घायलों के लिए भगवान का दूत बनकर आता है यह युवा! सड़क सुरक्षा प्रहरी की ऐसी कहानी, जो आपके अंदर भर देगी जोश

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Farrukhabad Road Safty: सड़क हादसे में घायल कोई अजनबी नहीं, बल्कि किसी का अपना होता है. इसी सोच के साथ फर्रूखाबाद के एक युवा सड़क सुरक्षा को अपना मिशन बनाकर न सिर्फ गड्ढे भर रहे हैं, बल्कि गोल्डन ऑवर में घायलों की जान बचाकर समाज के लिए मिसाल बन रहे हैं.

फर्रुखाबाद: देशभर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच जहां लोग व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं, वहीं जिले के कुछ युवाओं ने खुद जिम्मेदारी उठाकर समाज के लिए मिसाल कायम की है. ये युवा न सिर्फ सड़क सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं, बल्कि हादसों में घायल लोगों की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में अभिषेक गुप्ता बने सड़क सुरक्षा के प्रहरी और उनकी टीम ने सड़क सुरक्षा को अपना मिशन बना लिया है. ये युवा सरकारी इंतजार करने के बजाय खुद आगे आकर सड़कों पर बने गड्ढों को भरने का काम कर रहे हैं. बजरी और अन्य सामग्री की मदद से वे खराब रास्तों को ठीक कर लोगों के लिए सफर आसान और सुरक्षित बना रहे हैं.

घायल की मदद करना इंसान का फर्ज
लोकल18 की टीम को अभिषेक गुप्ता ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति केवल एक अजनबी नहीं होता, बल्कि वह किसी का भाई, बेटा या अपना हो सकता है. ऐसे में उसकी मदद करना हर इंसान का कर्तव्य बनता है. यही सोच उन्हें हर समय लोगों की मदद के लिए प्रेरित करती है.

गोल्डन ऑवर का महत्व
यह टीम खासकर गोल्डन ऑवर का महत्व समझते हुए हादसे के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने का प्रयास करती है, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है. रात हो या दिन, ये युवा हर समय मदद के लिए तैयार रहते हैं. इतना ही नहीं, सड़क हादसा होते ही यह टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है और घायलों को बिना देर किए अस्पताल पहुंचाती है. खास बात यह है कि कई बार ये युवा रात के अंधेरे में भी सक्रिय रहते हैं और गोल्डन ऑवर में घायल को इलाज दिलाकर उसकी जान बचाने में सफल होते हैं.

बदलाव के लिए आम लोगों की पहल बेहद जरूरी
इसके साथ ही अभिषेक गुप्ता सड़क सुरक्षा प्रहरी टोली के साथ मिलकर लोगों को यातायात नियमों के पालन के लिए भी जागरूक कर रहे हैं. हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और सुरक्षित ड्राइविंग जैसे नियमों को लेकर वे लगातार अभियान चला रहे हैं. आज ये युवा समाज में एक प्रेरणा बन चुके हैं, जो यह साबित करते हैं कि बदलाव के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों की पहल भी बेहद जरूरी है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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