Iran-US War | Hormuz News | Iran war impact | ईरान जंग में खूंटा गाड़कर खड़ा है भारत, संकट में भी नहीं डिगा, जनता को युद्ध की आग से कैसे बचा रहा?

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ईरान-अमेरिका जंग का असर पूरी दुनिया में दिख रहा है. भारत भी पश्चिम एशिया की तपिश को महसूस कर रहा है. पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बढ़ गई है. तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. कई देशों में ईंधन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. ऐसे में भारत घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ विदेशों में भी इमरजेंसी उपायों को तेज कर रहा है. ईरान युद्ध के चलते तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं. ऐसे में सरकार सप्लाई की निरंतरता, घरेलू वितरण और नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान दे रही है.

एनर्जी स्टैबिलिटी यानी ऊर्जा स्थिरता का एक बड़ा संकेत बुधवार को मुंबई में एलपीजी टैंकर BW TYR के पहुंचने से मिला. होर्मुज पार कर इस एलपीजी टैंकर के भारत पहुंचने से साफ हुआ कि खाड़ी के पास अहम शिपिंग रूट्स में बाधा के बावजूद सप्लाई चेन बरकरार है. होर्मुज बंद होने के बाद भी भारत के तेल और गैस टैंकर लगातार आ रहे हैं. यह दिखाता है कि भारत का सप्लाई चेन अब काम कर रहा है. अधिकारियों ने बताया कि देश के सभी बंदरगाह सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कहीं भी जाम की स्थिति नहीं है. इससे सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आ रही है.

एलीपीजी और पीएनजी सप्लाई पर कंज्यूमर को राहत 

वहीं, घरेलू स्तर पर बात करें तो सरकार ने गैस कनेक्शन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को राहत देने के प्रयास तेज कर दिए हैं. सीजीडी यानी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को घरेलू पीएनजी कनेक्शन तेजी से देने के निर्देश दिए गए हैं. नेशनल पीएनजी ड्राइव 2.0 को अब 30 जून तक बढ़ा दिया गया है. इसका असर भी दिख रहा है. मार्च में ही 3.1 लाख से ज्यादा कनेक्शन गैसीफाई किए गए, जबकि 2.7 लाख से ज्यादा नए कनेक्शन अभी जोड़े और एक्टिव किए जा रहे हैं.

रसोई गैस के सप्लाई में कोई बाधा नहीं

रसोई गैस की उपलब्धता अक्सर संकट के समय संवेदनशील मानी जाती है. वह भी स्थिर बनी हुई है. 1 मार्च से अब तक रोजाना औसतन 50 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर डिलीवर किए जा रहे हैं. कमजोर वर्गों के लिए खास तौर पर 23 मार्च से अब तक 3.2 लाख से ज्यादा 5 किलो फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर प्रवासी मजदूरों को बेचे गए हैं. इसमें एक दिन में 63 हजार से ज्यादा सिलेंडर भी शामिल हैं.

घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ भारत युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में अपने नागरिकों की बड़े पैमाने पर निकासी और सहायता अभियान भी चला रहा है. 28 फरवरी से अब तक 5.72 लाख से ज्यादा यात्री भारत लौट चुके हैं. राजनयिक मिशन और दूतावास चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं और पूरे क्षेत्र में 24×7 हेल्पलाइन सक्रिय हैं.

समंदर में भी भारत है सिकंदर

वहीं, समुद्री क्षेत्र में भी सरकार ने अब तक 959 से ज्यादा भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है. इसमें पिछले 24 घंटे में 9 नाविक शामिल हैं. इससे शिपिंग रूट्स पर खतरे की स्थिति तो दिखती है, लेकिन सरकार की सक्रियता भी नजर आती है.

होर्मुज बंद होने से सता रहा डर

वैश्विक स्तर पर इस ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई बाधित होने का डर है. यह होर्मुज तेल-गैस शिपमेंट के लिए अहम रास्ता है. इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों और टैंकरों के बीमा खर्च में बढ़ोतरी हो रही है. कई देश अपने रणनीतिक भंडार की समीक्षा कर रहे हैं और सोर्सिंग में विविधता ला रहे हैं. भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश कीमतों और लॉजिस्टिक्स रिस्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

भारत की डबल तैयारी

इन चुनौतियों के बावजूद भारत की रणनीति दोहरी है. एक तरफ घरेलू ऊर्जा वितरण को मजबूत बनाए रखना और दूसरी तरफ विदेशों में अपने नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर सहायता अभियान चलाना. अधिकारियों का कहना है कि सरकार पैनिक होने के बजाय तैयारी पर जोर दे रही है, ताकि वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बावजूद देश के भीतर जरूरी सप्लाई और सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें.

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