इंग्लैंड में एक महान खिलाड़ी ने किया बगावत, ‘द हंड्रेड’ से नफरत का इजहार, डगआउट में बैठने को बताया डेंजर काम
नई दिल्ली. दुनिया के महानतम तेज गेंदबाजों में शुमार जेम्स एंडरसन आमतौर पर विवादों से दूर रहने वाले, संतुलित और खेल की गरिमा को समझने वाले खिलाड़ी माने जाते हैं लेकिन जब ऐसा खिलाड़ी किसी टूर्नामेंट को लेकर खुलकर अपनी नापसंदगी जाहिर करे, तो वह अपने आप में बड़ी बात बन जाती है. एंडरसन का ‘द हंड्रेड’ को लेकर दिया गया बयान भी कुछ ऐसा ही है सीधा, सच्चा और बिना किसी लाग-लपेट के.
जेम्स एंडरसन जो खेल का सम्मान करते हैं और यही गुण उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में खड़ा करता है हालांकि, ‘द हंड्रेड’ टूर्नामेंट को लेकर उनका हालिया बयान काफी अलग नजर आता है.पिछले सीजन ‘द हंड्रेड’ में अपने छोटे से अनुभव को याद करते हुए इंग्लैंड के इस दिग्गज ने बात को घुमाने की कोशिश नहीं की. उन्होंने साफ-साफ कहा कि उन्हें इस टूर्नामेंट का हर पल नापसंद था.
एंडरसन ने ‘द हंड्रेड’ को कहा ‘नो’
एंडरसन ने मैनचेस्टर ओरिजिनल्स के साथ करार किया था, जो लंकाशायर की फ्रेंचाइजी है. कागज पर यह उनके रेड-बॉल करियर का एक छोटा फॉर्मेट में विस्तार जैसा लग रहा था, लेकिन असल में यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया. खेल की लय अलग थी, मांगें अलग थीं और 43 साल की उम्र में एंडरसन ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि यह कुछ ऐसा नहीं था, जिसे उन्हें जबरदस्ती जारी रखना चाहिए. अगर मैं कह सकता हूं, तो पिछले साल ‘द हंड्रेड’ का हर मिनट मुझे नापसंद था,” उन्होंने कहा. यह बयान उस फॉर्मेट के साथ उनके असहज अनुभव को पूरी तरह बयान करता है. उन्होंने यह भी कहा, “जब ‘द हंड्रेड’ होगा, तब मैं उम्मीद करता हूं कि कहीं छुट्टियों पर रहूंगा. एंडरसन ने पिछले साल ‘वाइटैलिटी वाइल्डकार्ड’ के जरिए मैनचेस्टर ओरिजिनल्स के लिए इस प्रतियोगिता में चौंकाने वाली शुरुआत की थी.
आंकड़े भी उनके पक्ष में कुछ खास नहीं कहते. तीन मैच, दो विकेट और लगभग 11 की इकोनॉमी. खासकर तब, जब उन्होंने टी20 ब्लास्ट के शुरुआती चरण में 17 विकेट लेकर इस टूर्नामेंट में जगह बनाई थी, यह प्रदर्शन काफी फीका रहा लेकिन एंडरसन के लिए यह आंकड़ों से ज्यादा सहजता का मामला था या यूं कहें कि सहजता की कमी का.
लंकाशायर पर फोकस, वहीं असली प्राथमिकता
अब एंडरसन का ध्यान वहीं लौट आया है, जहां वह सबसे ज्यादा प्रभावी रहे हैं रेड-बॉल क्रिकेट में. लंकाशायर की चार दिवसीय टीम के कप्तान के रूप में वह इस सीजन अपनी प्राथमिकताओं को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं. उन्होंने कहा, “इस साल कप्तान होने के नाते मेरे लिए यह बेहद जरूरी है कि मैं चार दिवसीय क्रिकेट के लिए खुद को पूरी तरह फिट रखूं. मैं फिर से टी20 ब्लास्ट में भी खेलना चाहता हूं. एंडरसन की योजना अब फिट रहने, सभी मैच खेलने और लंकाशायर को काउंटी चैंपियनशिप के पहले डिवीजन में पहुंचाने की है. यह चुनौती उनके भीतर एक नई ऊर्जा भरती दिख रही है. पिछले साल लंकाशायर का सीजन उतार-चढ़ाव भरा रहा था, जिसमें नेतृत्व और कोचिंग में बदलाव भी देखने को मिले थे. ऐसे में एंडरसन का कप्तान बनना टीम के लिए स्थिरता और उम्मीद दोनों लेकर आया है.
43 साल की उम्र में एंडरसन शारीरिक चुनौतियों को लेकर भी पूरी तरह यथार्थवादी हैं. उनके शब्दों में शेड्यूल “बेहद व्यस्त” है ऐसे में वर्कलोड को मैनेज करना बेहद जरूरी हो जाता है और ‘द हंड्रेड’ से दूरी बनाना इसी रणनीति का हिस्सा है.दो दशकों से ज्यादा लंबे करियर में अपनी फिटनेस और निरंतरता से मिसाल कायम करने वाले एंडरसन के लिए यह बस एक और समझदारी भरा फैसला है जो जरूरी नहीं, उसे छोड़ो और जो सबसे अहम है, उस पर पूरी ताकत झोंक दो.