STP method sugarcane farming I बहराइच समाचार
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गन्ने की खेती में एसटीपी विधि किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. इस आधुनिक तकनीक में एक आंख वाले गन्ने के टुकड़ों से नर्सरी तैयार कर रोपाई की जाती है, जिससे कम बीज में 100% जमाव और अधिक पैदावार मिलती है. लागत घटने के साथ मुनाफा बढ़ रहा है, इसलिए किसान तेजी से इस नई विधि को अपना रहे हैं.
बहराइच. गन्ने की बुवाई को लेकर समय-समय पर नई-नई तकनीकों को कृषि के जानकार किसानों की सहायता और अधिक मुनाफे के लिए लेकर आते रहे हैं. जिसको लेकर अब किसानों के बीच में आई हुई एसटीपी विधि किसानों को बेहद भा रही है. जिसको किसान अपना कर लागत को कम और मुनाफे को बढ़ा रहे हैं. तो आईए जानते हैं कैसे करती यह विधि काम,समझ कर आप भी उठा सकते है इसका लाभ.
एसटीपी विधि गन्ने की खेती की एक आधुनिक तकनीक
एसटीपी विधि गन्ने की खेती की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें गन्ने की (एक आंख) वाले टुकड़ों को बट कटर से काट कर नर्सरी तैयार करके रोपाई की जाती है. यह विधि कम बीज 10-15 कुंटल/एकड़ में अधिक पैदावार देती है, बीज का जमाव 100% होता है और इसमें गन्ने के बीच 30-45 सेमी की दूरी रखी जाती है.
ऐसे तैयार करें आप भी नर्सरी
एसटीपी मेथड को तैयार करने के लिए गन्ने के बीजों के टुकड़े को लेकर बट कटर से (एक आंख) काट ली जाती है और फिर मार्केट में मिलने वाली ट्रे में खाद डालकर बैठा दिया जाता है. फिर खेतों में रखकर ऊपर से पुवाल की मल्चिंग कर दी जाती है, देखते ही देखते बीज समय पर तैयार हो जाते हैं और खेत खाली होने के बाद किसान इस तैयार नर्सरी से तुरंत खेत में गन्ने की रोपाई कर देते हैं. इससे 100% गन्ने उपजाऊ होते हैं और किसान का अधिक मुनाफा होता है.
पुरानी विधि से खेती करने पर होता है नुकसान
बहुत सारे किसान जो पुरानी विधि से गन्ने की खेती करते आ रहे हैं वह एसटीपी विधि से खेती करने वाले किसानों से पीछे ही रहते हैं क्योंकि जब गन्ने के बीज की खेत में डायरेक्ट बुवाई की जाती है तो कई बार सही बुवाई ना होने पर बहुत सारे बीज ग्रोथ नहीं करते हैं और बीच-बीच में ऐसा होता है कि खेत खाली रह जाते हैं. जबकि एसटीपी मेथड में ऐसा बिल्कुल नहीं है वहां पर किसान तैयार हुई नर्सरी से बीजों की रोपाई करता है, जिससे फायदा निश्चित तौर पर होता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें