49 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू…. दुनिया के 5 क्रिकेटर, जिन्होंने सबसे ज्यादा उम्र में किया पदार्पण, 50 में मिली कप्तानी
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5 Oldest players who debut in Test: रिटायरमेंट की उम्र में करियर का आगाज! क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई खिलाड़ी 49 साल की उम्र में अपना टेस्ट डेब्यू करे? जेम्स साउदर्टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से लेकर मीरन बख्श की 47 साल वाली जादुई स्पिन तक. यह कहानी है उन 5 ‘सफेद दाढ़ी’ वाले क्रिकेटर्स की है, जिन्होंने उम्र को महज एक आंकड़ा साबित कर दिया. जानें कैसे आधी उम्र बीतने के बाद इन दिग्गजों ने मैदान पर कदम रखा और टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए.

49 साल की उम्र में क्रिकेटर ने किया टेस्ट डेब्यू.
नई दिल्ली. आज के दौर में 20-22 साल के युवाओं को ‘अनुभवी’ माना जाने लगा है. 35 की उम्र पार करते ही संन्यास की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं. तब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के पन्ने कुछ अलग ही कहानी बयां करते हैं. क्रिकेट के 149 साल के सफर में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हुए जिन्होंने उस उम्र में अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया, जब आज के खिलाड़ी कोचिंग या कमेंट्री बॉक्स में नजर आते हैं. टेस्ट क्रिकेट के उन 5 सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने डेब्यू मैच से ही इतिहास रच दिया. आइए जानते हैं इन ‘सफेद दाढ़ी वाले क्रिकेटर्स’ के बारे में.
क्रिकेट इतिहास के सबसे पहले टेस्ट मैच (1877) में एक ऐसा रिकॉर्ड बना जो आज भी अटूट है. इंग्लैंड के जेम्स साउदर्टन ने जब अपना पहला टेस्ट मैच खेला, तब उनकी उम्र 49 साल और 119 दिन थी. दिलचस्प बात यह है कि वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे पहले खिलाड़ी भी थे और सबसे उम्रदराज डेब्यूटेंट भी. साउदर्टन एक शानदार स्पिनर थे, लेकिन दुर्भाग्य से उनका करियर केवल दो मैचों तक ही सीमित रहा, क्योंकि डेब्यू के कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया.
49 साल की उम्र में क्रिकेटर ने किया टेस्ट डेब्यू.
इस लिस्ट में दूसरा नाम पाकिस्तान के मीरन बख्श का है. 1955 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच लाहौर में मुकाबला हुआ, तो मीरन बख्श ने 47 साल और 284 दिन की उम्र में अपना टेस्ट डेब्यू किया. मीरन को घरेलू क्रिकेट का दिग्गज माना जाता था, लेकिन इंटरनेशनल स्टेज पर उन्हें मौका काफी देर से मिला. उन्होंने भारत के खिलाफ अपनी ऑफ-स्पिन से प्रभावित तो किया, लेकिन बढ़ती उम्र के कारण उनका अंतरराष्ट्रीय सफर भी छोटा ही रहा.
46 की उम्र में फिरकी का जादू
ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्लैकी ने 1928 में इंग्लैंड के खिलाफ 46 साल और 253 दिन की उम्र में अपना पहला टेस्ट खेला. वह एक ऑफ-स्पिनर थे और उन्होंने अपने डेब्यू मैच में ही दिखा दिया कि अनुभव क्या होता है. ब्लैकी ने उस उम्र में भी शानदार फिटनेस बनाए रखी थी और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने.
हर्ब आयरन मोंगर ने 46 की उम्र में किया टेस्ट डेब्यू
डॉन ब्लैकी के डेब्यू से ठीक एक मैच पहले, ऑस्ट्रेलिया ने एक और उम्रदराज खिलाड़ी को मौका दिया था. हर्ब आयरन मोंगर ने 46 साल और 237 दिन की उम्र में अपना टेस्ट करियर शुरू किया. वह एक ऐसे गेंदबाज थे जो अपनी उंगलियों के जादू से किसी भी बल्लेबाज को चकमा दे सकते थे. आयरन मोंगर का करियर 50 साल की उम्र तक चला, जो अपने आप में एक मिसाल है.
नेल्सन बेटनकोर्ट का कप्तानी और डेब्यू एक साथ
वेस्टइंडीज के नेल्सन बेटनकोर्ट ने 1930 में इंग्लैंड के खिलाफ 42 साल और 242 दिन की उम्र में डेब्यू किया. उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्हें न केवल डेब्यू का मौका मिला, बल्कि उन्होंने टीम की कप्तानी भी की. वह वेस्टइंडीज क्रिकेट के शुरुआती दौर के उन स्तंभों में से थे जिन्होंने खेल को अनुशासन और मजबूती दी.
मजबूरी या प्रतिभा का सम्मान
इन आंकड़ों को देखकर मन में सवाल आता है कि आखिर इतनी देरी क्यों? इसके पीछे कई कारण थे. पहले और दूसरे विश्व युद्ध के कारण कई खिलाड़ियों के करियर के 5-10 साल बर्बाद हो गए. उस दौर में टीमें सालों में एक बार दौरा करती थीं, जिससे मौके कम मिलते थे. इन खिलाड़ियों ने दशकों तक घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित किया, जिसके बाद नेशनल टीम के दरवाजे खुले.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें