बॉलीवुड की वो 9 फिल्में, जो बदल देंगी जिंदगी देखने का नजरिया, 1 में 27 साल छोटी एक्ट्रेस संग दिखा था सुपरस्टार

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Movies That Change Your Life: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी है जो सिर्फ आपका मनोरंजन नहीं करती हैं बल्कि जिंदगी देखने का आपका पूरा नजरिया ही बदल देती हैं. इन फिल्मों को देखने के बाद आप जब सिनेमाघरों से बाहर निकलते हैं तो आपके दिमाग में कोई न कोई विचार जरूर होता है. आज आपको 8 ऐसी बेहतरीन फिल्मों के बारे में बताएंगे जो जिंदगी को देखने का आपका पूरा नजरिया ही बदल देंगी.

आशुतोष गोवारिकर द्वारा निर्देशित ‘स्वदेस’ 2004 की एक प्रेरणादायक फिल्म है, जिसमें शाहरुख खान और गायत्री जोशी मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म की कहानी मोहन भार्गव नाम के एक एनआरआई वैज्ञानिक की है, जो नासा में काम करता है, लेकिन भारत लौटकर अपने गांव की समस्याओं को समझता है. बिजली, शिक्षा और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है. ‘स्वदेस’ देखने के बाद आपके दिमाग में कई सारे सवाल आते हैं जिनका जवाब आपको अपने ही भीतर तलाशना होता है.

जोया अख्तर की फिल्म ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ की फिल्म दोस्ती, डर और जिंदगी को खुलकर जीने का संदेश देती है. ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर और अभय देओल तीन दोस्तों की कहानी को स्पेन ट्रिप के जरिए दिखाते हैं. फिल्म में हर किरदार अपने डर से लड़ता है और दर्शकों को बताता है कि आखिर हर डर के आगे जीत होती है. इसको देखने के बाद आप मजबूर हो जाते हैं कि जिंदगी एक ही बार मिलती है और हमें इसे खुलकर जीना चाहिए.

नितेश तिवारी की ‘छिछोरे’ (2019) एक ऐसी फिल्म है जो सफलता और असफलता के मायने बदल देती है. ‘छिछोरे’ में सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर मुख्य भूमिका में हैं. कहानी कॉलेज लाइफ और दोस्ती के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां ‘लूजर’ कहे जाने वाले दोस्त अपने जीवन के अनुभवों से सीखते हैं. फिल्म का सबसे मजबूत संदेश है- हारना बुरा नहीं, हार से हार मान लेना बुरा है.

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फरहान अख्तर द्वारा निर्देशित ‘लक्ष्य’ एक युवा के आत्म-खोज की कहानी है. ऋतिक रोशन, प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन इसमें लीड रोल में नजर आते हैं. फिल्म का हीरो करण शेरगिल एक दिशाहीन युवक होता है, जो बाद में सेना में शामिल होकर अपने जीवन का उद्देश्य खोजता है. कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म प्रेरणा और अनुशासन का मजबूत संदेश देती है.

हृषिकेश मुखर्जी की आनंद हिंदी सिनेमा की सबसे भावनात्मक फिल्मों में गिनी जाती है. अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना की ‘आनंद’ बॉलीवुड की क्लासिक कल्ट फिल्मों में शामिल है. कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो गंभीर बीमारी के बावजूद जिंदगी को हंसकर जीता है. फिल्म का डायलॉग ‘बाबू मोशाय जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए’- आज भी हर पीढ़ी को उम्मीदों से भर देता है.

साल 2016 में रिलीज हुई गौरी शिंदे की फिल्म ‘डियर जिंदगी’ मेंटल हेल्थ के बारे में बात करने वाली चंद बॉलीवुड फिल्मों में शामिल है. गौरी शिंदे ने बतौर डायरेक्टर शानदार काम किया था. फिल्म में शाहरुख खान 27 साल छोटी एक्ट्रेस आलिया भट्ट संग नजर आए थे, लेकिन इसमें दोनों के बीच रोमांस नहीं बल्कि एक अलग ही तरह का रिश्ता दिखाया गया था. एक ऐसा रिश्ता जो सिर्फ डॉक्टर और मरीज का नहीं बल्कि करीबी दोस्तों का था.

आमिर खान द्वारा निर्देशित फिल्म ‘तारे जमीन पर’ एक बच्चे की भावनात्मक दुनिया को दर्शाती है. ईशान नाम का बच्चा डिस्लेक्सिया से जूझता है, लेकिन एक शिक्षक उसकी प्रतिभा को पहचानता है. यह फिल्म शिक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरी बात करती है. फिल्म का मेसेज बेहद खास है कि हर बच्चा अपने आप में खास होता है.

इंग्लिश विंग्लिश- गौरी शिंदे की यह फिल्म श्रीदेवी की शानदार वापसी थी. कहानी एक साधारण हाउसवाइफ के आत्मविश्वास को आई चोट की है. फिल्म की इस सिंपल कहानी से भारत की लगभग हर हाउसवाइफ ने रिलेट किया और यही बात इस फिल्म को खास बनाती है. ये कहानी एक ऐसी महिला की है जो अपने परिवार से इज्जत पाने की जद्दोजहद में अपना खोया आत्मविश्वास दोबारा हासिल करती है.

राजकुमार हिरानी की ‘3 इडियट्स’ इंडियन एजुकेशन सिस्टम पर गहरा व्यंग्य करती है. आमिर खान, आर माधवन और शरमन जोशी की दोस्ती दर्शकों को खूब पसंद आई. ‘ऑल इज वेल’ का संदेश तनाव से लड़ने की प्रेरणा देता है. फिल्म बताती है कि सफलता के पीछे भागने के बजाय काबिल बनना जरूरी है.

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