बिहार कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नई लिस्ट पर सियासत गरम, जातीय संतुलन पर उठे सवाल, जानिए किसे कितना प्रतिनिधित्व मिला
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Bihar Politics: बिहार कांग्रेस की नई जिलाध्यक्ष सूची ने सियासी हलचल तेज कर दी है. जातीय संतुलन को लेकर बेहद संवेदनशील इस राज्य में पार्टी की ओर से जारी इस लिस्ट को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. मल्लिकार्जुन खरगे और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में तैयार इस सूची को कई मायनों में चौंकाने वाला माना जा रहा है.

बिहार कांग्रेस की नई लिस्ट से सियासत गरम, जातीय संतुलन पर उठे सवाल
पटना. बिहार में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी हुई है. आप यह सूची देखेंगे तो आपको यह कई मायनों में चौंकाने वाली लग सकती है. इसका कारण इस लिस्ट में विभिन्न जातियों को मिले प्रतिनिधित्व है. खास बात यह है कि इसमें 10 यादव जाति के जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं तो10 ब्राह्मण जाति से भी बनाए गए हैं. पूरी सूची में सामान्य वर्ग के जातियों का बोलबाला आप सीधे तौर पर देख पाएंगे. कुल 53 जिलाध्यक्षों में चौबीस सामान्य वर्ग से हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस के 7 मुसलमान और 1 सिख जिलाध्यक्ष बनाया गया है.
बिहार कांग्रेस की लिस्ट चौंकाने वाली
बता दें, कांग्रेस के संगठन संचालन की दृष्टि से कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों की संख्या 40 से बढ़ाकर 53 कर दी है. इनमें से 10 पुराने जिलाध्यक्षों को ही रखा गया है, जबकि 43 नए अध्यक्ष बनाए गए. कुल संख्या में जहां 7 दलित हैं तो तीन कुशवाहा भी है. साफ है कि कांग्रेस के इस सूची को देखते हुए हर कोई चौंक जाएगा, क्योंकि बिहार जातिगत दृष्टि से बेहद गंभीर राज्य है और यहां जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के नारे लगते रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस ने यह फैसला क्यों किया, यह सवाल राजनीति के गलियारों में गूंज रहा है.
किसे मिला कितना प्रतिनिधित्व
पूरी सूची पर प्रकाश डालें तो अनुसूचित जाति यानी दलित वर्ग से 7 जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं. वहीं, पिछड़ा वर्ग में यादव जाति के 10 जिला अध्यक्ष हैं. पिछड़ी जाति से शेष जातियों को उतनी तवज्जो नहीं दी गई है. वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग से कुशवाहा जाति के केवल 3 जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं, जबकि अति पिछड़ा वर्ग से ही अन्य जातियों को कुछ खास तवज्जो नहीं मिली है.
बिहार में कांग्रेस जिलाध्यक्षों में जाति-धर्म के आधार पर प्रतिनिधित्व
| जाति | संख्या | जाति | संख्या |
| ब्राह्मण | 10 | यादव | 10 |
| मुसलमान | 07 | दलित | 07 |
| भूमिहार | 07 | राजपूत | 07 |
| कुशवाहा | 03 | कायस्थ | 02 |
| सिख | 01 | अन्य | 01 |
जातीय समीकरण बिगाड़ने का आरोप
यहां यह भी बता दें कि बिहार में ईबीसी वर्ग की कुल आबादी अनुमानित रूप से लगभग 36% है, जबकि पिछड़ा वर्ग में सिर्फ यादव जाति ही 14.26 प्रतिशत है. पिछड़े वर्ग की अन्य जातियों को मिला लें तो कुल अनुमान 27 प्रतिशत के करीब आता है. वहीं मुसलमानों की कुल आबादी करीब 18% है, जबकि ब्राह्मण समेत पूरे सामान्य वर्ग की आबादी को मिला दें तो यह 15% के लगभग है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जातिगत रूप से संवेदनशील बिहार प्रदेश में आखिरकार कांग्रेस ने यह जोखिम क्यों लिया, अभी तक इसकी स्पष्टता नहीं है.
कांग्रेस की नई टीम पर बवाल
दूसरी ओर राजनीतिक दृष्टि से चौंकाने वाली बात यह भी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, दोनों ही दलित हैं. ऐसे में कांग्रेस का फैसला हैरान कर रहा है. हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने सूची पर फिर से गौर करने और एक तरह से संशोधन करने की बात कही है लेकिन फिलहाल जो सूची निकली है उस पर पार्टी के भीतर ही काफी हंगामा मचा हुआ है.
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