दुनिया का सबसे बड़ा तेल सुपर टैंकर कैसा, कई देशों की कई दिनों की तेल की खुराक होती इनमें, कितनी स्पीड

Share to your loved once


ईरान युद्ध चल रहा है. होमुर्ज स्ट्रैट में तेल टैंकर्स के फंसे होने की खबरें आ रही हैं. खबरें आ रही हैं इन टैंकर्स के अटक जाने से आधी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है. इन तेल टैंकर्स की कहानी भी बहुत दिलचस्प होती है. कुछ टैंकर्स की तेल भरकर चलने की क्षमता इतनी ज्यादा होती है कि उन्हें सुपर टैंकर कहा जाता है. यानि कई देशों के कई दिनों की तेल की खुराक इनमें भरी होती है. इन्हें लेकर बहुत सी उत्सुकताएं लोगों में होती है – ये कहां बनाए जाते हैं. कितने दिनों में बनते हैं,कीमत कितनी और स्पीड कितनी

दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकरों को सुपरटैंकर या अल्ट्रा लार्ज क्रूड करियर कहा जाता है. ये समुद्र में चलने वाली सबसे बड़ी मशीनों में गिने जाते हैं. इतिहास के सबसे बड़े तेल टैंकर का नाम सीवाइज जाएंट था.

लंबाई चार फुटबॉल मैदान के बराबर

लंबाई करीब 458 मीटर यानि चार फुटबॉल मैदान एक साथ लगे हों तो उनकी लंबाई के बराबर या यों समझे आधे किलोमीटर की लंबाई. तेल स्टोरेज क्षमता करीब 40 लाख बैरल यानि भारत की एक दिन की कुल खपत के बराबर.

इसका निर्माण 1979 में जापान में हुआ था. बाद में इसके नाम कई बार बदले – हैप्पी जाएंट, जाहरे वाइकिंग, नॉक नेविस. ये टैंकर इतना बड़ा था कि पनामा नहर, स्वेज नहर और कई समुद्री रास्तों से गुजर ही नहीं सकता था. 2009 में इसे तोड़ दिया गया. लेकिन इसकी कहानियां आज तेल टैंकर सेक्टर में आम हैं.

सुपर तेल टैंकर के अंदर ही 40-50 छोटे बड़े तेल टैंकर होते हैं. आमतौर पर इन टैंकर्स को भरने में ही तीन चार दिन लग जाते हैं. (AI News18 Image)

मौजूदा सुपर टैंकर

तो आज के समय में सबसे बड़ा और सक्रिय तेल टैंकर टीआई ओशिनिया आज के समय में सबसे बड़े टैंकरों में है. इसकी लंबाई तीन फुटबॉल मैदानों से थोड़ी ज्यादा यानि 380 मीटर है. इसकी चौड़ाई 68 मीटर. इसकी तेल लेकर चलने की क्षमता 30 लाख बैरल की है.

आजकल ऐसे टैंकरों को तैरते हुए स्टोरेज के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. कई बहुत बड़े टैंकर आजकल मलेशिया, सिंगापुर के पास समुद्र में तेल स्टोरेज जहाज बनकर खड़े रहते हैं. एक जहाज़ में इतना तेल हो सकता है जिससे कई छोटे देशों की एक दिन की खपत पूरी हो जाए. कई बार जब तेल की कीमत गिरती है तो कंपनियां टैंकरों को फ्लोटिंग स्टोरेज की तरह समुद्र में खड़ा कर देती हैं.

कैसे भरा जाता है इनमें तेल

इन तेल टैंकर्स में तेल भरने की प्रक्रिया भी आसान नहीं बल्कि बहुत तकनीकी वाली होती है. पहले ये बंदरगाह पर आकर खड़े होते हैं. कई बार इन्हें बंदरगाह से दूर ऑयल टर्मिनल या ऑफशोर पाइपलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाता है. फिर एक से दो मीटर मोटी पाइपलाइन जहाज के मैनिफोल्ड वाल्व से जोड़ दी जाती है. जमीन पर लगे हाई-पावर पंप तेल को सीधे जहाज के टैंकों में भेजते हैं. टैंकर के अंदर 40 से 50 बड़े टैंक होते हैं. आमतौर पर एक बड़े टैंकर जहाज को भरने में दो से तीन दिन लग जाते हैं. कभी कभी चार दिन भी.

सुपर तेल टैंकर्स को बंदरगाह से दूर ऑयल टर्मिनल या ऑफशोर पाइपलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाता है. फिर एक से दो मीटर मोटी पाइपलाइन जहाज के मैनिफोल्ड वाल्व से जोड़कर उनमें तेल भरा जाता है. (AI News18 Image)

एक रोचक सवाल हो सकता है कि टैंकर के अंदर बने तमाम टैंकों में तेल रखा कैसे जाता है. इनमें दोहरी दीवार होती है. गैस सेंसर होता है और जबरदस फायर सिस्टम ताकि दुर्घटना की स्थिति में भी तेल समुद्र में न गिरे.

कितने हार्सपॉवर का इंजन

इनमें दुनिया के सबसे बड़े डीजल इंजन लगे होते हैं. एक बड़े टैंकर के इंजन की ताकत जानकर तो आप और हैरान रह जाएंगे  80,000 -100,000 हॉर्सपावर. वैसे जो पानी के कार्गो जहाज कंटेनर्स लेकर चलते हैं, उनकी हार्स पॉवर तो इससे भी ज्यादा होती है. सामान्य तौर पर आप ये समझें कि हमारी कारों की हॉर्सपॉवर 50 HP से 300 HP के बीच होती है, जबकि स्पोर्ट्स लक्ज़री कारें 500-1000 हार्सपॉवर तक जा सकती हैं. बोइंग जैसे यात्री विमानों की शक्ति भी अविश्वसनीय होती है, जो थ्रस्ट को हॉर्सपावर में बदलने पर 100,000 हार्सपॉवर 400,000 एचपी तक हो सकती है. एक बड़े मरीन इंजन का एक सिलेंडर रोज करीब 150–200 लीटर लुब्रिकेशन ऑयल खा जाता है. पूरा इंजन एक दिन में टन भर तेल इस्तेमाल कर सकता है.

इंजन की आवाज कैसी

सुपरटैंकर का इंजन बहुत विशाल होता है, इसलिए उसकी आवाज भी काफी तेज होती है लेकिन यह आवाज उतनी कर्कश नहीं होती जितनी विमान इंजन की होती है. यह ज़्यादातर भारी, गहरी और लगातार धड़कती हुई आवाज होती है, जैसे बहुत बड़ा ड्रम धीरे-धीरे बज रहा हो.

किस रूट पर चलते हैं

अधिकतर सुपरटैंकर इन रूट्स पर चलते हैं
पर्शियन गल्फ से चीन- जापान-भारत
सऊदी अरब से यूरोप
अफ्रीका से एशिया

आज दुनिया के ज़्यादातर सुपर तेल टैंकर एशिया के बड़े शिपयार्ड में बनते हैं. आमतौर पर साउथ कोरिया, चीन और जापान इन्हें बनाते हैं.(AI NEWS18 Image)

कितना बड़ा होता है क्रू

हर बड़े तेल टैंकर पर एक नियमित क्रू होता है, जिसमें कप्तान, चीफ इंजीनियर, नेविगेशन ऑफिसर, इंजीनियर और डेक क्रू मिलाकर 20–30 लोग जहाज़ पर होते हैं. खतरनाक रास्तों में इनके साथ सुरक्षा भी चलती है. कुछ संवेदनशील समय में देशों की नौसेनाएँ भी सुरक्षा देती हैं.

सुपरटैंकर कहां बनाए जाते हैं

आज दुनिया के ज़्यादातर तेल टैंकर एशिया के बड़े शिपयार्ड में बनते हैं. आमतौर पर साउथ कोरिया, चीन और जापान इन्हें बनाते हैं. इन देशों में दुनिया के सबसे बड़े शिपयार्ड हैं. इन्हें तीन चरणों में बनाया जाता है. पहले डिजाइन तैयार होता है, जिसमें 6 से 12 महीने लग जाते हैं. फिर निर्माण शुरू होता है, जिसमें एक से डेढ़ साल लग जाता है. इसके बाद तीन से 6 महीने तक इनकी फिटिंग और टेस्टिंग चलती रहती है. यानी कुल मिलाकर एक बड़े टैंकर को बनने में लगभग 2 से 3 साल लग सकते हैं.

10 एफिल टॉवर के बराबर लोहा

एक बड़े सुपर तेल टैंकर को बनाने में 60,000 से 70,000 टन स्टील लगता है. यानि इतना लोहा, जिससे करीब 10 एफिल टॉवर बन सकते हैं.

कितनी कीमत

एक बड़े तेल टैंकर की कीमत 90 मिलियन से 120 मिलियन डॉलर यानि करीब 750 से 1000 करोड़ रुपये होती है.

क्यों इन्हें रोकना कठिन

अगर टैंकर पूरी तरह भरा हो तो इसे रोकने में 3–5 किलोमीटर तक दूरी लग सकती है. इन्हें मोड़ने के लिए बहुत बड़ा समुद्र चाहिए. इनका टर्निंग सर्कल करीब 2 किलोमीटर तक हो सकता है. ये कई नहरों से गुजर ही नहीं सकते. इनके एक इंजन की ऊंचाई 4 मंज़िल इमारत जितनी हो सकती है.

आखिर में ये तथ्य भी जान लें कि एक सुपर टैंकर इतना तेल ले जाता है कि उससे करीब 5–6 लाख कारों को एक साल तक पेट्रोल दिया जा सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP