42 की जगह सिर्फ 29 स्क्वॉड्रन से चीन-पाक से लोहा ले रहा IAF, तेजस डिलीवरी में सुस्ती कब दूर होगी? आ गया अपडेट

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भारतीय वायुसेना की चिंताओं और चीन-पाकिस्तान की दोहरी चुनौती के बीच तेजस मार्क-1A की डिलीवरी को लेकर सस्पेंस अब खत्म होने वाला है. कई बार डेडलाइन मिस होने के बाद अप्रैल के आखिरी हफ्ते में भारतीय वायुसेना (IAF) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच एक निर्णायक बैठक होने जा रही है. यह मीटिंग तय करेगी कि लंबे समय से इंतजार के बाद स्वदेशी लड़ाकू विमानों का बेड़ा भारतीय आसमान की सुरक्षा कब से संभालेगा.

बैठक का एजेंडा
रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस बैठक का मुख्य केंद्र एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट (ASQR) है. यह वह तकनीकी और ऑपरेशनल ब्लूप्रिंट है जिस पर विमान का खरा उतरना अनिवार्य है.

· सख्त जांच: फैक्ट्री से बाहर आने के बाद वायुसेना की टेक्निकल टीम और टेस्ट पायलट्स विमान का निरीक्षण करेंगे.

· कमी की गुंजाइश नहीं: यदि एएसक्यूआर मानकों में कोई भी कमी पाई गई तो एचएएल को उसे तुरंत दुरुस्त करना होगा. इसके बाद ही ‘एक्सेप्टेंस’ रिपोर्ट तैयार होगी.

देरी की वजह और इंजन का संकट
तेजस प्रोग्राम की सुस्त रफ्तार का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा इंजनों की डिलीवरी में की गई देरी थी.

1. डील: साल 2021 में 99 एफ404 इंजनों के लिए समझौता हुआ था.

2. ताजा स्थिति: अब धीरे-धीरे इंजनों की आपूर्ति शुरू हो गई है जिससे प्रोडक्शन लाइन में तेजी आने की उम्मीद है.

3. वायुसेना की नाराजगी: डिलीवरी में देरी को लेकर खुद वायुसेना प्रमुख अपनी चिंता और नाराजगी जाहिर कर चुके हैं.

42 के मुकाबले महज 29 स्क्वॉड्रन
वर्तमान में भारतीय वायुसेना की स्थिति नाजुक है. सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से 42 फाइटर स्क्वॉड्रन होने चाहिए लेकिन भारत फिलहाल केवल 29 स्क्वॉड्रन के साथ काम चला रहा है.

· तेजस की भूमिका: इस कमी को पूरा करने का एकमात्र रास्ता तेजस है.

· बड़ा ऑर्डर: वायुसेना ने 83 ‘मार्क-1A’ का ऑर्डर दिया है, जिससे 4 स्क्वॉड्रन बनेंगे. इसके अलावा 97 और विमानों की डील हो चुकी है. कुल मिलाकर तेजस के 11 स्क्वॉड्रन वायुसेना की रीढ़ बनेंगे, जिनमें से अभी केवल 2 ही सक्रिय हैं.

सवाल-जवाब
तेजस मार्क-1A की डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण क्या है?

मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी जीई (GE) द्वारा इंजनों की आपूर्ति में देरी और वायुसेना के सख्त तकनीकी मानकों (ASQR) की जांच प्रक्रिया है.

भारतीय वायुसेना को वर्तमान में कितने फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी है?

वायुसेना को 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत है, लेकिन अभी केवल 29 स्क्वॉड्रन ही मौजूद हैं. यानी 13 स्क्वॉड्रन की भारी कमी है.

अप्रैल की बैठक में किस मुख्य दस्तावेज पर चर्चा होगी?

इस बैठक में ASQR (Air Staff Quality Requirement) पर चर्चा होगी, जो विमान की तकनीकी और ऑपरेशनल जरूरतों का ब्लूप्रिंट है.

एचएएल के साथ कुल कितने तेजस मार्क-1A विमानों की डील हुई है?

पहले 83 विमानों की डील हुई थी, जिसके बाद हाल ही में 97 और अतिरिक्त विमानों की खरीद पर मुहर लगी है.

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