जितेंद्र की हीरोइन, पद्मिनी कोल्हापुरे संग दे चुकी ब्लॉकबस्टर, शशि कपूर को रातोंरात बना दिया था सुपरस्टार

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हिंदी सिनेमा की वो जानी मानी एक्ट्रेस, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र से की थी. एक्टिंग की दुनिया में आने के बारे में तो इन्होंने कभी सोचा ही नहीं था. लेकिन मजबूरी ने हीरोइन बना दिया. जितेंद्र संग हिट दे चुकी ये एक्ट्रेस शशि कपूर का भी करियर संवार गई थीं.

नई दिल्ली. बड़ी-बड़ी आंखों वाली वो हसीना, जिसने करियर में तकरीबन हर बड़े स्टार के साथ काम किया. कपूर खानदान के लाडले शशि कपूर को तो वह रातोंरात स्टार बना गईं. पद्मिनी कोल्हापुरे के मां के रोल में भी वह छा गई थीं. ( तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है.)

30 साल तक इंडस्ट्री पर राज करने वाली वो एक्ट्रेस कोई और नहीं नंदा हैं.जिसे दौर में इंडस्ट्री पूरी तरह से पुरुष प्रधान थी. उस दौर में उन्होंने अपने काम से अपने टैलेंट के दम पर अपनी अलग जगह बनाई थी.

एक वक्त था जब, बड़ी-बड़ी एक्ट्रेसेस सिर्फ बड़े स्टार के साथ ही काम किया करती थीं. लेकिन नंदा ने न्यू कमर्स के साथ भी काम किया और उनकी भी किस्मत चमका दी. उन्हीं में से एक थे, शशि कपूर जिनकी नंदा ने उंगली पकड़ी और उन्हें सुपरस्टार बना दिया. जितेंद्र के साथ भी वह साल 1969 में आई फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ में काम कर चुकी थीं.

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नंदा एक रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उनके पिता हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक थे.वह फिल्ममेकर शांताराम की भतीजी लगती थीं. कला, संगीत और समृद्धि उन्होंने शुरु से देखी. लेकिन पिता के निधन के बाद कर्जजदारों ने मुतालबा कर दिया. इसकी चलते उनकी मां को घर और संपत्ति तक बेचनी पड़ी.

मजबूरी में आकर नंदा को एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना पड़ा. साल 1959 की फिल्म ‘छोटी बहन’ में उन्होंने बलराज साहनी की अंधी और अनाथ बहन का रोल निभाकर खूब नाम कमाया. फिल्म ब्लॉकबस्टर हुई नंदा का करियर चल पड़ा.

मेकर्स ने उन्हें सिर्फ रोने-धोने वाले, दुखी और त्याग करने वाली महिलाओं के रोल में ही पेश किया. 1960 तक वह नूतन, वहीदा रहमान और साधना की तरह हाएस्ट पेड एक्ट्रेस बन गईं. साल 1965 में फिल्म आई ‘जब जब फूल खिले’ उन्होंने नए एक्टर शशि कपूर के साथ काम किया. लेकिन इस फिल्म के बाद शशि कपूर भी स्टार बन गए. नंदा की वजह से उनका करियर चल पड़ा.

इससे पहले शशि कपूर ने शुरुआत में ‘चार दीवारी’ और ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’ जैसी फिल्मों में काम किया जो फ्लॉप हो गईं, लेकिन नंदा उनसे अलग नहीं हुईं उन्होंने शशि कपूर के साथ ‘रूठा न करो’, ‘राजा साब’, ‘नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे’, ‘मोहब्बत इसको कहते हैं’ और ‘जुआरी’ जैसी फिल्में की.

बता दें कि बढ़ती उम्र के साथ भी नंदा ने एक्टिंग की दुनिया में अपनी धाक जमा रखी थीं. साल 1982 में आई फिल्म प्रेम रोग में तो उन्होंने पद्मिनी कोल्हापुरे की मां का रोल निभाकर इतिहास रच दिया था. ब्लॉकबस्टर फिल्म में ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे की जोड़ी नजर आई थी.

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