बारिश में भी नहीं धुलेगी कीटनाशक दवा? ये एक ट्रिक बदल देगी खेल, फसल से जैसिड का अटैक भी होगा खत्म

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बारिश में भी नहीं धुलेगी कीटनाशक दवा? ये एक ट्रिक बदल देगी पूरा खेल

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Bhindi Crop Protection Tips: नकदी फसलों में शुमार भिंडी की खेती इस समय एक खतरनाक दुश्मन जैसिड के निशाने पर है. शाहजहांपुर के कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान के अनुसार, यह सेल सैप सकर कीट खामोशी से भिंडी के पौधों का रस चूसकर उन्हें पूरी तरह निर्जीव कर देता है, जिससे किसानों की मेहनत और मुनाफा दोनों डूब सकते हैं. जानिए वो कौन से स्मार्ट तरीके हैं जो आपकी फसल को बिना भारी खर्च के भी सुरक्षित रख सकते हैं. आइए जानते हैं.

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश में भिंडी एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, जो किसानों को कम समय में अच्छी आमदनी देती है. हालांकि, जैसिड जैसे हानिकारक कीट अक्सर पूरी फसल को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों का मुनाफा प्रभावित होता है. कृषि एक्सपर्ट का मानना है कि अगर सही समय पर उचित कीट नियंत्रण प्रबंधन अपना लिया जाए, तो किसान अपनी लागत कम कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. भिंडी की खेती में जैसिड कीट पौधे का रस चूसकर उसे कमजोर कर देता है, जिससे पैदावार गिर जाती है. ऐसे में जैविक और रासायनिक दोनों ही तरीकों से किसान फसल को सुरक्षित रख सकते हैं.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि जैसिड भिंडी की फसल के लिए एक अत्यंत विनाशकारी ‘सेल सैप सकर’ कीट है. यह कीट पौधे के ऊतकों से रस चूस लेता है, जिससे पौधा धीरे-धीरे निर्जीव और कमजोर होने लगता है. कीटों के नियंत्रण के लिए सबसे पहले जैविक उपाय ही बेहतर है. किसान 4% नीम गिरी यानी नीम के बीज के साथ ‘एंडोट्रॉन’ का उपयोग करना चाहिए, जो एक ‘स्टीकर’ के रूप में काम करता है और बारिश के दौरान भी दवा को पत्तियों पर टिकाए रखता है.

जैसिड कीट का प्रकोप और लक्षण

जैसिड कीट भिंडी की फसल का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है. यह सूक्ष्म कीट पत्तियों की निचली सतह पर रहकर कोशिका रस को चूसता है. इसके प्रभाव से पत्तियों के किनारे मुड़ने लगते हैं और पूरी फसल पीली पड़कर सूखने लगती है. अगर शुरुआती चरणों में ही इसका पता चल जाए, तो फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है. किसानों को अपनी फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि कीटों की उपस्थिति का समय रहते आकलन किया जा सके.

जैविक नियंत्रण और स्टीकर का महत्व
कीटों से बचाव के लिए जैविक नियंत्रण सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है. 4% नीम गिरी का घोल 0.5 मिली प्रति लीटर पानी इसके लिए बेहद उपयोगी है. ‘एंडोट्रॉन’ मिलाने पर जोर देते हैं, क्योंकि यह दवा को पत्तियों पर मजबूती से चिपका देता है. मानसून के मौसम में जब अचानक बारिश होती है, तो यह स्टीकर दवा को धुलने से बचाता है, जिससे कीटनाशक लंबे समय तक सक्रिय रहता है और कीटों का प्रभावी ढंग से सफाया करता है.

रासायनिक उपाय और आधुनिक तकनीक
जब जैविक उपाय कारगर न हों, तब ही रासायनिक नियंत्रण की ओर बढ़ना चाहिए. ‘डाइमेथोएट 30 EC’ या ‘ऑक्सीडेमेटोन 25 EC’ के छिड़काव करें. इसके अलावा, खेतों की निगरानी के लिए ‘येलो स्टिकी ट्रैप’ यानि पीले चिपचिपे कार्ड का उपयोग एक बेहतरीन तकनीक है. यह न केवल कीटों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि किसान को यह संकेत भी देता है कि खेत में कीटों का हमला किस स्तर पर है, जिससे अनावश्यक खर्चों से बचा जा सकता है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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