jai hanuman gyan gun sagar lyrics hanuman chalisa path in hindi or hanuman ji ke mantra | हनुमान जयंती पर करें हनुमान चालीसा का पाठ और शक्तिशाली मंत्र
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Hanuman Chalisa Path or Hanuman Mantra: हनुमान जयंती का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है. भक्ति और शक्ति के प्रतीक हनुमान की आराधना का पावन पर्व हनुमान जयंती भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ और हनुमान मंत्रों का जप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है. हनुमान जयंती के दिन इनका जप विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, जिससे भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है.

Hanuman Chalisa Path or Hanuman Mantra: आज देशभर में हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन विधि विधान के साथ हनुमानजी की पूजा अर्चना कर सिंदूर व चोला अर्पित किया जाता है. हनुमान जयंती के दिन आप कुछ करें या ना करें लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ और हनुमान के मंत्रों का जप अवश्य करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान चालीसा में समाहित चौपाइयों का पाठ व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों, भय और संकटों से बचाता है, जबकि ॐ हनुमते नमः जैसे मंत्रों का जप आत्मबल और साहस को बढ़ाता है. साथ ही शनि दोष समेत सभी ग्रहों के अशुभ प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है. हनुमान जयंती पर करें हनुमान चालीसा और हनुमानजी के मंत्रों का जप…
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
हनुमान मंत्र
ॐ हं हनुमते नमो नमः
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रु संहारणाय सर्व रोग हराय सर्व वशीकरणाय राम दूताय स्वाहा
ॐ श्री हनुमते नमः
ॐ हं हनुमते नमो नमः
ॐ श्री संकटमोचनाय नमः
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें