Bachali Kura Pappu Recipe | गर्मियों के लिए खास तेलंगाना की इमली वाली दाल |
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Bachali Kura Pappu Recipe: तेलंगाना की मशहूर डिश ‘बाचली कुरा पप्पू’ गर्मियों के मौसम के लिए एक आदर्श आहार है. यह डिश मालाबार पालक (बाचली कुरा) और अरहर की दाल (पप्पू) के मिश्रण से तैयार की जाती है. इसमें इमली का उपयोग किया जाता है, जो इसे एक अनोखी खटास देता है और पाचन में मदद करता है. मालाबार पालक औषधीय गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर को ठंडक पहुँचाता है और पोषण प्रदान करता है. इसे बनाने की विधि बेहद सरल है, जिसमें दाल और पालक को साथ उबालकर इमली के साथ पकाया जाता है और अंत में लहसुन, करी पत्ता और हींग का तड़का लगाया जाता है. दक्षिण भारतीय घरों में इसे अक्सर गाढ़ा बनाया जाता है और घी लगे चावल के साथ खाया जाता है.
Bachali Kura Pappu Recipe: दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना के खान-पान की जब भी चर्चा होती है, तो वहां की सादगी और मसालों का संतुलन हर किसी का दिल जीत लेता है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक बेहद लोकप्रिय डिश है ‘बाचली कुरा पप्पू’. स्थानीय भाषा में ‘बाचली कुरा’ का अर्थ मालाबार पालक (Malabar Spinach) होता है और ‘पप्पू’ का अर्थ दाल है. यह केवल एक साधारण दाल नहीं है, बल्कि तेलंगाना की संस्कृति और वहां की मिट्टी से जुड़ा एक ऐसा अहसास है जो हर घर की रसोई में रचा-बसा है. गर्मियों के दिनों में जब शरीर को हल्की और सुपाच्य चीजों की जरूरत होती है, तब यह इमली वाली दाल शरीर को अंदरूनी ठंडक पहुँचाने का काम करती है.
बाचली कुरा पप्पू को पोषण का मुख्य स्रोत माना जाता है. इसमें इस्तेमाल होने वाला मालाबार पालक विटामिन-ए, सी और आयरन से भरपूर होता है. जब इस पालक को अरहर की दाल के साथ पकाया जाता है और इसमें इमली की प्राकृतिक खटास मिलाई जाती है, तो यह एक बेमिसाल डिश बन जाती है. इमली न केवल स्वाद बढ़ाती है बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है. इस दाल को बनाने के लिए अरहर दाल, ताजा कटा हुआ मालाबार पालक, इमली का पल्प, हरी मिर्च और हल्दी जैसी बुनियादी चीजों की आवश्यकता होती है. इसका असली जादू इसके तड़के में छिपा होता है, जिसमें लहसुन, राई, जीरा, करी पत्ता और हींग का उपयोग किया जाता है.
बनाने की सरल विधि
इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले अरहर दाल को अच्छी तरह धोकर प्रेशर कुकर में डालें. इसमें कटा हुआ मालाबार पालक, कटी हरी मिर्च, हल्दी और पर्याप्त पानी डालकर 3-4 सीटी आने तक पकाएं. जब दाल पूरी तरह गल जाए, तो इसे हल्का मैश कर लें. अब इसमें इमली का पल्प और स्वादानुसार नमक मिलाएं. यदि दाल अधिक गाढ़ी लगे, तो थोड़ा गर्म पानी डालकर इसे धीमी आंच पर 5 मिनट तक पकने दें ताकि इमली का कच्चापन पूरी तरह निकल जाए और पालक का स्वाद दाल में समा जाए.
खुशबूदार तड़का और परोसने का तरीका
दाल का स्वाद दोगुना करने के लिए एक छोटे पैन में घी या तेल गरम करें. इसमें राई, जीरा और हींग डालें. जब राई चटकने लगे, तो सूखी लाल मिर्च, करी पत्ता और कुचला हुआ लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूनें. लहसुन की यही खुशबू इस दाल को असली पहचान देती है. गरमा-गरम तड़के को दाल में डालकर तुरंत ढक्कन ढक दें ताकि खुशबू अंदर ही रहे. तेलंगाना में लोग इसे अक्सर ‘मुद्दा पप्पू’ की तरह गाढ़ा रखना पसंद करते हैं. इसे गरमा-गरम चावल, एक चम्मच शुद्ध घी और सूखी मिर्च के अचार या पापड़ के साथ परोसा जाता है, जो गर्मियों के दोपहर के भोजन को यादगार बना देता है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें