जेवर में उड़ान, सहारनपुर में इंतजार… उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी ‘धूल फांक’ रही मशीनें, जनता में भारी रोष
Saharanpur Airport News: सहारनपुर के आसमान में विमानों की गड़गड़ाहट सुनने का सपना अब यहां के लोगों के लिए एक कसक बनता जा रहा है. डेढ़ साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े उत्साह के साथ सरसावा एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन किया था, तब लगा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस महत्वपूर्ण जिले की तरक्की को पंख लग जाएंगे. लेकिन हकीकत इसके उलट है. आज स्थिति यह है कि हाल ही में उद्घाटित नोएडा का जेवर एयरपोर्ट तो उड़ानें भरने लगा है, लेकिन सहारनपुर का एयरपोर्ट करोड़ों के निवेश और तामझाम के बावजूद केवल एक ‘शो-पीस’ बनकर रह गया है.
आखिर सहारनपुर के साथ ही सौतेला व्यवहार क्यों?
सहारनपुर के निवासियों का दर्द तब और बढ़ जाता है जब वे नोएडा के जेवर एयरपोर्ट की ओर देखते हैं. जेवर एयरपोर्ट, जिसका उद्घाटन हाल ही में हुआ, वहां से उड़ानें शुरू हो चुकी हैं. लेकिन सहारनपुर का दुर्भाग्य देखिए कि एयरपोर्ट की प्रक्रिया साल 2020 में शुरू थी. शुरुआत में इसकी समय सीमा जून 2023 रखी गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर नवंबर 2023 किया गया और 2024 में हुए औपचारिक उद्घाटन के बावजूद, यहां के टर्मिनल पर यात्रियों की जगह धूल जमा हो रही है.
सहारनपुर और उसके आसपास जिले के लोगों को उम्मीद थी कि उद्घाटन के तुरंत बाद यहां से प्रमुख शहरों के लिए फ्लाइट्स शुरू हो जाएंगी, लेकिन आज तक सहारनपुर की जनता रनवे की ओर टकटकी लगाए बैठी है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि संसाधन और बुनियादी ढांचा तैयार है, तो विमानन कंपनियां यहां से हाथ क्यों खींच रही हैं?
करोड़ों का निवेश, पर लाभ शून्य
सरसावा एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को 65 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई थी. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, 8 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल और कटीले तारों का घेरा बनाया गया. परिसर के अंदर 163 मीटर लंबा और 73 मीटर चौड़ा एप्रन (प्लेटफॉर्म) बनाया गया है, जहां एक साथ दो बड़े विमान खड़े हो सकते हैं.
विडंबना यह है कि इस एयरपोर्ट के रखरखाव, स्टाफ की सैलरी और सुरक्षा पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. करोड़ों रुपये की मशीनें टर्मिनल के अंदर लगी हैं, लेकिन उनका उपयोग करने वाला कोई नहीं है. जनता का टैक्स का पैसा पानी की तरह बह रहा है, पर सुविधा के नाम पर सहारनपुर के हाथ खाली हैं.
व्यापारियों और आम जनता का छलकता दर्द
स्थानीय व्यापारी सुशील कुमार और गौरव सुखीजा ने लोकल18 से अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, ‘हमें पूरी उम्मीद थी कि सहारनपुर का काम पहले पूरा हुआ है, तो उड़ान यहीं से शुरू होगी. जेवर एयरपोर्ट तो बाद में आया, लेकिन वह हमसे आगे निकल गया. समझ नहीं आता कि प्रशासन और सरकार की प्राथमिकता में सहारनपुर कहां है? आज भी हमें फ्लाइट पकड़ने के लिए घंटों का सफर तय कर दिल्ली या देहरादून जाना पड़ता है.’
वहीं, स्थानीय निवासी अनिल कटारिया और रविंद्र तिवारी का कहना है कि यह सिर्फ यात्रा का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का भी सवाल है. उन्होंने बताया, ‘अगर सहारनपुर में कोई गंभीर बीमार हो जाए, तो उसे चंडीगढ़ या लखनऊ ले जाने में 10 घंटे लग जाते हैं. अगर फ्लाइट होती, तो यह सफर 2 घंटे का रह जाता. प्रधानमंत्री ने कहा था कि हवाई चप्पल वाले भी उड़ेंगे, लेकिन फिलहाल तो ट्रेन में रिजर्वेशन मिलना भी दूभर है.’
डेडलाइन पर डेडलाइन, फिर भी अधूरी आस
बता दें कि सरसावा एयरपोर्ट के निर्माण की समय सीमा पहले जून 2023 तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर नवंबर 2023 किया गया. अंततः 20 अक्टूबर 2024 को इसका उद्घाटन हुआ. उद्घाटन के वक्त बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि जल्द ही यहां से लखनऊ, दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों के लिए विमान सेवा शुरू होगी. लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो किसी एयरलाइन ने रुचि दिखाई है और न ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से कोई ठोस शेड्यूल जारी किया गया है.
सहारनपुर की जनता अब पूछ रही है कि आखिर यह ‘इंतजार’ कब खत्म होगा? क्या करोड़ों की लागत से बना यह एयरपोर्ट केवल सरकारी फाइलों और उद्घाटन के पत्थरों तक ही सीमित रहेगा, या वाकई सहारनपुर के आसमान में विकास की उड़ान देखने को मिलेगी?