसिला चलता रहता है.
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न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्सेस स्टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें