पिता का चलता था सिक्का, नाम से कांपते थे दिलीप कुमार-धर्मेंद्र, बेटा 12 साल से गुमनामी के अंधेरे में है गुम
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भारतीय सिनेमा के स्टार रहे राजकुमार ने खूब सक्सेस देखी. उन्होंने पूरे करियर के दौरान अपनी शर्तों पर फिल्में की और जिसे चाहा जो चाहा कह दिया. राजकुमार का दबदबा ऐसा था कि उनके साथ काम करने से बड़े-बड़े सितारे भी डरते थे, लेकिन राजकुमार के बेटे पुरू का जीवन गुमनामी के अंधेरे में बीत रहा है. एक्टर बीते 12 साल से पर्दे और लाइमलाइट से पूरी तरह से दूर हैं.

एक्टर के पिता फिल्मों के राजकुमार थे.
नई दिल्ली. दिवंगत एक्टर राजकुमार हिंदी सिनेमा के ऐसे स्टार थे, जिनका नाम लेते ही एक ऐसे एक्टर की छवि आती है जिसके सामने बड़े-बड़े लोगों की बोलती बंद हो जाती थी. उन्होंने अपने करियर के दौरान एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं. लंबे करियर के दौरान राजकुमार ने हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया. वो ताउम्र किसी के आगे झुके और न ही कभी किसी की कोई शर्त मानी. राजकुमार को गुजरे जमाने का सबसे अक्खड़ एक्टर कहा जाता है. राजकुमार ने धर्मेंद्र, दिलीप कुमार, नाना पाटेकर समेत कई लोगों से लोहा लिया था, लेकिन बावजूद इसके इंडस्ट्री में उनका दबदबा कायम रहा.
राजकुमार की उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में ऐसी डिमांड थी कि मेकर्स उनकी शर्तों पर काम करने के लिए तैयार रहते थे, लेकिन इसके ठीक उलट उनके बेटे पुरू राजकुमार की किस्मत है. सुपरस्टार का बेटा होने के बावजूद उन्हें इंडस्ट्री में न पहचान मिली और न ही पहचान बनाने के पर्याप्त मौके. एक्टर के बेटे पुरू ने कई फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी.
डेब्यू से पहले ही उठा पिता का साया
पुरू के फिल्मों में कदम रखने से कुछ महीनों पहले ही उनके पिता और सुपरस्टार राजकुमार ने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया. राजकुमार के चले जाने का असर न सिर्फ पुरू की पर्सनल जिंदगी बल्कि उनके करियर पर भी पड़ा. उनके मन में टीस रह गई कि अगर उनके पिता जिंदा होते तो शायद इंडस्ट्री का उनके प्रति रवैया कुछ और ही होता, लेकिन पिता के चले जाने के बाद इंडस्ट्री के लोगों के व्यवहार बदल गया.
12 साल से गुमनाम है राजकुमार का बेटा
आखिरी बार ‘एक्शन जैक्सन’ में नजर आए पुरू राजकुमार को लाइमलाइट से दूर हुए पूरे 12 साल हो चुके हैं. पुरू राज कुमार ने साल 1996 में फिल्म ‘बाल ब्रह्मचारी’ से एक्टिंग डेब्यू किया था. उनकी फिल्म के सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही पिता राजकुमार ने दुनिया को अलविदा कह दिया जिससे पुरू बुरी तरह टूट गए थे. उन्हें उस वक्त ऐसा लगा कि मानों रातोंरात उनके सिर से छत छिन गई हो. करियर की शुरुआत करते हुए उनपर परिवार और करियर दोनों की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी. ऐसे में सबकुछ संभालते हुए फिल्मों में आगे बढ़ने में पुरू नाकाम रहे.
फ्लॉप रही डेब्यू फिल्म
डेब्यू फिल्म ‘बाल ब्रह्मचारी’ के फ्लॉप होते और राजकुमार के जाते मानों जैसे एक्टर के पैरों तले जमीन खिसक गई. मेकर्स का उनके प्रति रुख हवा की गति से बदल गया. पहली फिल्म के फ्लॉप होते ही निर्माता-निर्देशकों ने उनसे कन्नी काट ली और उन्हें फिल्मों में लेना बंद कर दिया. यहां तक कि पहली हा असफलता को देखते हुए पुरू को उन फिल्मों से बाहर कर दिया गया जो उन्होंने साइन कर रखी थीं.
हीरो न बन पाने के बाद पुरू राजकुमार ने विलेन के रोल में फिल्में की लेकिन यहां भी उन्हें कुछ खास सफलता नहीं मिली. 2 दशक लंबे करियर के दौरान एक्टर के खाते में सिर्फ 14 फिल्में आईं जिससे उन्हें कुछ खास पहचान नहीं मिल पाई. एक्टर पिछले 12 साल से फिल्मों की दुनिया से पूरी तरह दूर हैं.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें