CJI Suryakant | Supreme Court News | West Bengal SIR Case | फिजूल की आपत्तियां न उठाएं…TMC की दलील सुन भड़के CJI सूर्यकांत, पश्चिम बंगाल SIR

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CJI Suryakant News: पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में आज यानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. पश्चिम बंगाल में SIR यानी विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने ऐसी दलील दी, जिस पर सीजेआई सूर्यकांत भड़क गए. टीएमस सांसद कल्याण बनर्जी की दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि फिजूल की आपत्तियां न उठाएं यह सिर्फ ओरिएंटेशन है. दरअसल, टीएमसी सांसद ने अपीलीय ट्रिब्यूनल के गठन पर सवाल उठाया था.

पश्चिम बंगाल में एसआईआर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल और TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने दलीलें रखीं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अब तक करीब 47 लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है. कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि हर दिन लगभग 2 लाख आपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है.

कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपने पत्र में CJI को बताया कि सात अप्रैल तक सभी आपत्तियों का निपटारा कर दिया जाएगा. वहीं, चुनाव आयोग (ECI) ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणियां

  • हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्र का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है.
  • इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कहा गया कि अपीलीय ट्रिब्यूनल एक अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) संस्था है.
  • इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि इन ट्रिब्यूनल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Former CJs) भी शामिल हैं.
  • सीजेआई की टिप्पणी सुन TMC सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी की ओर से सवाल उठाया गया कि फिर ट्रेनिंग की जरूरत क्यों है?
  • इसपर CJI सूर्यकांत ने जवाब दिया, ‘फिजूल की आपत्तियां न उठाएं, यह सिर्फ ओरिएंटेशन है.’
  • वहीं, सुनवाई के दौरान जस्टिस जे. बागची ने कहा, ‘उनके पास पहले से अनुभव है. ECI अधिकारियों के हस्तक्षेप को लेकर आपको चिंतित होने की जरूरत नहीं है.’

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी भी पेश हुई हैं.

ममता बनर्जी की क्या दलीलें?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दलील दी गई कि विभिन्न आदेशों में कोर्ट ने कहा था कि सभी दावे और आपत्तियों का निपटारा किया जाए, साथ ही अंतिम और पूरक मतदाता सूची प्रकाशित की जाए. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद चुनाव आयोग (ECI) ने 27 मार्च 2026 को नोटिफिकेशन जारी कर Form-6 दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी, जिससे अंतिम मतदाता सूची से पहले कोई भी आपत्ति उठा सकता है. ममता बनर्जी की ओर से आपत्ति जताई गई कि जब एडजुडिकेशन (निर्णय प्रक्रिया) चल रही है, उस समय Form-6 की अनुमति देना उचित नहीं है.

इस पर CJI ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की: ‘फिलहाल यह आशंका काफी हद तक तकनीकी (hyper-technical) है. देखते हैं.’

-SC में पश्चिम बंगाल में पोस्ट-पोल हिंसा का मुद्दा उठा

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा का मुद्दा आज सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया गया. वकील ने इस संबंध में दाखिल एक आवेदन का उल्लेख किया और मामले पर सुनवाई की मांग की. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘तो फिर CBI को पक्षकार बनाया जाए. क्या पहले की बेंच ने पोस्ट-पोल हिंसा की घटनाओं की जांच CBI को नहीं सौंपी थी?’

वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस आवेदन को किसी और दिन सूचीबद्ध किया जाए, और यह भी कहा कि उन्हें यह तक पता नहीं है कि आवेदनकर्ता कौन है.

-6 अप्रैल को होगी इस मामले में अगली सुनवाई.

बंगाल एसआईआर पर पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास अधिकांश राज्यों में सुचारू रूप से हुआ है, सिवाय पश्चिम बंगाल के. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा था कि अन्य राज्यों में एसआईआर अभ्यास के दौरान लगभग कोई मुकदमेबाजी नहीं हुई. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर जिन भी राज्यों में एसआईआर किया गया, हर जगह यह प्रक्रिया सुचारू (बिना बाधा के) रूप से चली.

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