पिता के साथ करती थी खेती, मां के साथ चूल्हे में बनाती थी रोटी, अब बन गई डिप्टी कलेक्टर, मेरठ की ज्योति बनी PCS अधिकारी
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मेरठ की रहने वाली ज्योति ने अपनी कड़ी मेहनत से पीसीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया है. ज्योति अपने पिता के साथ खेत में काम भी करती थी और मां के साथ चूल्हे पर रोटी भी बनाती थी. ज्योति ने यूपीपीएससी की परीक्षा में 19वीं रैंक हासिल की है.

मेरठ की ज्योति धामा ने यूपीपीएससी की परीक्षा में हासिल की 19वीं रैंक.
मेरठः एक दशक पहले तक आपराधिक गैंग एवं गैंगवार से सुर्खियों में रहने वाले इस क्षेत्र की युवा पीढ़ी बदले माहौल में वेस्ट यूपी की साख बदल रही है. वेस्ट यूपी अब प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शुमार यूपीएससी और पीसीएस परीक्षा में देशभर में अपनी प्रतिभा के झंडे फहरा रहा है. यूपीपीसीएस परीक्षाओं के रिज़ल्ट में इस बार बेटियों ने उड़ान भरी है. ऐसी ही एक बेटी मेरठ की है, जिसने इस परीक्षा में उन्नीसवीं रैंक हासिल की है. इस बिटिया की कहानी इसलिए प्रेरणादायक है. क्योंकि उसके पिता किसान है.
कैसा है ज्योति का परिवार
बेटी पिता के साथ खेतीबाड़ी में योगदान भी देती है. चूल्हे पर रोटी भी बनाती है और बेटी पढ़ेगी, बेटी आगे बढ़ेगी का नारा भी बुलंद कर रही है. ये कहानी है, मेरठ के मवाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव इकवारा की रहने वाली ज्योति धामा की. ज्योति धामा पांच भाई बहन हैं और वो परिवार की पहली प्रशासनिक अधिकारी बन गई हैं. पिता के सपनों को तो मानों पंख लग गए हों तो मां बिटिया की बलैयां लेते नहीं थकती. भाई बहन को तो मानों सारा आकाश मिल गया हो.
पिता के साथ खेत में काम करते-करते बन गई पीसीएस
पूरा गांव इस बेटी को बधाई दे रहा है. न्यूज़ 18 से ख़ास बातचीत में इस बेटी ने बताया कि कैसे वो गन्ने के खेत में पिता के साथ काम भी करती थी. चू्ल्हे पर रोटी भी सेकती थी और पढ़ाई भी करती थी. ज्योति का कहना है कि वेस्ट यूपी का माहौल बदल गया है और युवाओं की उर्जा अब सही दिशा में लग रही है. ज्योति का कहना है कि तकनीक क्रांति, ऑनलाइन अध्यन उनका सहारा बना.
2026 में 42 युवा हुए सफल
गौरतलब है कि एक दशक पहले तक आपराधिक गैंग एवं गैंगवार से सुर्खियों में रहने वाले इस क्षेत्र की युवा पीढ़ी बदले माहौल में वेस्ट यूपी की साख बदल रही है. वेस्ट यूपी अब प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शुमार यूपीएससी और पीसीएस परीक्षा में देशभर में अपनी प्रतिभा के झंडे फहरा रहा है. 2026 में ही मेरठ, शामली, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिलों से 42 युवा इन दोनों परीक्षाओं में सफल हुए हैं. इनमें से भी यूपीएससी में पांच युवा टॉप-100, जबकि यूपीएससी में नौ मेधावियों ने टॉप-50 रैंक में जगह बनाई है.
सफलता में तकनीक का बड़ा योगदान
छोटे शहर, गांव और कस्बों से निकले मेधावियों की सफलता के पीछे बड़ा योगदान तकनीक का है. तकनीक ने दूरियों को खत्म कर दिया. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया और तैयारी की. सफल हुए अन्य मेधावियों ने भी यूट्यूब और तैयारी कराने वाले विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद ली.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें